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"मुझे बैड बॉय बहुत अच्छे लगते हैं"

वीजे, ऐक्टर और अब ट्रैवल इन्फ्लुएंसर बनीं शेनाज ट्रेजरी अतीत के इन रोमांसों पर एक किताब लेकर आईं: ऑल ही लेफ्ट मी वाज ए रेसिपी.

शेनाज ट्रेजरी
शेनाज ट्रेजरी
अपडेटेड 23 मई , 2024

● आपको कब इलहाम हुआ कि आप एक लेखिका हैं?

मैं बच्ची थी तभी से लिख रही हूं. पहली बार जब यह विचार सूझा तो मैं उसे एक शो में ढालना चाहती थी. पर वह सब चूंकि एक लंबी-चौड़ी प्रक्रिया है इसलिए मैं किताब के लिए पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के पास गई. उन्हें यह विचार बहुत पसंद आया. पांच साल पहले मैंने इसे लिखना शुरू किया पर तभी मेरी ट्रैवल व्लॉगिंग ने रफ्तार पकड़ ली और यह पीछे छूट गई. फिर पिछले साल तय किया कि यात्रा कम करूंगी और लिखूंगी ज्यादा. इसे पूरा करूंगी, नतीजा: किताब सामने है.

कहानी में हकीकत कितनी और फसाना कितना है?

इसका अंदाज पाठक ही लगाएं तो मुझे अच्छा लगेगा...मगर कह सकते हैं कि फसाने से ज्यादा हकीकत है. यह एक लड़की की जिंदगी के बारे में है, तभी से जब वह चार साल की थी. हर चैप्टर में वह जिंदगी के अलहदा पड़ाव पर, अलहदा लड़के के साथ है. आप उसकी जिंदगी का सफर उन लड़कों के जरिए देखते हैं जिन्हें वह डेट करती है.

इसमें आपका पसंदीदा किरदार कौन-सा है?

मैं तो इस पर शो बनाने को बेताब हूं. हर एपिसोड में अलग हॉट लड़का होगा और कभी-कभार कोई कोई वापसी भी करेगा. पर अगर मुझे अपना पसंदीदा चुनना हो तो यह रोलर बॉय होगा, जिससे वह पहले 2001 में मिलती और डेट करती है और फिर वह 2011 में वापस आता है. किताब में वह 'बैडेस्ट' लड़का है, बिल्कुल जंगली, सबसे प्यारा, जुनूनी और सेक्सी. मुझे बैड बॉय बहुत अच्छे लगते हैं. हर कोई मुझे अच्छी लड़की की तरह देखता है... मुझे लगता है अच्छी लड़कियां बैड बॉय को इसलिए चाहती हैं क्योंकि वे हमें अच्छी लड़कियां होने के दबाव से मुक्त कर देते हैं.

रिश्ते हों या सोशल मीडिया, आप हमेशा खुद को सामने रख देती हैं. मौजूदा दौर के ट्रोल्स ने कभी आपको अपने नजरिए पर सोचने को मजबूर किया?

मैं तो बस! मैं ही हूं. 16 की उम्र में टीवी कमर्शियल कर रही थी. फिर मैंने एमटीवी किया, फिर भारत में मूवीज, फिर एशिया में एमटीवी, फिर मैं न्यूयॉर्क चली गई और वहां मैंने मूवीज और शो किए. अगर आप इस बात की परवाह करते हैं कि लोग क्या सोचते हैं तो आप ऐक्टर या टीवी पर्सनैलिटी या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नहीं हो सकते. तो अब सोशल मीडिया पर असल रूप में मैं हूं. और यह थकाऊ नहीं बल्कि जी खुश कर देने वाला है.

- प्रिया पाथेयान

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