कांग्रेस महासचिव और पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी किसानों के मुद्दे को लेकर यूपी में काफी सक्रिय हैं. लखीमपुर खीरी प्रकरण के बाद पीड़ित लोगों से मिलने गईं प्रियंका के साथ वे भी मौजूद थे. उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उसके बाद कई दिनों तक सियासी जोर आजमाइश के बाद उन्हें लखीमपुर खीरी जाने दिया गया. इससे पहले भट्टा परसौल में भी वे किसानों के साथ खड़े थे. फिलहाल प्रियंका के सहयोगी के रूप में दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी कांग्रेस में जान फूंकने की कोशिश में लगे हैं. उत्तर प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस क्या हासिल करने की उम्मीद कर रही है. इस बारे में इंडिया टुडे के असिस्टेंट एडिटर सुजीत ठाकुर ने युवा नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा से लंबी बातचीत की. पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश:
किसानों के मुद्दे को लेकर प्रियंका गांधी, उत्तर प्रदेश में काफी सक्रियता दिखा रही हैं. संख्या बल के लिहाज से राज्य में कांग्रेस की मौजूदगी औपचारिकता भर ही है. चुनाव में जनता कांग्रेस से क्यों जुड़ेगी?
यह बात सही है कि संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस, विधानसभा में पीछे है. समाजवादी पार्टी (सपा) और बसपा (बहुजन समाज पार्टी) संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस से आगे हैं. लेकिन प्रियंका गांधी के संघर्ष से विपक्ष का जो नैतिक बल होता है वह आज कांग्रेस के पास है. बनारस में जिस तरह की रैली हुई उससे साफ है कि कांग्रेस का ग्राफ तेजी से बढ़ा है और इसका पूरा श्रेय प्रियंका गांधी के संघर्ष को जाता है. हम यूपी विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करेंगे.
कांग्रेस के अंदर ही मतभेद कि खाई चौड़ी होती जा रही है. हाल में पंजाब में जो कुछ हुआ, क्या उसकी वजह से अन्य राज्यों में लोगों या किसानों को जोड़ने में पार्टी कठिनाई महसूस कर रही है?
पंजाब के बारे में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि वहां नई टीम बनी है. मैं नई टीम को अपनी शुभकामनाएं देता हूं. हां, इतना जरूर कहूंगा कि पंजाब में कांग्रेस कमबैक करेगी.
जहां तक बात हरियाणा की है तो वहां सियासी रूप से कांग्रेस क्यों पीछे छूट जाती है. क्या वजह है कि दुष्यंत चौटाला को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) साध लेती है और कांग्रेस ऐसा करने से चूक जाती है?
हरियाणा में लोग भाजपा से परेशान हैं. यहां लोग भाजपा के विकल्प के रूप में सिर्फ कांग्रेस को ही देखते हैं. राज्य में सिर्फ किसान ही नहीं सभी वर्ग परेशान है. बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अपराध में हरियाणा नंबर एक बन गया है. लोग भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस को एक सकारात्मक विपक्ष के रूप में देख रहे हैं. लोगों के इसी उम्मीद को देखते हुए हमने 'विपक्ष आप के समक्ष' कार्यक्रम की शुरूआत करनाल से की है. हम हरियाणा के हर जिले में जाएंगे. इस कार्यक्रम के दूसरे चरण में हम गांवों तक जाएंगे.
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब गोवा और मणिपुर में अगले साल की शुरूआत में चुनाव होने हैं और कांग्रेस हरियाणा में 'विपक्ष आप के समक्ष' कार्यक्रम कर रही है. इस कार्यक्रम का अन्य राज्यों में क्या लाभ होगा?
मेरा मानना है कि सभी राज्यों में इसका असर होगा. आपने देखा होगा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को जो इतना बड़ा झटका लगा, उसकी एक बड़ी वजह किसानों को लेकर आम लोगों के मन में सहानभूति का होना है. आपने जिन राज्यों का जिक्र किया वहां किसानों की बड़ी संख्या है और उत्तर प्रदेश में भी भाजपा को बड़ा झटका लगेगा. मैं ऐसा इसलिए भी कह रहा हूं कि लखीमपुर खीरी का जो मुद्दा है, वह किसानों के मुद्दे से भी आगे बढ़ते हुए इंसानियत का मुद्दा भी बन गया है.
भाजपा ने पहले किसानों की मांग न मानकर उनका तिरस्कार किया. फिर उन्हें उपद्रवी बताते हुए किसान मानने से इनकार किया, और अब किसानों को इंसान मानने से इनकार कर दिया है. इसका सबूत लखीमपुर खीरी कांड है, जहां किसानों को कीड़े-मकोड़े की तरह गाड़ी के नीचे कुचल दिया गया. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को अभी तक हटाया नहीं गया है. यह भाजपा का अहंकार है, और देश सब कुछ सह लेता है लेकिन अहंकार नहीं. आम जनता भाजपा का घमंड उत्तर प्रदेश में तोड़ देगी.
उत्तर प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस खुद को किंग के रूप में देख रही है या किंगमेकर के रूप में?
कांग्रेस का संघर्ष उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की सबसे बड़ी वजह बनेगा. भाजपा के सत्ता से बाहर होते ही देश की राजनीति नई करवट लेगी और प्रियंका गांधी और कांग्रेस का संघर्ष रंग लाएगा.

