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"मुझे मेरी मां से हिम्मत मिलती है..."

लीक से हटकर कहानियों के चुनाव, गैर-बराबरी के अनुभव, जीवन के अपने प्रेरणास्रोत और हालिया रिलीज फिल्म 'भक्षक' पर अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का इंटरव्यू

भूमि पेडनेकर
भूमि पेडनेकर
अपडेटेड 1 मार्च , 2024

फिल्म भक्षक आप तक कैसे पहुंची? कहानी को लेकर क्या बताया गया था?

कोविड का दौर था. भक्षक के डायरेक्टर पुलकित और रेड चिलीज की तरफ से कॉल आया. कहानी सुनकर मैंने सोचा कि ऐसी कहानी अगर बतौर ऐक्टर नहीं कर पाई तो बहुत कुछ छूट जाएगा.

● 'भक्षक' में आपका किरदार किस तरह से अलग है?

मैंने एक ऐसी पत्रकार का रोल किया है जो बेहद कम संसाधन होते हुए भी सच के लिए लड़ती है. ये उस भक्षक के खिलाफ लड़ाई है जो हमारे-आपके बीच ही होता है पर शोषण के बाद भी कोई उस पर सवाल नहीं उठाता. फिल्म देखकर अगर लोग खुद से पूछ पाएं कि लड़कियों को बचाने के लिए वे क्या कर रहे हैं, तो मैं समझूंगी कि फिल्म कामयाब हो गई.

तकरीबन हर बार आप लीक से हटकर और साहसी किरदार वाली फिल्में कैसे चुन लेती हैं?

मुझे मेरी मां से हिम्मत मिलती है. वे कमर्शियल पायलट रही हैं, तीन बार एनसीसी से रिपब्लिक डे परेड कर चुकी हैं, जबरदस्त एथलेटिक हैं और अब भी कार रैलियां करती हैं. भीतर से उतनी ही इमोशनल, ऐसी हैं मां. मेरे हर फैसले के पीछे उनका असर होता है. फिल्मों में भी और जिंदगी में भी.

महिला होने की वजह से कभी फिल्मों में गैर-बराबरी का सामना करना पड़ा?

मैं सत्रह साल की थी जब सिनेमा की दुनिया में आई. तब गैर-बराबरी जैसे सवाल बेमानी थे. लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब मुझे महसूस हुआ कि फिल्म में बराबर काम की शर्त पर भी मुझे हीरो की फीस का महज पांच पर्सेंट ऑफर हो रहा है. उसके बाद से मैंने वो फिल्में करनी बंद कर दीं जहां मुझे हर तरह से बराबरी का दर्जा न मिल रहा हो.

अलग-अलग शहरों और जगहों में फिल्म शूटिंग के दौरान उन जगहों का भी असर आप पर पड़ता है?

बिल्कुल. नई जगह और नए कल्चर की समझ आगे काम आती है. जैसे, मैं जब सोनचिड़िया की शूटिंग कर रही थी तब गरीब तबके की लड़कियों से मिल चुकी थी. इससे भक्षक में मुझे बहुत मदद मिली.

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