बीजेपी सासंद और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने आज तक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम में हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल से बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंश:
बीसीसीआइ ने जो जांच कमेटियां बनाई हैं, वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगी? उसे वही लोग चला रहे हैं जो गड़बड़ी में शामिल हैं.
यह पहले 2009 में साउथ अफ्रीका में हुआ था. उसके बाद एक बोर्ड कमेटी बनी, जिसकी रिपोर्ट चार साल से किसी के सामने नहीं आई. सरकार की बनाई यशवंत सिन्हा कमेटी ने 2010 में दी रिपोर्ट में कहा था कि आइपीएल में बहुत गोरखधंधा हुआ है. फेमा और आरबीआइ (नियमों) का उल्लंघन कर 1,008 करोड़ रु. देश से बाहर ले जाए गए.
बातें तो बहुत पहले से हो रही हैं लेकिन कानून अब तक नहीं बना. कानून मंत्री और खेल मंत्री अब अचानक जग गए हैं.
1999 में सीबीआई की रिपोर्ट आने पर खिलाड़ियों पर लाइफ टाइम बैन लगा दिया. इस बार केवल सस्पेंड भर किया. उस वक्त मैसेज अच्छा गया था, इसीलिए 2008 तक कोई गड़बड़ी नहीं हुई. सारे अनुशासन खिलाडिय़ों के लिए ही हैं? बीसीसीआई के अफसरों के लिए क्यों नहीं?
क्या नेताओं को क्रिकेट से विदा कर पेशेवर और पूर्व खिलाड़ियों से ही क्रिकेट को चलवाना चाहिए?
दुनियाभर में पेशेवर प्रबंधन संघ ही खेल को चलाते हैं लेकिन हिंदुस्तान में ऐसा नहीं होता. आईसीसी को 80 फीसदी पैसा हिंदुस्तान से जाता है, इसलिए वे कुछ करते हुए डरते हैं. कहने को आईसीसी है, जिसे टी-20, वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी करवाने को मिल जाती है.
क्या बीसीसीआई प्रमुख एन. श्रीनिवासन को इस्तीफा देना चाहिए?
कितनों का इस्तीफा लेंगे? हम श्रीनिवासन पर जा रहे हैं लेकिन उनके पीछे भी कई लोग हैं. महाभारत कौरवों-पांडवों के बीच हुआ था लेकिन पीछे शकुनि मामा भी बैठे थे.
बीसीसीआई और आईपीएल का कानून कहता है कि किसी टीम का मालिक गलत गतिविधि में पकड़ा जाए तो उस टीम को बैन कर देना चाहिए. क्या चेन्नै सुपर किंग्स को भी बैन कर देना चाहिए?
नियम से तो बिलकुल बैन कर देना चाहिए.
क्या धोनी को स्टैंड लेना चाहिए कि टीम का मालिक पकड़ा गया है तो उन्हें भी चेन्नई सुपर किंग्स में नहीं रहना चाहिए?
उनकी जगह मैं होता तो नहीं खेलता. मैं कहता, नहीं चाहिए पैसे, जितने कमाने थे कमा लिए, मुझे माफ कीजिए.
सवाल राजीव शुक्ला और अरुण जेटली का भी है, जो आईपीएल चला रहे हैं. क्या इन्हें नैतिकता के आधार पर जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देना चाहिए?
ललित मोदी, जिसने गड़बड़ी की उसे तो भगा दिया. फिर भी आईपीएल में कुछ नहीं बदला. श्रीनिवासन को बीसीसीआई अध्यक्ष की कुर्सी से हटाने के लिए 31 में से 24 लोगों के वोट चाहिए. और श्रीनिवासन का रसूख इतना ज्यादा है कि उनके खिलाफ 24 लोग नहीं मिल सकते.
आप कह रहे हैं कि अरुण जेटली का इस्तीफा पहले होना चाहिए, बाद में राजीव शुक्ला का क्योंकि आईपीएल में जो गंदगी है, उसे रोक पाने में वे नाकाम रहे हैं?
क्रिकेट में गड़बड़ी के लिए 24 घंटे के अंदर कार्रवाई होनी चाहिए. असद रऊफ (अंपायर) पर पिछले साल भी इल्जाम लगे. तब कुछ नहीं किया. इस बार दो मैच बचे तब कहा कि उन्हें मत खेलने दो. तब तक वह कितनी गड़बड़ियां कर चुका होगा.
पूरी बातचीत आप www.aajtak.in/seedhibaat पर जाकर देख सकते हैं.

