नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) पूर्वोत्तर के तीन राज्यों—मेघालय, मणिपुर और नगालैंड में गठबंधन सरकारों का हिस्सा है. ऐसा कहा जाता है कि भाजपा की अगुआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के इस घटक ने सिर्फ एक वर्ष में जिस तेजी से विस्तार किया है, उसे देखते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी कुछ चौकन्ने हैं.
एनपीपी के अध्यक्ष और मेघालय के नए मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने कौशिक डेका से अपने पहले चार महीने के कामकाज और पार्टी के भविष्य के लक्ष्यों पर बात की. कुछ अंशः
आपकी सरकार पहले की सरकारों से अलग कैसे है? क्या बदला है?
मेघालय बागबानी के लिए जाना जाता है. फिर भी आप मानेंगे कि यहां आज तक एक खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय तक नहीं था? हमने पहली बार बनाया और पहली परियोजना-द जैकफ्रूट मिशन के लिए 80 करोड़ रु. की मंजूरी दे दी है.
हमने विक्रेताओं, खरीदारों और ट्रांसपोर्टरों के बीच नेटवर्किंग आसान करने के लिए एकीकृत कॉल सेंटर भी बनाया है. इससे हमें भविष्य में बेहतर नीतियां बनाने के लिए जरूरी डेटाबेस बनाने, मांग और आपूर्ति के रुझानों को ट्रैक करने में मदद मिली है.
हमने उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति शृंखला को व्यवस्थित करने के लिए मिशन लाकाडोंग (ज्यादा पीलापन लाने वाली हल्दी की एक वेराइटी) भी लॉन्च की है. कामकाज में गति लाने को मैंने कुछ विभाग पुनर्गठित किए हैं.
आपने क्षेत्र आधारित नीतियां बनाने की बात की थी.
हमने शिक्षा, दूरसंचार, युवाओं और खेल पर नीतियों को तैयार करने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है. मैं ऐसी नीतियां तैयार करना चाहता हूं, जिसमें सभी की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाए. हम पर्यटन और औद्योगिक नीतियों की समीक्षा करेंगे. दूसरे राज्यों की तरह हम भी लोगों को मुफ्त दवा देने की नीति तैयार कर रहे हैं.
एनडीए में होने के बावजूद आपने नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 का विरोध किया.
हम वही निर्णय लेते हैं जो मेघालय के हक में हों. हमने महसूस किया कि बिल की भावना ठीक नहीं थी और इससे पूर्वोत्तर की जनसांख्यिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था. मैं किसी को दोष नहीं देता लेकिन हमें नहीं पता, इस बिल के पीछे क्या है.
अवैध अप्रवास के कारण इस पूरे क्षेत्र में पहले से ही कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं. इसमें धर्म को भी घसीटने की जरूरत नहीं. मैं इसे नागरिकों और गैर-नागरिकों के बीच संघर्ष के रूप में ही देखता हूं.
भाजपा ने आपसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार को कहा है?
भाजपा ने हमसे पूछा था कि हमें इस बिल पर ऐतराज क्यों है? लेकिन उनकी ओर से इस पर फिर से विचार का कोई दबाव नहीं रहा. उन्होंने हमारी विवशता को समझा और उसका सम्मान किया.
आप पूर्वोत्तर में तीन राज्यों की सरकारों में साझीदार हैं. क्या आप एनपीपी को पूर्वोत्तर के उभरते हुए राजनैतिक दल के रूप में देखते हैं? यह ईसाइयों के प्रभुत्व वाली पार्टी है और पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों मं् यही धर्म हावी है.
एनपीपी का एजेंडा पूर्वोत्तर की आवाज बनकर उभरना और जनजातियों तथा अल्पसंख्यकों के मुद्दों को उठाना है. एनपीपी ने जो मंच प्रदान किया है, लोग उसे स्वीकार कर रहे हैं और उस पर भरोसा कर रहे हैं. राजनीति अवसर के सदुपयोग का नाम है.
फिलहाल जो राजनैतिक शून्यता बनी है, हम उसको भरने के लिए मौजूद हैं. यहां लोगों ने महसूस किया है कि राष्ट्रीय दल क्षेत्रीय मुद्दों की अक्सर अनदेखी कर देते हैं. हो सकता है कि ईसाई फैक्टर की भी कुछ हद तक एक भूमिका रही हो.
चर्चा है कि अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ आपकी बढ़ती नजदीकियों से भाजपा कुछ चिंतित है.
ऐसा कुछ भी नहीं है. पेमा हमेशा से एक पारिवारिक मित्र रहे हैं. फिलहाल वे राजनैतिक रूप से जो कुछ भी कर रहे हैं, हमेशा से वही करते आए हैं.
क्या एनपीपी मिजोरम में इस साल के आखिर में होने वाले चुनाव लड़ेगी?
हम वहां जड़ें मजबूत करने के लिए प्रयास कर रहे हैं. हमें वहां से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं पर अभी देखते हैं.
शिलांग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आप क्या कदम उठा रहे हैं?
इसे सांप्रदायिक हिंसा बताया गया जबकि ऐसा नहीं था. यह भूमि के एक टुकड़े को लेकर हुआ संघर्ष था. मुझे अपनी पुलिस पर बहुत गर्व है. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि आगे कोई हिंसक घटना न होने पाए. उप-मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति इस भूमि विवाद की जांच कर रही है.
मैं समझता हूं कि सोशल मीडिया पर बंदिशें लगाने से नागरिकों के निजी अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है लेकिन जनता की सुरक्षा के लिए कुछ प्रतिबंधों की आवश्यकता महसूस होती है. शिलांग की घटना के बाद हमने कुछ ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जिनकी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को उकसाने में भूमिका थी.
मेघालय के पास अब एक रणजी टीम है और आप राज्य क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं. आगे क्या होने वाला है?
पहला काम है, जमीन का इंतजाम करके और बुनियादी ढांचा खड़ा किया जाए. दूसरा, टीम तैयार करना. यह लंबा सफर है.
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