देश में चुनाव पूरे उफान पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने व्यस्त प्रचार अभियान के बीच इंडिया टुडे ग्रुप के टीवी न्यूज एंकरों राहुल कंवल, सुधीर चौधरी, अंजना ओम कश्यप और श्वेता सिंह से बातचीत की. प्रधानमंत्री ने राजधानी दिल्ली में 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर अपने लिए तय चुनौतियों, दुनिया में देश के कद, विपक्ष के आरोपों सहित अनेक मुद्दों पर बेबाक जवाब दिए. संपादित अंश:
• आपने एनडीए के लिए 'चार सौ पार' के नारे के साथ शुरुआत की और हर कोई आपकी आलोचना करने लगा. क्या आप अपने लक्ष्य में संशोधन करना चाहेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी: आपके परिवार हैं, आपके बच्चे हैं. अगर आपका बच्चा 90 फीसद अंक लाता है, तो अगली बार 95 फीसद अंक लाना, आप ये उससे जरूर कहते होंगे. अगर वह 99 फीसद अंक पाता है तो आप उसे 100 फीसद अंक प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं. 2019 से 2024 तक हमारे पास पहले ही एनडीए और एनडीए+ के लिए 400 का आंकड़ा था. यह मेरा कर्तव्य बनता है अभिभावक के रूप में कि 400 से अधिक का आंकड़ा पार करूं, आगे बढ़ूं. दूसरे, जहां तक जवाबदेही का सवाल है, यह एक नेता का कर्तव्य है. आज देश का दुर्भाग्य है कि दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ दिया जाता है, नेता भाग जाते हैं, चमड़ी बचाते हैं. यहां आपके पास ऐसा व्यक्ति है जो जिम्मेदारी लेने को तैयार है, जो भागता नहीं है, जो अपनी हर बात की जवाबदेही लेता है. देश में हर राजनैतिक दल में जिम्मेदारी लेने वाले लोग होने चाहिए. ऐसे लोग नहीं होने चाहिए जो अपने साथियों पर ठीकरा फोड़कर भाग जाएं. यह शोभा नहीं देता है.
• क्या आपको लगता है कि यह सबसे आसान चुनाव है?
प्रधानमंत्री मोदी: किसी को कभी भी चैन की सांस नहीं लेनी चाहिए. अगर यह आसान हो गया तो मैं अपने लिए एक चुनौती खड़ी करूंगा. सीधे-सपाट हाइवे पर दुर्घटनाएं अधिक होती हैं. जहां कर्व (मोड़) आते हैं वहां दुर्घटनाएं कम होती हैं. मैं अपनी टीम को सचेत रखना चाहता हूं, उसे हमेशा सक्रिय रखना चाहता हूं.
• एक नया नैरेटिव जोर पकड़ता दिख रहा है कि संविधान बदल दिया जाएगा.
प्रधानमंत्री मोदी: सवाल यह पूछा जाना चाहिए कि संविधान के साथ खिलवाड़ करने वाला पहला व्यक्ति कौन था? पंडित नेहरू थे. वे संविधान में जो पहला संशोधन लाए, वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने का था. वह लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध था. दूसरा उनकी बेटी इंदिरा गांधी लेकर आईं. अदालत ने फैसला सुनाया कि आप संसद में नहीं रह सकतीं, उन्होंने कोर्ट के जजमेंट को पलट दिया. देश में आंदोलन चला तो उन्होंने इमरजेंसी लगा दी और अखबारों पर सेंसरशिप थोप दी.
उसके बाद उनके बेटे आए. शाहबानो का जजमेंट आया. उन्होंने (राजीव गांधी) सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया. फिर उनके बेटे (राहुल गांधी) आए. रिमोट कंट्रोल से सरकार चल रही थी, पीएम (मनमोहन सिंह) रिमोट कंट्रोल से चलते थे. संविधान की कोख से सरकार बनी थी, कैबिनेट भी संविधान से बनती है. उस कैबिनेट ने एक निर्णय लिया और एक 'शहजादा' आता है, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कैबिनेट के निर्णय की धज्जियां उड़ा देता है, जिससे कैबिनेट को उसे वापस लेने को मजबूर होना पड़ता है.
इसका मतलब है कि एक ही परिवार के चार लोगों ने अलग-अलग समय पर संविधान की धज्जियां उड़ाई हैं. उन लोगों के लिए संविधान के साथ इस प्रकार की गंदी हरकतें करने का जमाना चला गया. इसीलिए आज मैं डंके की चोट पर लोगों को कहता हूं कि मोदी जब तक जिंदा है, तब तक धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होगा. मैं इसके लिए लड़ाई लड़ूंगा, इसके लिए मैं अपनी जान खपा दूंगा. आप एक बार देश को धर्म के आधार पर बांट चुके हैं.
• विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि लोकतंत्र खतरे में है, लोकतांत्रिक संस्थाएं पहले से कमजोर हो गई हैं. इस हद तक कि वे आप पर तानाशाह होने का आरोप लगा रही हैं. आप इसे किस प्रकार देखते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी: पहले तो हम संसद में विपक्ष से बार-बार कहते रहे कि आओ और बहस करो. लेकिन उसका कोई भी नेता कुछ नहीं कहता. उसके सारे नए सांसद आकर कहते हैं कि हमारे पांच साल बर्बाद हो गए. हम सदन में एक शब्द भी नहीं बोल सके. दुर्भाग्य से, कांग्रेस परिवार के लिए लोकतंत्र का मतलब सत्ता में रहना है. वे अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि 2014 से कोई और सरकार और प्रधानमंत्री सत्ता में है. प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में कहा कि उन्होंने मेरे साथ जो काम किया, वह लोकतांत्रिक तरीके से किया. राष्ट्रपति नामक संस्था की कितनी प्रतिष्ठा हमने बढ़ाई है. सुप्रीम कोर्ट...मेरी सरकार पर आरोप ये है कि इनकी तो सुप्रीम कोर्ट में कुछ चलती ही नहीं है. हमारी एबिलिटी (क्षमता) पर सवाल उठाया जा रहा है. इसका मतलब है कि पहले कुछ योग्य लोग जो न्यायपालिका और संस्थाओं को मैनेज करते थे और वो इंस्टीट्यूशन ठीक थे. मैं मानता हूं, मुझे मैनेज क्यों करना चाहिए? कानून अपना काम करेगा.
• विपक्ष का दावा है कि विपक्षी नेताओं के मामले में ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग आक्रामक हैं, यहां तक कि कुछ को जेल भी भेजा गया है, लेकिन एनडीए में शामिल होने वालों पर नरम होते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी: हमें यह पूछने की जरूरत है कि अगर ईडी को 10 साल में इतना भुगतान किया जा रहा है, तो उसने 2004 से 2014 के बीच क्या काम किया? प्रशासन वही था, नियम वही थे. मैंने कानून नहीं बदला, ईडी का गठन नहीं किया... उसने 10 साल में सिर्फ 34 लाख रुपये जब्त किए. हम विपक्ष में थे. मेरी सरकार ने 2,200 करोड़ रुपये जब्त किए हैं. आपके टीवी चैनलों ने नोटों के वे बंडल दिखाए हैं. आप उस ईडी को कैसे बदनाम कर सकते हैं? किसी सांसद के घर से नोटों की गड्डियां मिलीं, आप इससे कैसे इनकार कर सकते हैं? मुझे बताइए, अगर मैं नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ूं, तो क्या आप उसकी पैरवी करेंगे? अगर ईडी ऐसा करता है तो उसकी आलोचना होती है. क्यों? क्योंकि किसी नेता के घर से पकड़ा गया.
• और आपको लगता है कि यह एनडीए और विपक्ष सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए?
प्रधानमंत्री मोदी: कोई भी...इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कौन है. मेरी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है. देश में से भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए. यह देश में विनाश कर रहा है, बहुत विनाश कर रहा है.
• रोजगार बनाम लाभार्थी. कांग्रेस के न्याय-पत्र में 30 लाख नौकरियां, शिक्षित युवाओं को 1 लाख रुपये देने का वादा किया गया है. आपका फोकस लाभार्थियों पर है.
प्रधानमंत्री मोदी: केंद्र सरकार रोजगार के लिए जिम्मेदार है, तो राज्य सरकार और स्थानीय निकाय भी उतनी ही जिम्मेदार है. इसलिए मेरी जिम्मेदारी बहुत कम होनी चाहिए. फिर भी, अगर आप वादों को पूरा करने की बात करते हैं...हाल ही में, रोजगार के आंकड़े आए हैं...10 वर्षों में जो माइक्रोफाइनेंस ने नौकरियां पैदा की हैं, क्या आप इसे रोजगार नहीं मानते? 10-12 केंद्रीय योजनाएं हैं जिनके आधार पर उन्होंने यह विश्लेषण किया है. इसलिए आप घर बनाते हैं तो उससे कितने पर्सन ऑवर (पहले मैन ऑवर था, अब इस शब्द को जेंडर न्यूट्रल किया गया है) रोजगार मिलता है. ये सब चीजें जोड़ दें तो छह करोड़ नई नौकरियां मिल रही हैं; यह रिकार्ड में है. इसके अलावा, हमने 43 करोड़ लोगों को मुद्रा ऋण दिया. उसमें 70 फीसद ऐसे हैं जिन्हें पहली बार रोजगार मिला है.
• हाल ही अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी की एक रिपोर्ट आई, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में आय की गैर-बराबरी बढ़ रही है. भारत में आर्थिक वृद्धि के-आकार की है, ऊपर के लोग अमीर हो रहे हैं और नीचे के लोग गरीब हो रहे हैं. आप इसे कैसे देखते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी: तो क्या सबके सब गरीब होना चाहिए. यह एक समाधान है; फिर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पहले ऐसा ही था. अब आप कहते हैं कि हर किसी को अमीर होना चाहिए. तो क्या यह धीरे-धीरे होगा या हर कोई रातो-रात अमीर बन जाएगा? कुछ अमीर बन जाएंगे और दूसरों को ऊपर उठाएंगे, यह एक प्रक्रिया है. आज 10 लोग आगे बढ़ेंगे, कल 100 लोग आगे बढ़ेंगे और परसों 500 लोग आगे बढ़ेंगे.
• राहुल गांधी आप पर बड़े कारोबारी घरानों—अंबानी और अदाणी के साथ दोस्ती का आरोप लगा रहे हैं.
प्रधानमंत्री मोदी: नेहरू की सरकार को टाटा-बिरला की सरकार कहा जाता था. इस परिवार के साथ समस्या यह है कि उनका मानना है कि मोदी को भी उनके परदादा की तरह गाली दी जानी चाहिए. उन्होंने राफेल का मुद्दा क्यों उठाया? उन्होंने सोचा कि अगर वे राफेल उठा लेंगे तो इससे बोफोर्स के पाप धुल जाएंगे. उन्होंने कभी इतनी मेहनत नहीं की जितनी इस चुनाव में की. क्यों? उनका मानना है कि अगर मोदी तीसरी बार जीत गए तो मेरे पिताजी की कोई इज्जत नहीं रहेगी, मेरी दादी की कोई इज्जत नहीं रहेगी, वह नेहरू के बराबर हो जाएगा. इसलिए उन्होंने ये गालियां कहीं से उधार ली हैं. दूसरी बात, और मैं लाल किले से बोलता हूं, मैं शर्माता नहीं हूं कि इस देश में वेल्थ क्रिएटर्स (संपत्ति सृजन करने वाले) की इज्जत होनी चाहिए. मेरे देश में जो सक्षम लोग हैं उनकी प्रतिष्ठा बढ़नी चाहिए. मैं अमीरों की मदद नहीं कर रहा हूं. वे मेरे राष्ट्र का गौरव हैं. मैं अपने देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए मजदूर के पसीने का भी उतना ही सम्मान करता हूं जितना पूंजीपति के पैसे का.
• लाभार्थियों से कोई नहीं पूछता कि वे हिंदू हैं या मुसलमान. तो फिर चुनावी रैलियों में मंगलसूत्र, घुसपैठिए, 'अधिक बच्चे' जैसी बातें क्यों उठाई जाती हैं? विपक्ष आप पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने का आरोप लगाता है.
प्रधानमंत्री मोदी: वे पूरी तरह से सांप्रदायिक एजेंडे पर चल रहे थे और मैंने उसका भंडाफोड़ कर दिया. वे उस बुनियादी तथ्य को दबा देते हैं. मीडिया भी उनके दबाव में आ जाता है. जो मैं कहता हूं वे उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, इसलिए ऐसा लगता है कि मैं हर समय 'मुसलमान-मुसलमान' करता हूं. यह बात नहीं है. मुद्दा यह है कि उन्होंने अपने घोषणा पत्र में लिखा है कि अब वे ठेकेदारी प्रथा में भी अल्पसंख्यकों को लाएंगे. ठेका अल्पसंख्यकों को दिया जाएगा. अगर मैं ठेका प्रथा का विरोध करता, तो मैं धर्मनिरपेक्ष हूं लेकिन क्योंकि मुझे अल्पसंख्यक या मुस्लिम शब्द का उपयोग करना पड़ता है, तो आपको लगता है कि मैं मुसलमानों पर हमला कर रहा हूं.
मैं उन पर हमला नहीं कर रहा हूं. मैं उन राजनैतिक दलों पर हमला कर रहा हूं जो भारत की धर्मनिरपेक्षता की धज्जियां उड़ा रहे हैं, तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं. वे संविधान की भावना को नष्ट कर रहे हैं. मेरे पास सबूत है कि मैं ऐसा नहीं करता. कैसे? मैं 100 फीसद सैचुरेशन की बात करता हूं. किसी गांव में 700 लोग हैं और किसी योजना का लाभ 100 लोगों को मिल सकता है तो सभी को मिलना चाहिए. मैं उनका धर्म नहीं देखता. इसलिए प्रशासन में भेदभाव नहीं होना चाहिए. धर्मनिरपेक्षता होनी चाहिए. हमने कहीं भी 'हिंदू-मुस्लिम' नहीं किया है. हम उनके घोषणापत्र को समझाने की कोशिश कर रहे हैं. मैं मुसलमानों से कह रहा हूं कि वे लोग आपको मूर्ख बना रहे हैं, वे आपको 75 साल से मूर्ख बना रहे हैं. आप उन्हें ऐसा क्यों करने दे रहे हैं?
• आपने कहा कि आप कभी भी 'हिंदू-मुस्लिम' नहीं करेंगे.
प्रधानमंत्री मोदी: मैंने कभी भी 'हिंदू-मुस्लिम' नहीं किया और न ही भविष्य में ऐसा करूंगा. लेकिन अगर मैं तीन तलाक गलत है, वो अगर कहता हूं और आप मुझे मुस्लिम विरोधी करार देते हैं तो यह आपकी मजबूरी है, मेरी नहीं.
• महिलाओं के लिए 33 फीसद आरक्षण, जो बाद में लागू होगा, पुरुष-प्रधान राजनैतिक व्यवस्था को खोल देगा. आप चीजों को कैसे बदलते हुए देखते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी: यहां तक कि पश्चिम के लोग भी आश्चर्यचकित हो जाते हैं जब मैं उन्हें बताता हूं कि हमारे यहां गर्भवती महिलाओं के लिए 26 सप्ताह की छुट्टी है. हमने भारत में यह धारणा बना ली है कि महिलाएं घरेलू होती हैं, यह सच नहीं है. हमारे कृषि क्षेत्र को देखें. आज भी इस क्षेत्र में महिलाओं का योगदान 60 फीसद है. लेकिन हम दुनिया के सामने अपनी असली छवि पेश नहीं कर पाए हैं. आज भारत में महिला कमर्शियल पायलट 15 फीसद हैं जो दुनिया के किसी भी देश के लिहाज से सर्वाधिक है.
• हमारा मानना है कि महिलाएं आपकी मौन मतदाता हैं. लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है क्योंकि सभी राजनैतिक दल उनके वोट पाने के लिए मुफ्त सुविधाओं की घोषणा कर रहे हैं?
प्रधानमंत्री मोदी: मुद्दा दरअसल महिलाओं का नहीं है. मुद्दा यह है कि क्या राजनैतिक दलों को चुनाव जीतने के लिए खजाना खाली कर देना चाहिए. क्या मुझे खजाना लुटाने का अधिकार है? यह सोचने का विषय है. आप एक शहर में मेट्रो बनाते हैं. और फिर आप चुनाव जीतने के लिए उसी शहर में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा करते हैं. इसका मतलब है कि आपने मेट्रो की आमदनी से 50 फीसद यात्रियों को बाहर कर दिया है, जिससे वह अव्यावहारिक हो गया है. क्या हम इसे भविष्य में बनाएंगे या नहीं? चिंता इसी बात की है.
• अगले पांच वर्षों में विश्व मंच पर भारत की भूमिका क्या होगी?
प्रधानमंत्री मोदी: पहले का नैरेटिव यह था कि हम समान दूरी बनाकर चलेंगे, यही कूटनीति की भाषा थी. मैंने कहा, ऐसा नहीं है. मेरी भाषा में कहें तो हर किसी को करीब रहना चाहिए. पहले दूर रहने की होड़ थी, अब हर कोई हमारे करीब आने की होड़ में है. साथ ही हम अपने फैसले किसी तीसरे के आधार पर नहीं लेते. हम अपने फैसले खुद लेते हैं. मैं हर किसी से बात करता हूं. अगर राष्ट्रपति पुतिन मेरी तारीफ करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि मैं उन्हें यह नहीं बता सकता कि यह युद्ध का समय नहीं है. जब इरादे नेक होते हैं तो लोग आप पर भरोसा करते हैं. मेरा कोई छुपा एजेंडा नहीं है. मैं अमेरिकियों को बताता हूं, उनसे पूछता नहीं. अगर मेरे देश को रूस से सस्ता तेल चाहिए तो मैं लूंगा, क्योंकि यह मेरे लिए महत्वपूर्ण है. मैं इसे छिपाऊंगा नहीं. मैं देश को अपनी शर्तों पर चलाता हूं.
• आप किस तरह की विरासत पीछे छोड़ना चाहेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी: मुझसे पहले भी यह पूछा जा चुका है. मैं हैरान हूं. जो व्यक्ति देश के लिए जीता है, वह अपने बारे में क्यों सोचेगा? मैं इसलिए काम नहीं करता कि लोग मुझे याद रखें. अगर उन्हें कुछ याद रखना है तो वह है कश्मीर में 40 साल बाद 40 फीसद मतदान और लोकतंत्र का उत्सव मनाना. जी20 के बारे में सोचें, जहां लोगों ने भारत की प्रशंसा की. उस समय के बारे में सोचें जब भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. मोदी का इससे क्या लेना-देना? मेरे जैसे सैकड़ों लोग आएंगे और चले जाएंगे.

