भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने आजतक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम में हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल से बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंशः
क्या कप्तान महेंद्र सिंह धोनी थक गए हैं?
जब आप इतने समय तक सभी फॉम्र्स में कप्तानी करते हैं, तो थकान हो जाती है. टीम में बदलाव भी आए हैं. कुछ प्लेयर्स गए हैं और नए आए हैं. इसका इफेक्ट जरूर पड़ता है. (पर) मैं अब भी मानता हूं कि वन डे क्रिकेट में वह (धोनी) हमारा सबसे अच्छा दांव है. मैच विनर है वह. इंडियन क्रिकेट में एक चेंज का टाइम है और उन्हें डायरेक्शन देने की जरूरत है. 2015 में ऑस्ट्रेलिया में वल्र्ड कप होगा, वहां कंडीशंस भी टफ होंगी. किसी को बाहर निकालना हल नहीं है. यंग लड़के 1-2 साल खेलकर वहां जाएंगे तो जीत हासिल करेंगे.
पर इस वक्त टीम बहुत परेशानी में है. बड़े खिलाड़ी एकजुट नहीं हैं, सबकी अपनी फ्रेंचाइज है, सभी पैसा कमा रहे हैं पर मिलकर नहीं खेल रहे.
मैं सहमत नहीं. 2011 में वल्र्ड कप जीते थे, तब भी फ्रेंचाइज था, 2009 से 2011 तक इंडिया अच्छा खेली है. क्रिकेट में फॉर्म बहुत जरूरी है.
टेस्ट मैच और टी-20 में अगला कप्तान कौन होना चाहिए?
विराट कोहली, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर. मैं हमेशा कहता आया हूं कि टेस्ट में सहवाग इंडिया के बेहतरीन बैट्समैन हैं. उनका इफेक्ट टेस्ट क्रिकेट में जितना है, उतना वन डे में नहीं.
ओपनर की बात करें. लगता है, वीरेंद्र सहवाग खेलने के मूड में नहीं हैं.
सहवाग से मैं ऑस्ट्रेलिया में मिला था, मैंने कहा कि आपको थोड़ा टाइट खेलना होगा. मैं मानता हूं कि उनमें अभी भी क्रिकेट है और वे इंडियन टीम को आगे ले जा सकते हैं पर वन डे क्रिकेट में उनके लिए मुझे डाउट है.
क्रिकेट फैंस, पूर्व क्रिकेटर परेशान हैं, पर बीसीसीआइ को फर्क नहीं पड़ता. क्रिकेट का क्या हाल हो गया है?
15-16 महीने से यह हाल हुआ है. मैं सहमत हूं कि बीसीसीआइ पैसा बना रहा है पर वह पैसा प्लेयर्स के पास ही जाता है.
रोहित शर्मा की बीसीसीआइ में न जाने क्या सेटिंग है, परफॉर्मेंस नहीं है पर फिर भी टीम में हैं. उन्हें ड्रॉप नहीं करना चाहिए?
मैं मानता हूं कि उनकी जगह नहीं बनती. उन्हें बहुत मौके मिले हैं. एबिलिटी बहुत है, पर शायद टेंपरामेंट की प्रॉब्लम है.
उन्हें किसी ने कुछ बोला क्यों नहीं?
बोला है, इसीलिए तो अंदर-बाहर होते रहते हैं. वे रणजी में जाते हैं, 250-260 रन मारते हैं और फिर वापस आ जाते हैं.
भारतीय टीम में कमी है एक सोच की.
भारतीय टीम में सबसे जरूरी है टैलेंट आइडेंटिफिकेशन की. आपको हर डिपार्टमेंट में सही आदमी चुनना आना चाहिए.
डंकन फ्लेचर जब से आए हैं हिंदुस्तान हर सीरीज हार रहा है.
अकेला कोच किसी टीम को हरा-जिता नहीं सकता. खिलाड़ी सबसे इंपोर्टेंट है. वे (फ्लेचर) परफॉर्म नहीं करेंगे तो बोर्ड उन्हें विदा करेगा.
इंडियन टीम को विदेशी कोच की जरूरत है?
अच्छा कोच चाहिए, देशी हो या विदेशी.
मांग है कि आपको कोच बनाया जाए.
मैं क्या कहूं? बोर्ड का डिसिजन है.
आप, द्रविड़, कुंबले कोचिंग कर सकते हैं?
हां, द्रविड़, कुंबले, मैं, तेंडुलकर कोचिंग कर सकते हैं, बल्कि कपिल देव भी कर सकते हैं.
सीधी बात कार्यक्रम आजतक चैनल पर हर रविवार रात 8.30 बजे प्रसारित होता है.

