scorecardresearch

बिजली के रेट बढ़ाना गलत है, मैं इसके सख्त खिलाफ हूं: अजय माकन

केंद्रीय आवास और गरीबी उन्मूलन मंत्री अजय माकन से हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल ने आजतक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम के लिए बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंशः

अजय माकन
अजय माकन
अपडेटेड 2 दिसंबर , 2012

केंद्रीय आवास और गरीबी उन्मूलन मंत्री अजय माकन से हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल ने आजतक चैनल के सीधी बात कार्यक्रम के लिए बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंशः
राहुल गांधी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने उनकी ताजपोशी कर दी है. क्या वे 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे?
राहुल जी तो शुरू से ही कैंपेन लीड करते रहे हैं. हर इलेक्शन में वे स्टार प्रचारक रहे है. लोग चाहते हैं, राहुल जी उनके इलाकों में जाएं और कैंपेन करें. कोऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन भले वे अभी बने हों पर हमारे कैंपेन लीडर तो वे शुरू से ही रहे हैं. प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह तो चुनाव के बाद की बात है.

जिस स्टार कैंपेनर की आप बात कर रहें हैं उनका रिकॉर्ड तो बहुत कमजोर है. अमेठी के लोगों ने उनको वोट देकर भेजा और 15वीं लोकसभा में उन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा?
आप अमेठी के लोगों से पूछिए कि वहां विकास हुआ है या नहीं. और पार्लियामेंट में सबसे ज्यादा सवाल पूछने वाले को क्या प्रधानमंत्री बना देना चाहिए?

लेफ्ट, तृणमूल चाहते हैं कि एफडीआइ पर वोटिंग हो. सपा, डीएमके, बीएसपी भी एफडीआइ का विरोध कर रहे हैं. लगता है, सरकार को खतरा है?
कोई खतरा नहीं. हमें पूरी उम्मीद है कि इस सत्र में एफडीआइ समेत हर मुद्दे पर सरकार को बहुमत प्राप्त होगा.

रॉबर्ट वाड्रा पर कई संगीन आरोप लगे कि उन्होनें नियम तोड़े, उसके बाद अशोक खेमका का तबादला कर दिया गया.
ये आरोप साबित किसने किए हैं? और खेमका का तबादला तो पहले भी 20 बार हो चुका है. क्या हर बार इसकी वजह वाड्रा रहे हैं?

बिजली के निजीकरण के वक्त आप ऊर्जा मंत्री थे. (दिल्ली में) बिजली की कीमतें देखिए बढ़ रही हैं.
दिल्ली में बिजली के रेट नही बढऩे चाहिए. मैं इसके सख्त खिलाफ हूं

पर सरकार तो लोगों को यह समझ रही है कि रेट क्यों बढऩे चाहिए?
दिल्ली में बिजली के निजीकरण को मैंने बारीकी से देखा है. हम लोगों को ये कहा गया था कि 5 साल बाद रेट कम होने शुरू हो जाएंगे.

यानी निजीकरण को जिस तरह लागू होना था, नहीं हुआ क्योकि कंपनियां मोटा माल कमा रही हैं और लोग परेशान हैं.
आपकी बात सही है. निजीकरण करके सरकार ने खुद को इन कंपनियों से अलग किया तो रेगुलेटरी कमीशन बिठाकर उसे रेट तय करने को कहा. लेकिन रेगुलेटरी फंक्शन दिल्ली में कुछ हद तक फेल हुआ है.

अब तो सरकार पानी का भी निजीकरण करना चाहती है.
निजीकरण खराब नहीं. उसे किस तरह से इंप्लीमेंट किया जाता है, यह महत्वपूर्ण है.

सीधी बात कार्यक्रम आजतक चैनल पर हर रविवार रात 8.30 बजे प्रसारित होता है.

Advertisement
Advertisement