●आपकी ताजा फिल्म मेरी क्रिसमस जिस फ्रांसीसी उपन्यास ला मॉन्ते-चार्ज पर आधारित है वह आपको आखिर मिला कैसे था?
अरसे पहले इतवार के रोज सुबह का वक्त, मैं मुंबई में चर्चगेट और फोर्ट के बीच सड़कों पर घूमते हुए बिताता था. फुटपाथ से ही किताबें खरीदता और अंत में जाकर कोई फिल्म देख डालता. धीरे-धीरे वह कल्चर भी शहर से विदा हो गई और आदत भी. अब किताबें ऑनलाइन ही खरीद लेता हूं. तो इस नॉवेल में मुझे जो चीज पसंद आई वह थी क्राइम की एक बेहद नाजुक स्टोरी. यह अंधाधुन के टेढ़े-मेढ़े, पेचीदा किस्से से राहत देती हुई कहानी थी.
●फिल्म में अभिनय के लिए विजय सेतुपति की खासी तारीफ हो रही है. बतौर परफॉर्मर उनमें ऐसा क्या है जो दर्शकों से सीधा रिश्ता कायम कर लेता है?
आपको पता है! तमिल में उन्हें मक़्कल सेल्वन कहकर बुलाते हैं, जिसका अर्थ निकलता है: जनता का खजाना. अपने हर मिलने वाले से वे सीधा और आत्मीय संवाद स्थापित कर लेते हैं. लोगों और उनके जीवन के बारे में जानने में उनकी बड़ी दिलचस्पी रहती है. इसलिए तुरंत उनसे एक रिश्ता बनता है.
●ऐसा लग रहा है कि अंधाधुन के बाद आपके बारे में लोगों की धारणा बदल गई है. तो क्या अब आपको ऐक्टर आसानी से मिल जाते हैं?
(हंसते हुए) अभी पिछले ही दिनों हमारे सब्जी वाले ने कहा कि लगता है, आपको कहीं देखा है, वैसे ''करते क्या हैं आप?" देखिए, अलग तरह की स्टोरीज के ऐक्टर्स को राजी कर पाना आसान नहीं होता. पर हां, अब कभी-कभी मुझे ऐक्टर्स के कॉल और मैसेज आते हैं. जानकर अच्छा लगता है कि चलो कोई है जिसे पुकारा जा सकता है.
●आप अपनी सेंसिबिलिटी वाली फिल्में सच्चे मन से बनाते हैं. पर उनकी कमर्शियली कामयाबी कैसे पक्की करते हैं?
अब सीधा और ढर्रे वाला तर्क तो यही कहेगा कि अंधाधुन के बाद कोई बड़ा स्टार हासिल करना मेरे लिए आसान होगा. मैं ऐसे नहीं सोचता कि अच्छा चलो, अब ऐसे स्टार के लिए कहानी लिखें. उनके लिए भी कुछ बिल्कुल अलग करना आसान नहीं होता जिसमें मुनाफे की गारंटी न हो. मैं कोई साम्राज्य खड़ा करने तो आया नहीं हूं. जरूरी है कि कहानी दिलचस्प हो और कारगर भी.
●अपनी अगली फिल्म इक्कीस के बारे में बताइए जरा.
यह शहीद अरुण खेत्रपाल की कहानी है, जिसमें अगस्त्य नंदा मुख्य भूमिका करेंगे. जॉनी गद्दार के बाद धरम जी के साथ काम करने की खातिर इसे करना चाहता था. एक नए जॉनर में काम करने का भी अपना रोमांच है. बजट और प्रोडक्शन का झमेला निबटा रहा हूं जरा. इक्कीस में इतनी सूचनाएं और रिसर्च है कि सबको एक में समेटना एक तरह का चैलेंज है.

