
इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस (इंडिया) के संयोजक के तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का मुकाबला करने के लिए एक साझा नैरेटिव बनाने तथा सीट बंटवारे की व्यवस्था पर 26 पार्टियों में एकराय बनाने की बड़ी चुनौती है.
81 वर्षीय कांग्रेस अध्यक्ष को 2019 के लोकसभा चुनाव में 52 सीटों तक सिमटने के अपने निराशाजनक प्रदर्शन में भी सुधार करने के लिए ग्रैंड ओल्ड पार्टी को प्रोत्साहित करना होगा. खड़गे ने अपने व्यस्त कार्यक्रम में से वक्त निकालकर ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और एग्जीक्यूटिव एडिटर कौशिक डेका से कई अहम चुनावी मुद्दों पर बातचीत की. पेश हैं उसके प्रमुख अंश:
● आपको 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कैसे प्रदर्शन की उम्मीद है? आपकी प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?
कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर लोगों का गजब का भरोसा है. हमें उम्मीद है कि हम बहुमत का आंकड़ा पार कर लेंगे. हालांकि, हम संसाधन की कमी से जूझ रहे हैं. प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) मोदी हमें लड़ने के लिए बराबरी का मैदान नहीं दे रहे हैं. लोकतंत्र में अगर आप सभी को बराबरी की जगह नहीं देंगे तो पता ही नहीं चलेगा कि जनता का समर्थन किसके पक्ष में है. वे अपने विरोधियों को धकियाते-धमकाते हैं.
कांग्रेस और अन्य पार्टियों से 25 नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं या उनके सहयोगी बन गए हैं. मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी के मामले दर्ज किए. लेकिन नेताओं के पाला बदलने के बाद उनमें से 23 के खिलाफ मामले बंद कर दिए गए.
मोदी कांग्रेस को भ्रष्ट पार्टी बताते रहते हैं. उनका कहना है कि वे भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं, लेकिन उनकी बगल में भ्रष्टाचारी बैठे हैं. उनका कहना है कि भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा. लेकिन मोदी से हाथ मिलाने पर वे बच जाते हैं. वे यह धारणा बनाने की कोशिश करते हैं कि वे ही एकमात्र ईमानदार व्यक्ति हैं और बाकी सभी भ्रष्ट हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि मोदी सरकार सबसे भ्रष्ट है.
● यह एक गंभीर आरोप है, इसके क्या सबूत हैं?
सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मोदी सरकार के दौरान 8.5 लाख करोड़ रुपए के घोटाले हुए हैं. अगर ये आरोप गलत हैं तो सीएजी और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करें, जिन्होंने ये रिपोर्ट्स बनाई हैं. मीडिया भी इसे जानता है, मगर इसे उजागर नहीं करता क्योंकि पत्रकार भी निशाने पर हैं. सरकार सबूत मांगती है, लेकिन जब सभी को निशाना बनाया जा रहा है तो सबूत कैसे आएगा?
न्यायपालिका, सतर्कता आयोग, ईडी हर जगह उनके लोग बैठे हैं. उन्होंने सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है. जवाबदेही कहां है? पहले से ही अघोषित आपातकाल लगा हुआ है. मोदी तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं. वे कभी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते. हमें चिंता है कि हमारे लोकतंत्र और संविधान का क्या होगा. न तो बोलने की आजादी रह जाएगी, न ही चुनने या आंदोलन करने की कोई आजादी होगी.

● लेकिन भाजपा इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार और 1975 के आपातकाल की ओर इशारा करती है...
यह प्रोपगेंडा चार दशकों से अधिक समय से चल रहा है. इंदिरा गांधी ने स्वीकार किया कि वह एक गलती थी. मोदी सरकार बदतर कर रही है, अब मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार किया जा रहा है. आपातकाल के दौरान सिर्फ आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया गया था. अब कहां है शासन-प्रशासन...सिर्फ प्रतिशोध है. आप अगर आदेश का पालन नहीं करते, तो आपको परेशान किया जाता है.
● भाजपा कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर बेहद भ्रष्ट होने का आरोप भी लगाती है और कहती है कि इसी वजह से उसे 2014 में सत्ता गंवानी पड़ी...
भाजपा ने यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए. तथाकथित 2जी घोटाले और कोयला घोटाले का क्या हुआ? हमारे खिलाफ कुछ भी साबित नहीं हुआ. सीएजी रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने तिल का ताड़ बना दिया.
प्रधानमंत्री गांधी परिवार को दोष देते रहते हैं. गांधी परिवार का कोई भी सदस्य 1989 के बाद से सत्ता में नहीं है. उन्होंने कभी भी किसी अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया. फिर भी वे परिवार को अपमानित करते रहते हैं. क्यों?
क्योंकि वे गांधी परिवार से डरते हैं. सोनिया गांधी कम ही बोलती हैं. फिर भी, लोग उन्हें गंभीरता से लेते हैं. मोदी रोज तुर्श लहजे में बोलते हैं. कोई भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेता. वे हर वक्त कैंपेन मोड में हैं. क्या आपने कभी ऐसा प्रधानमंत्री देखा है जो जिला पंचायत से लेकर लोकसभा तक चुनाव प्रचार करता फिरता हो? वे हमेशा रैलियों में होते हैं, अपने कार्यालय में कभी नहीं. वे कभी भी अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते, इसलिए गलत फैसले ले लेते हैं. उनका मकसद चुनाव लड़ना है, विकास नहीं.
● आप कांग्रेस के प्रदर्शन में कहां सुधार देखते हैं? पिछले दो चुनाव में जिन लगभग 200 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने थीं, उनमें से 90 फीसद से अधिक सीटें भाजपा जीत गई.
लगभग दो-तिहाई राज्य कभी गैर-भाजपा दलों के नियंत्रण में थे. जहां भी कांग्रेस या भाजपा विरोधी दल जीते, मोदी ने सरकार पर दबाव बनाया. लोगों ने देखा है कि कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा और मणिपुर में हमारी सरकारें कैसे गिरीं.
राजस्थान में सरकार बाल-बाल बच गई थी. अब, वे हिमाचल प्रदेश में हमारे पीछे पड़े हैं. वे केंद्र से राज्यों को पैसा जारी नहीं करते, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता नहीं देते. प्रधानमंत्री ने यह फर्जी धारणा बनाई है कि सिर्फ वे ही कुछ कर सकते हैं.
उन्हें आरएसएस का भी समर्थन है, ताकि मोदी उसका एजेंडा पूरा करें. चुनाव से ठीक पहले वे पुलवामा सरीखे भावनात्मक मुद्दों का फायदा उठाते हैं या सांप्रदायिक आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करते हैं.
इन परिस्थितियों में, लोग विचारधारा या कामकाज के रिकॉर्ड के आधार पर वोट नहीं देते हैं. मोदी अपने विकास रिकॉर्ड के साथ मतदाताओं के पास नहीं जा रहे हैं क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं है.
वे कह रहे हैं, "अगर आप राम को चाहते हैं तो मुझे वोट दीजिए." हालांकि, कांग्रेस और हमारे गठबंधन सहयोगी कड़ी मेहनत कर रहे हैं. हम कम से कम 80 फीसद सीटों पर एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं. 'इंडिया' ब्लॉक को इस चुनाव में बहुमत मिलेगा. इस बार अंडरकरंट मोदी पर भारी पड़ेगा.
● राजनैतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस चुनाव में अयोध्या का राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा बनने की संभावना है. क्या आपको ऐसा लगता है? कांग्रेस प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल क्यों नहीं हुई?
मैं दलित हूं. मैं भी हिंदू हूं. मेरे नाम मल्लिकार्जुन का अर्थ 'पर्वत देव' है, जो भगवान शिव का दूसरा नाम है. लेकिन मुझे मंदिर के अंदर पूजा करने की अनुमति नहीं है. इस देश में आज भी कई जगहों पर दलितों को मंदिरों में प्रवेश की इजाजत नहीं है. क्या एक निमंत्रण उस समस्या का समाधान कर सकता है?
दलितों को अभी भी उसी स्रोत से पानी पीने की अनुमति नहीं है जिसका उपयोग ऊंची जाति के लोग करते हैं. दलितों की बरात को जबरदस्ती रोका जाता है. दलित दूल्हों को घोड़ी पर चढ़ने पर पीटा जाता है. मैंने कभी जाति का कार्ड नहीं खेला, लेकिन यह सच है.
दलितों को मंदिरों में प्रवेश की अनुमति नहीं है, मूर्ति के पास जाने की बात तो भूल ही जाइए. इससे हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है. भाजपा का कहना है कि उसने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को देश का राष्ट्रपति बनाया है. लेकिन क्या भाजपा नेता उन लोगों का सम्मान करते हैं?
जब नई संसद की आधारशिला रखी गई तो तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद को आमंत्रित नहीं किया गया. मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नए संसद भवन का उद्घाटन नहीं करने दिया. यहां तक कि शंकराचार्य भी (अयोध्या के) मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हुए.
भाजपा सतह पर जो दिखाती है, वह सच नहीं है. कांग्रेस के विपरीत इसका एक छिपा हुआ एजेंडा है. कांग्रेस में सभी के लिए जगह है. जहां तक सवाल इस चुनाव में राम मंदिर के असर का है, तो मुझे लगता है कि धर्म एक व्यक्तिगत मामला है और लोग किसी एक व्यक्ति के बनाए मूड के आधार पर वोट नहीं देंगे.
● कांग्रेस वोटरों को लुभाने के लिए 25 गारंटी लेकर आई है. ये मोदी की गारंटी से कैसे अलग हैं?
हमने 2004 और 2009 में कोई गारंटी नहीं दी थी. लेकिन हमने डिलिवर किया. हमने मनरेगा की शुरुआत की, हमने सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और भोजन का अधिकार देने वाले कानून बनाए. हमने बड़ी-बड़ी बातें नहीं कीं, हमने काम किया. हम अपनी गारंटी के प्रति ईमानदार हैं. मोदी की गारंटी क्या थी? हर साल दो करोड़ नौकरियां. हर खाते में 15 लाख रुपए. किसानों की आय दोगुनी होगी. लाखों लोगों के लिए हुनर प्रशिक्षण. क्या उन्होंने इनमें से कोई भी गारंटी पूरी की है?
कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में कांग्रेस सरकारों ने विधानसभा चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा किया है. जब हमारी गारंटी काम करती है तो मोदी बस उसकी नकल करते हैं.
वे युवाओं, गरीबों, महिलाओं और किसानों, सभी को बेवकूफ बना रहे हैं. जब भी हम कुछ सवाल करते हैं तो मोदी हम पर उंगली उठाते हैं. अगर हम ईवीएम का मुद्दा उठाते हैं तो वे कहते हैं कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब भी ईवीएम था. मुद्दा तकनीक का नहीं, बल्कि उसके दुरुपयोग का है. चाकू का इस्तेमाल सब्जी काटने या किसी को मारने के लिए भी किया जा सकता है. औजार वही है. मोदी उन औजारों का इस्तेमाल जन कल्याण के लिए नहीं, बल्कि विपक्ष को कुचलने के लिए कर रहे हैं.
● आप प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के मुद्दे पर क्या सोचते हैं?
पिछले 10 वर्षों में कितने बड़े, रोजगार पैदा करने वाले उद्योग स्थापित किए गए हैं? क्या आपने एम्स, आईआईएम, आईईइटी और आईआईएससी जैसे कोई मौलिक संस्थान बनाए हैं? आप केवल संख्याएं जोड़ रहे हैं.
क्या आपने वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बजट बढ़ाया है? क्या मोदी ने राकेश शर्मा को अंतरिक्ष में भेजा? राम मंदिर भी अधूरा है. मोदी ने चुनावी फायदे के लिए जल्दबाजी में उसका उद्घान टन कर दिया. आज रोजगार खत्म हो गया है. पढ़े-लिखे लोगों को लग रहा है कि भारत में कोई भविष्य नहीं है, इसीलिए लगभग 14 लाख लोग देश छोड़ चुके हैं, अपनी नागरिकता छोड़ चुके हैं.
● कांग्रेस के लिए जाति जनगणना अब इतना अहम मुद्दा क्यों है? यूपीए सरकार ने 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना के नतीजे जारी क्यों नहीं किए?
जाति जनगणना इसलिए अहम है ताकि सरकार उसके आधार पर जनकल्याण की सटीक नीतियां बना सके. 2011 की जाति जनगणना का डेटा आने के बाद हम केवल तीन साल सत्ता में थे. डेटा को मिलाने और उसका आकलन करने के लिए सरकार को समय चाहिए था. लेकिन मोदी सरकार तो पिछले 10 साल से सत्ता में है. उसने डेटा जारी क्यों नहीं किया?
● क्या आपको लगता है कि इंडिया गठबंधन ने अंदरूनी झगड़ों को सुलझाने में वक्त बर्बाद किया? नीतीश कुमार चले गए, एनसीपी टूट गई, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में अकेले लड़ रही हैं... सीट बंटवारे के समझौते होने में भी देरी हुई.
देरी नहीं हुई. जहां तक नीतीश की बात है, उनके इरादे नेक नहीं थे. हमारा विचारधारा का गठबंधन है. यह केवल सत्ता हथियाने के लिए नहीं है. हम सत्ता के लिए विचारधारा से समझौता नहीं करते, नीतीश करते हैं.
सेक्युलरिज्म की बात करते हैं और फिर भाजपा से हाथ मिला लेते हैं, यह पाखंड है. नीतीश अति पिछड़े वर्गों (ईबीसी) में अपना समर्थन बनाए रखना चाहते थे. उनमें राजद की लोकप्रियता बढ़ रही थी, इससे वे बेचैन थे. नेता आते और जाते रहते हैं, पर लोग इंडिया गठबंधन की ओर आ रहे हैं.
● ममता बनर्जी के साथ अधीर रंजन चौधरी के निजी मसलों की वजह से पश्चिम बंगाल में कांग्रेस-टीएमसी का गठबंधन नहीं हुआ. कांग्रेस का अध्यक्ष होने के नाते आपने पार्टी के व्यापक हित में उन पर लगाम क्यों नहीं लगाई?
हमने कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी. हम अभी भी कोशिश कर रहे हैं. नॉमिनेशन के लिए अभी समय है. जहां भी हो सकेगा, हम सामंजस्य बनाने की कोशिश करेंगे.
● प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा चुनावों को राष्ट्रपति प्रणाली की शैली में बदल दिया है. आलोचकों का कहना है कि विपक्ष की प्राथमिक कमजोरी यह है कि वह मोदी के खिलाफ मजबूत चेहरा नहीं पेश कर सका.
हम गठबंधन के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. जब हम सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएंगे, हम तय करेंगे कि कौन प्रधानमंत्री बनेगा. यह पहले भी हो चुका है, मोरारजी देसाई, वी.पी. सिंह और देवेगौड़ा के समय.
● लेकिन ज्यादातर चुनाव सर्वेक्षकों का कहना है कि लोग नेता को देखकर वोट देते हैं. आपको नहीं लगता कि पीएम के चेहरे का न होना कमजोरी है?
राजनीति में अपने 50 साल से भी ज्यादा के अनुभव के आधार मैं कह सकता हूं कि लोग विचारधारा को देखकर वोट देते हैं.
● आप जो विचाराधारा की लड़ाई लड़ रहे हैं, वह है क्या?
हमारी विचारधारा सीधी-सादी है, गरीब आगे बढ़ना चाहिए. मोदी के राज में अमीर और अमीर हो रहे हैं, गरीब और गरीब हो रहे हैं. जबरदस्त बेरोजगारी है, महंगाई बहुत ज्यादा है.
पिछले दो चुनाव उनके प्रोपगेंडा की ताकत पर जीते गए. लेकिन अब लोग इसमें जो झूठ है उसे देख सकते हैं. भाजपा पूछती रहती है 70 साल में क्या हुआ? अगर 70 साल में कुछ नहीं हुआ होता, तो आज हमने देश में इतनी ज्यादा प्रगति नहीं देखी होती.
क्या भारत को आजादी 2014 में ही मिली है? मोदी ने पहले आरएसएस के हिंदुत्व बचाओ एजेंडे से शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने वह एजेंडा एक तरफ रख दिया और हर चीज मोदी के बारे में कर दी. मोदी को बचाओ, मोदी की गारंटी. प्रधानमंत्री केवल अपने बारे में बात करते हैं. वे पार्टी और उसके सिद्धांतों की बात नहीं करते. इससे उनका अहंकार झलकता है. लोग उन्हें सबक सिखाएंगे.
● आप विचारधारा की बात करते हैं. लेकिन जिस कांग्रेस ने शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जांच की मांग की थी, उसने अब उन्हीं से हाथ मिला लिया. इस अंतर्विरोध को आप कैसे समझाएंगे?
हम एक मकसद के लिए लड़ रहे हैं, किसी व्यक्ति के लिए नहीं. हम भ्रष्टाचार की जांच के खिलाफ नहीं हैं, पर इसमें देश के कानूनों का पालन होना चाहिए. मोदी सरकार लोकतांत्रिक मानदंडों को व्यवस्थित तरीके से खत्म कर रही है, हम उसके खिलाफ लड़ रहे हैं.
इस लड़ाई का फायदा किसी को भी मिल सकता है. हम मोदी से कह रहे हैं कि संविधान का पालन कीजिए और अच्छा राजकाज दीजिए. लेकिन वे कानून अपने हाथ में ले रहे हैं और विरोधियों को जेल में डाल रहे हैं. वे संविधान के मूल सिद्धांतों का गला घोंट रहे हैं.
● कांग्रेस इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा उठा रही है. लेकिन आपकी पार्टी ने भी तो इन बॉन्ड के जरिए चंदा लिया है?
कांग्रेस सत्ता में नहीं है. हम लोगों को चंदा देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. वे अपनी मर्जी से हमें दान दे रहे हैं. लेकिन भाजपा ने धन कैसे इकट्ठा किया? बदले में ठेके देकर. रियायतें देकर. लोगों को गिरफ्तार करके. ठेकेदारों को धमकी देकर. ईडी के नोटिस भेजकर.
यह 'चंदा दो, धंधा लो' की नीति है. भाजपा सत्तासीन पार्टी की अपनी हैसियत का दुरुपयोग कर रही है. यही बुनियादी फर्क है. यह गैरकानूनी है. इसी तरह उन्होंने इतना सारा धन इकट्ठा किया है. भाजपा के धन जुटाने का मतलब है डकैती, हमें तो फंड के लिए विनती करनी पड़ी.
● क्या राहुल गांधी की दो यात्राएं इस चुनाव में सीटें हासिल करने में कांग्रेस की मदद करेंगी?
जबरदस्त असर पड़ा है. इन यात्राओं के दौरान राहुल सभी क्षेत्रों के लाखों लोगों से मिले. वे मणिपुर गए और लोगों के साथ खड़े हुए. मोदी ने मणिपुर में आज तक पैर भी नहीं रखा, जबकि उनके पास विदेशों की दर्जनों यात्राओं के लिए समय है. भाजपा-आरएसएस को बस नफरत की दुकान लगाना आता है.
हम लोगों के पास जाकर अपनी विचारधारा की बात करते हैं, अपना काम दिखाते हैं, और हम ध्रुवीकरण करने वाले भाषण नहीं देते. भाजपा-आरएसएस दो-तिहाई बहुमत मांग रहे हैं, क्योंकि वे नया संविधान बनाना चाहते हैं. उनकी पार्टी के सांसद और नेता ऐसा कहने भी लगे हैं. क्या संविधान के खिलाफ बात करना राष्ट्र विरोधी नहीं है? मोदी अपने मातहतों को जान-बूझकर ऐसे बयान देने के लिए कहते हैं ताकि वे लोगों की भावना को टटोल सकें.
● भाजपा कांग्रेस को वंशवादी पार्टी कहती रहती है, कि वे गांधी परिवार से आगे नहीं देख सकते, और कि परिवारवाद हावी है.
क्या कोई लोगों को मजबूर कर सकता था कि वे इंदिरा गांधी को स्वीकार करें? जब वे प्रधानमंत्री बनीं, जवाहरलाल नेहरू तो जिंदा भी नहीं थे. क्या उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के लिए उनका नाम रखा? इसी तरह इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने. इंदिरा गांधी ने उनका नाम आगे नहीं किया. दरअसल, वह जनता का मूड था. 1989 के बाद गांधी परिवार के किसी सदस्य ने क्या सरकार में कोई पद लिया?
सोनिया गांधी ने 2004 में प्रधानमंत्री बनने का अवसर त्याग दिया क्योंकि वे मानती थीं कि देश को वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए कुशल अर्थशास्त्री की जरूरत थी.
उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी 2009 में तब भी स्वीकार नहीं की जब पार्टी ज्यादा बड़ा जनादेश लेकर सत्ता में लौटी. 2002 के गुजरात दंगों के बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री के पद से हटाना चाहते थे. तब गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने मोदी को बचाया.
और आज देखिए कि मोदी ने आडवाणी को कैसे किनारे कर दिया है, उस दानव भस्मासुर की तरह जिसने भगवान शिव से वरदान मिलने के बाद उन्हीं को मारने की कोशिश की जिसने उसका हित किया था.
गांधी परिवार तो तब भी चुप रहा जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी. उन्होंने कानूनी प्रक्रिया में अपना विश्वास बनाए रखा. राजीव की हत्या के बाद गांधी परिवार ने हत्यारों के बारे में जहर नहीं उगला. प्रियंका गांधी तो जेल जाकर वहां कैद एक आरोपी तक से मिलीं.
यह दिखाता है कि परिवार में कितनी करुणा है, वह कितना दयावान है. वहीं, भाजपा में छोटी-सी गलती करने वाले को भी अमित शाह सजा देते हैं. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ बुलडोजर चला देते हैं.
● राहुल गांधी चाहते थे कि सभी बड़े नेता लोकसभा का चुनाव लड़ें, पर कुछेक को छोड़कर ज्यादातर ने मना कर दिया. आप भी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. क्या यह इस बात का संकेत है कि आपने हार स्वीकार कर ली है?
उम्र मेरे पक्ष में होती, तो मैं लड़ता. जहां तक दूसरे नेताओं की बात है, हम किसी को चुनाव लड़ने के लिए मजबूर नहीं कर सकते.

