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कुछ नहीं मिला तो व्यापम घोटाले में मेरी पत्नी का नाम घसीट लाए: शिवराज सिंह चौहान

व्यापम घोटाले मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चौतरफा घिरे हुए हैं. वे कहते हैं कि विपक्ष को कुछ नहीं मिला तो उसने उनकी पत्नी का नाम घसीट लिया है.

अपडेटेड 14 जुलाई , 2014
व्यापम घोटाले को लेकर चौतरफा आलोचनाओं से घिरे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंडिया टुडे के प्रमुख संवाददाता पीयूष बबेले से इस मुद्दे पर तफसील से बात की. चौहान ने कहा कि विपक्ष सिर्फ उनकी विकास पुरुष की प्रतिमा खंडित करना चाहता है. खुद को मामले का व्हिसल ब्लोवर बताते हुए चौहान ने कहा कि हाइकोर्ट की निगरानी में चल रही मामले की जांच सीबीआइ जांच से बेहतर है. पेश हैं बातचीत के चुनिंदा अंशः

पहले आप के पूर्व मंत्री जेल गए, फिर आपके पीए के खिलाफ एफआइआर हुई और अब आपकी पत्नी साधना सिंह पर आरोप लग रहे हैं, आखिर आपके राज में व्यापम घोटाले में हो क्या रहा है?
मेरी पत्नी का किसी मामले से कोई संबंध ही नहीं है. जब कांग्रेस के सारे वार खाली चले गए तो मेरी पत्नी के पीछे पड़ गए. मुख्यमंत्री की पत्नी होना कोई गुनाह है क्या? एक पार्टी का मामूली प्रवक्ता कोई कागज का टुकड़ा ले आएगा तो उसे सब मान लेंगे?

लेकिन साधना जी के गांव के 13 लोगों के माप-तौल विभाग में भर्ती होने का मामला क्या महज संयोग है?
पहली बात तो यह है कि ऐसा संयोग होना असंभव नहीं है कि किसी जिले या गांव से एक साथ कई मेधावी लोगों का किसी परीक्षा में चयन हो जाए. लेकिन यहां तो यह संयोग भी नहीं हुआ है. गोंदिया के लोगों का सेलेक्शन होने की बात पूरी तरह भ्रामक है. पता नहीं मीडिया में इस तरह का भ्रामक समाचार कैसे चल रहा है. यह तो एकदम हवाबाजी है.

पीएससी में अपनी भतीजी के चयन में धांधली पर आप क्या कहेंगे?
पीएससी की परीक्षा के बारे में सारे तथ्य खुद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने स्पष्ट कर दिए हैं. एक-एक बात शीशे की तरह साफ हो चुकी है. पीसीएस-2008 की परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी है, इसमें कोई विवाद ही नहीं है. इसके बावजूद लोग झूठा प्रचार करें तो मैं किसी का मुंह नहीं पकड़ सकता. लेकिन सार्वजनिक जीवन में किसी ईमानदार व्यक्ति की छवि इस तरह खराब करना सदाचरण नहीं माना जा सकता.

लेकिन पीएमटी में दाखिले में 2008 से घोटाला हो रहा है. 2011 में आप विधानसभा में कहते हैं कि परीक्षा और पारदर्र्शी बनाई जाएगी, लेकिन 2012 और 2013 में फर्जी एडमिशन की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. क्या आपने घोटाला रोकने में ढिलाई नहीं बरती?
आपको पता है, व्यापम घोटाला पकडऩे वाला पहला व्यक्ति मैं हूं. मुझे इंदौर पुलिस से गोपनीय सूचना मिली थी, कि दो छात्र किसी दूसरे छात्र की जगह परीक्षा देने के मामले में संदिग्ध हैं और इस मामले में कई अन्य लोगों के शामिल होने का संदेह है. मैंने तुरंत मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए. तब तक तो किसी को इस मामले के बारे में पता भी नहीं था. व्यापम घोटाला दुनिया के सामने लाने वाला मैं हूं. आप चाहें तो मुझे ही व्हिसल ब्लोवर मान लीजिए. मामले की गंभीरता देखते हुए मैंने ही जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया और एक ईमानदार छवि के एडीजी को एसटीएफ की कमान सौंपी. बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं.

लेकिन घोटाला तो चलता ही रहा.
मेरे कार्यकाल में 3,58,000 नियुक्तियां की गईं, इनमें से 228 नियुक्तियां संदिग्ध पाई गईं. इन सब भर्तियों को निरस्त कर दिया गया. लाखों भर्तियों में से 200 भर्तियां अगर संदिग्ध हो जाएं और उन पर भी कार्रवाई हो जाए तो इसे महाघोटाले का नाम दिया जाएगा? यहां तो घोटाला भी नहीं है. मेडिकल में सिर्फ 299 दाखिले संदिग्ध पाए गए. इनके भी प्रवेश निरस्त कर दिए गए.

घोटाला नहीं है तो ये बताइए कि पुलिस भर्ती में शारीरिक परीक्षाएं क्यों हटा लीं?
यही तो कांग्रेस के जमाने का खेल था. किसी के सीने की नाप गलत ले ली, किसी की लंबी या ऊंची कूद की माप बदल ली. एसपी स्तर के अधिकारी के अंडर में परीक्षा हो रही है और पारदर्शिता पूरी तरह गायब. आप पुरानी फाइलें उठाकर देखिए, कांग्रेस कैसे भर्तियां करती थी. नोटशीट पर लिख दिया कि सभी नियम शिथिल करते हुए फलां व्यक्ति की भर्ती की जाए और हो गई भर्ती. इसी सबको बदलने के लिए मैंने पुलिस भर्ती में सारी परीक्षाएं हटाकर दौड़ का प्रावधान किया. हर धावक के पैर में आरएस टैग बांधा. टैग लगाएं और दौड़ें. दौड़ पूरी करने का समय अपने आप कंप्यूटर में दर्ज. आंगनवाड़ी की भर्तियां मेरिट के आधार पर कीं. रोजगार सहायक के मामले में नियम बना दिया कि गांव में जो सबसे ज्यादा नंबर से स्नातक वही रोजगार सहायक होगा.

जब आपके राज की सारी प्रक्रिया इतनी पारदर्र्शी है तो आप क्यों नहीं जांच उठाकर सीबीआइ को दे देते?
सीबीआइ जांच की जरूरत ही नहीं है. हाइकोर्ट की निगरानी में चल रही एसटीएफ जांच सीबीआइ जांच से बेहतर है. सीबीआइ हाइकोर्ट से ऊपर थोड़े ही है. और वैसे भी आप देखिए कि जो भी दोषी समझ में आ रहा है, उसकी गिरफ्तारी हो रही है. मेरे एक पूर्व मंत्री जेल में हैं. इससे लोगों को समझना चाहिए कि कितना भी बड़ा आदमी क्यों न हो, इस जांच से नहीं बच सकता. मैं आपके माध्यम से गारंटी देता हूं कि इस मामले में एक भी दोषी व्यक्ति बच नहीं पाएगा.

एसटीएफ जांच से इंडिया टुडे को ऐसे एसएमएस रिकॉर्ड मिले हैं, जिसमें आपके प्रमुख सचिव एस.के. मिश्र व्यापम घोटाले के फरार आरोपी से मर्ई 2012 में आत्मीय संवाद कर रहे हैं.
मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
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