- वीर सावरकर की बायोपिक में आपके लिए सबसे बड़ा चैलेंज क्या था?
सावरकर पर शोध शुरू करने के बाद मैं उसमें इतना डूब गया कि स्क्रिप्ट और निर्देशन का जिम्मा खुद ही उठा लिया. सबसे बड़ी चुनौती थी उन पर प्रामाणिक जानकारियां न होना. देश धर्म से ऊपर है, सावरकर की यह फिलॉसफी आज भी मौजूं है. उन्हें वीर क्यों कहा जाता था, बायोपिक इसे समझने में मदद करेगी. दूसरी चुनौती उन जैसा दिखने और बोलने की थी.
- आप अन्य फिल्मों के मुकाबले बायोपिक को अहमियत देते हैं?
यूं कहिए कि वे मेरे हिस्से आ जाती हैं. एक असल इंसान को जीने के बाद मैं बड़ा समृद्ध महसूस करता हूं. मैंने रंग रसिया (राजा रवि वर्मा पर), मैं हूं चार्ल्स (चार्ल्स शोभराज पर) और सरबजीत (सरबजीत सिंह पर) की हैं. अब सावरकर, जो कि मेरे सबसे पसंदीदा रोल्स में से है.
- आपने अशांत मणिपुर में मैतेई परंपरा से शादी करने को क्यों चुना?
परंपरानुसार शादियां दुलहन के घर पर ही होती हैं और मैं लिन के परिवार, उस तहजीब का हिस्सा बनना चाहता था. लिन के भाई ने बाद में कहा कि जाट होने के बावजूद मैं गजब का मैतेई दूल्हा लग रहा था. राज्य में इंटरनेट न होने के बावजूद शादी की तस्वीरें वायरल हो गईं.
- अभिनय नहीं कर रहे होते तब क्या करते हैं?
जानवरों के साथ वक्त बिताना मुझे बहुत पसंद है. मैं जिज्ञासु किस्म का वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर भी हूं. हाल में एक बिल्ली ने हमें अपनाया है. मेरी घोड़ी ने दो बच्चे दिए हैं. मेरे पास एक कुत्ता भी है. तो मेरे जानवरों से बिना कुछ कहे बहुत सारी बातें होती हैं. लिन को भी जानवर काफी पसंद हैं...वरना वे मेरी बीवी नहीं होतीं.
—शशि सन्नी.

