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मैं मासूमों की पैरवी करता हूं: मोहम्मद शहवार खान

दिल्ली के मशहूर क्रिमिनल लॉयर मोहम्मद शहवार खान का मानना है कि आतंक से निबटने के नाम पर पुलिस ने कई युवकों को झूठे इल्जाम में फंसा रखा है. आतंकवाद के कई अभियुक्तों की बेगुनाही साबित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे खान ने संवाददाता अरुण सिंह से बातचीत में कहा कि इंडियन मुजाहिदीन के वजूद के बारे में किसी तरह का कोई सबूत नहीं है.

मोहम्मद शहवार खान
मोहम्मद शहवार खान
अपडेटेड 12 मार्च , 2013

दिल्ली के मशहूर क्रिमिनल लॉयर मोहम्मद शहवार खान का मानना है कि आतंक से निबटने के नाम पर पुलिस ने कई युवकों को झूठे इल्जाम में फंसा रखा है. आतंकवाद के कई अभियुक्तों की बेगुनाही साबित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे खान ने संवाददाता अरुण सिंह से बातचीत में कहा कि इंडियन मुजाहिदीन के वजूद के बारे में किसी तरह का कोई सबूत नहीं है. बातचीत के अंश:

आप आइएम के कितने आतंकवादियों के मुकदमे लड़ रहे हैं?
मैं आइएम के किसी आतंकी की पैरवी नहीं कर रहा हूं. दरअसल, मैं उन 18-20 मासूमों की वकालत कर रहा हूं जिन्हें पुलिस ने झूठे और गलत इल्जाम लगाकर गिरफ्तार कर रखा है. मेरे पास 2008 के पांच मामले (13 अगस्त 2008 के सीरियल ब्लास्ट), 2010 में जामा मस्जिद पर हुई घटना के दो मामले और अबु जंदाल समेत 2011 का मामला है. इंडियन मुजिहिदीन के वजूद के बारे में किसी तरह का कोई सबूत नहीं है. मेरे मुवक्किलों को कथित इंडियन मुजाहिदीन से जोडऩे वाला कोई सबूत नहीं है. मुकदमे का सारा खर्च अरशद मदनी की जमीयत उलमा-ए-हिंद उठा रही है.
कितने पाकिस्तानी आतंकवादी हैं?
इनमें कोई पाकिस्तानी आतंकवादी नहीं है,  2011 में गिरफ्तार आदिल नाम का एक शख्स पाकिस्तानी नागरिक है, जिसे जामा मस्जिद मामले में अभियुक्त बनाया गया है.

वकास और तबरेज का नाम भी जांच में आया है. ये पाकिस्तानी मूल के हैं?
पुलिस अपनी जांच में बराक ओबामा को भी अभियुक्त बनाकर दावा कर सकती है कि वे विस्फोटों के लिए जिम्मेदार थे, उनके काम की यही तो खूबी है. हमारी जांच व्यवस्था में पुलिस पहले व्यक्ति को गिरफ्तार करती है और फिर सबूत जुटाती है और इस प्रक्रिया में अकसर उनके सिद्धांत के मुताबिक सबूत गढ़े जाते हैं. ये नाम जांच में शामिल हैं, लेकिन पूरी जांच में यह कहीं नहीं है कि ये नाम असली हैं या मनगढ़ंत, और पुलिस के दावे की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं है.
यासीन भटकल के खिलाफ कितने मामले हैं.
जांच एजेंसियों ने उस पर आरोप लगाया है कि वह 2008 के बाद की सारी घटनाओं के लिए जिम्मेदार है, लिहाजा यह तो नहीं मालूम कि उसके खिलाफ कितने मामले हैं, लेकिन दिल्ली में वह करीब 10 मामलों में वांछित है. लेकिन एक बार फिर मैं यह बताना चाहता हूं कि महज नाम भूमिका साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
क्या साजिश के सबूत सीमा पार के तरफ भी इशारा करते हैं.
कोई सबूत नहीं है.
सबसे कमजोर सबूत किनके खिलाफ है और क्यों?
हर मामले में पुलिस असली नहीं बल्कि मनगढ़ंत सबूतों पर भरोसा करती है, चूंकि मामले विचाराधीन हैं और महत्वपूर्ण चरण में हैं लिहाजा इस बारे में किसी भी तरह के खुलासे से मेरे मुवक्किल के मुकदमे पर गंभीर असर पड़ेगा. कई तथ्य हैं जिनसे पता चलता है कि अभियोजन की पूरी कहानी गढ़ी हुई है और उन्हें फर्जी तथा गलत इल्जामों में फंसाया गया है.
हैदराबाद ब्लास्ट की साजिश का सूत्रधार आप किसे मानते हैं?
इस बारे में पुलिस-जांच एजेंसियां बेहतर बता सकती हैं. जब मामला अदालत में पहुंचता है तभी मेरी भूमिका शुरू होती है.

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