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''बहुध्रुवीय विश्व के लिए भारत अहम''

मैं किसी त्वरित सियासी समाधान की उम्मीद नहीं करता. दोनों पक्षों ने यह मान रखा है कि युद्ध में उनकी ही जीत होगी. फिलहाल शत्रुता खत्म होने की संभावना नजर नहीं आ रही

चुनौतीपूर्ण भूमिका : संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
चुनौतीपूर्ण भूमिका : संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
अपडेटेड 5 नवंबर , 2022

संघर्ष और ध्रुवीकरण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जनित प्राकृतिक आपदाओं की एक के बाद एक लहरों से त्रस्त और मंदी के कगार पर खड़ी अर्थव्यवस्था के बीच संयुक्त राष्ट्र आज विश्व समुदाय के लिए जितना प्रासंगिक हो गया है, उतना शायद ही कभी रहा हो. ऐसे परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को मध्यस्थता की एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ रही है. हाल ही में भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए गुटेरेस ने इंडिया टुडे टीवी की एडिटर, फॉरेन अफेयर्स गीता मोहन के साथ खास बातचीत में यूक्रेन संघर्ष, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संभावित सुधार और कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बात की. उस बातचीत के अंश:

आपने अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए की. फिर भी 26/11 के हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के कुछ आतंकवादियों पर अभी भी यूएनएससी ने प्रतिबंध नहीं लगाया है. चीन ने चौथी बार पाकिस्तान स्थित एक आतंकी पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों को तकनीकी रूप से रोक दिया...साथ ही, संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक आतंकवाद को परिभाषित नहीं किया है. 

वैश्विक आतंकवाद से लड़ने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना जरूरी है. दुर्भाग्य से, इसके पर्याप्त प्रयास अब तक नहीं हुए हैं. महासचिव बनते ही आतंकवाद-रोधी कार्यालय शुरू करना मेरी प्राथमिकता में था. इसमें राष्ट्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की क्षमता है, खासकर आतंकवाद विरोधी नीतियों पर प्रशिक्षण और सलाह के क्षेत्र में. आतंकवाद की परिभाषा पर आम सहमति बनाने की समस्या का राजनीति से भी काफी सरोकार रहता है. पर, इससे आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने में मुश्किल नहीं आनी चाहिए. हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि भू-राजनीतिक विभाजन के कारण ऐसी गंभीर समस्या पर विश्व इतना बंटा रहे.  
 
क्या रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई समाधान नजर आता है? रूस के अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को अपने देश में मिलाने के साथ, क्या बातचीत के दरवाजे बंद हो गए हैं?

मैं किसी त्वरित सियासी समाधान की उम्मीद नहीं करता. दोनों पक्षों ने यह मान रखा है कि युद्ध में उनकी ही जीत होगी. फिलहाल, शत्रुता खत्म होने और सियासी वार्ता की संभावना नजर नहीं आ रही. इसका मतलब यह नहीं कि इसके लिए प्रयास नहीं होने चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने लोगों का भरोसा जीतने या समस्याओं के समाधान के अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश जारी रखी है. राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने अजोवस्टल स्टील प्लांट से नागरिकों को निकालने की अपनी पहल में सफलता हासिल की. हम दोनों पक्षों से बात कर रहे हैं और अपने दफ्तर के जरिए लोगों की परेशानियों को कम करने की कोशिश कर रहे हैं.  

रूस की परमाणु धमकी पर आपकी क्या राय है? 

'रूसी परमाणु सुरक्षा सिद्धांत' जिसका क्रेमलिन के प्रवक्ता ने भी समर्थन किया है, इस संघर्ष में या संबंधित संभावनाओं में परमाणु हथियारों के उपयोग की संभावना नहीं देखता. इसलिए, मेरा गहरा विश्वास है कि हम किसी भी स्थिति में परमाणु हथियारों के उपयोग की संभावना को कभी स्वीकार नहीं कर सकते.
   
युद्ध पर भारत के रुख की कई लोगों ने आलोचना की है. लेकिन अधिकांश राष्ट्र, पश्चिम की तरह, अपने हितों को सर्वोपरि रखते हैं. तो क्या भारत की जो आलोचना की गई है वह गलत थी? 

हम जज नहीं हैं. मैं पश्चिम या भारत या रूस का नहीं, संयुक्त राष्ट्र का महासचिव हूं. हमारी भूमिका संवाद और समझ को बढ़ावा देने तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के मूल्यों की रक्षा करने की है. सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा भी उन मूल्यों में से एक है. जब इसका उल्लंघन किया गया तो मैंने इसकी निंदा की, जो मेरा कर्तव्य था. मेरा दायित्व है कि मैं संघर्षरत पक्षों और ऐसे सभी देशों के साथ खुलकर बातचीत करूं जो इस युद्ध को अपने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी देख रहे हैं. 
   
बदलती वैश्विक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए क्या संयुक्त राष्ट्र में सुधार हो सकते हैं, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार जिससे भारत जैसे देशों को उसमें शामिल किया जा सके?

भू-राजनीतिक विभाजनों के कारण सुरक्षा परिषद पंगु है. इसलिए सुधार बेहद जरूरी हैं. परिषद के पांच देशों में से फ्रांस और यूके सुधारों के लिए तैयार हैं, पर तीन अन्य सबसे ज्यादा अनिच्छुक थे. मगर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछली आम सभा में कहा था कि लैटिन अमेरिका से एक देश और एशिया से एक देश को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करना समझदारी होगी. रूस के विदेश मंत्री ने कहा कि ब्राजील और भारत का स्थायी सदस्य के रूप में स्वागत किया जाएगा. उम्मीद है, यह संभव होगा. इसमें वक्त लगेगा, जटिल होगा. जाहिर है, भारत सबसे बड़ी आबादी वाले दो देशों में से एक है, यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, एक बहुध्रुवीय दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
   
आपने जलवायु परिवर्तन से लडऩे के भारत के प्रयास मिशन लाइफ के शुभारंभ में व्यक्तिगत स्तर पर भाग लिया. क्या आपको लगता है कि दुनिया जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए तैयार है? 

नहीं, दुनिया पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है. हम यह लड़ाई हार रहे हैं. इसलिए यह पहल महत्वपूर्ण है. हमें बॉटम-अप अप्रोच की जरूरत है. हम में से प्रत्येक को इसकी जिम्मेदारी लेने की जरूरत है. 

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