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मुसीबत से कैसे पार पाएंगी महुआ मोइत्रा?

पश्चिम बंगाल से आने वाली टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का भविष्य फिलहाल सवालिया निशानों में घिरा है

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा
अपडेटेड 10 नवंबर , 2023

नवरात्र के नौ दिन इस बार महुआ मोइत्रा के लिए पूजा-पंडालों के भक्तिमय माहौल के बीच गूंजते हंसी-ठहाकों वाले नहीं रहे. वैसे तो बंगाल से इस सांसद के निर्वाचन क्षेत्र कृष्णानगर का नीरसता से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है, लेकिन महुआ के लिए 2023 का पूजा कैलेंडर किसी अशुभ घड़ी की तरह बेहद धीरे-धीरे गुजरा. सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे 35 वर्षीय जय अनंत देहद्राई ने 14 अक्टूबर को सीबीआई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को घोटाले से जुड़ा 39 पन्नों का एक पत्र भेजकर महुआ का नवरात्र बर्बाद कर दिया.

पत्र मिलते ही दुबे ने महुआ के साथ दुश्मनी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने न केवल पत्र के कुछ अंश सार्वजनिक किए बल्कि विशेषाधिकार हनन के लिए उन्हें सदन से निलंबित करने की मांग भी कर डाली. महुआ ने मामले को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और सोशल मीडिया पर आरोपों का जवाब देते हुए इसे 'जिल्टेड एक्स' (ठुकराए प्रेमी) और 'फर्जी डिग्री वाले' की करतूत करार दिया.

साथ ही आरोपों को छापने वाले मीडिया घरानों को मानहानि का नोटिस भेजा. तब तक मामला बिगड़ चुका था. 19 अक्टूबर यानी पंचमी को जब देशभर में श्रद्धालु युद्ध की देवी स्कंदमाता की भक्ति में लीन थे, तभी दुबई में बसे खानदानी कारोबारी दर्शन हीरानंदानी ने एक हस्ताक्षरित हलफनामे के जरिए आरोपों की पुष्टि कर महुआ की मुश्किलें बढ़ा दीं. नवरात्र के नौवें और आखिरी दिन जब उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में हलफनामे की बातों को फिर दोहराया, तब महुआ सियासी विसर्जन के करीब नजर आ रही थीं.

पहली बार लोकसभा सदस्य बनीं महुआ जिस तरह की बेबाकी के साथ तीखी भाषा इस्तेमाल करती हैं, उतनी मुखरता से बोलने का साहस अच्छे-अच्छे नहीं कर पाते. अब उनकी सदस्यता रहेगी या नहीं, इसका फैसला सदन की आचार समिति के हाथ में है. वैधता के सवाल की जांच लोकपाल की ओर से की जा रही है. वैसे तो वे देहद्राई और दुबे के आरोपों को पूरी बेबाकी से खारिज करती रही हैं लेकिन इस पूरे मामले को पैसे लेकर सवाल पूछने का दूसरा घोटाला करार दिया गया है.

सीधे तौर पर कहें तो महुआ पर आरोप है कि उन्होंने संसद में कुछ सवाल पूछने के बदले रियल एस्टेट कारोबारी निरंजन हीरानंदानी के 42 वर्षीय बेटे दर्शन से नकदी और महंगे उपहार लिए थे. दर्शन ने अपने हलफनामे में यह कहकर आरोप को और गंभीर बना दिया है कि महुआ ने अपने लोकसभा अकाउंट का लॉग-इन और पासवर्ड उनके साथ साझा किया और इसका इस्तेमाल वह उनकी ओर से प्रश्न अपलोड करने में करते थे.

महुआ की पार्टी तृणमूल कांग्रेस सारे मामले पर नजर बनाए हुए है, लेकिन वह नई दिल्ली में अपनी सबसे तेज-तर्रार नेता का खुलकर समर्थन करती नहीं दिख रही. आरोपों की वजह से तृणमूल सांसद की सदस्यता भी जा सकती है. इससे पहले 2005 में सामने आए ऐसे ही मामले में 11 सांसदों को निष्कासन का सामना करना पड़ा था. अब घटनाक्रम आगे क्या नया मोड़ लेगा? अपने विश्वस्तों के बीच एक देवी जैसी छवि बना चुकी 49 वर्षीया राजनेता यह जंग लड़ने के लिए कैसे और कितनी तैयार होंगी?

यह सब इस पर निर्भर करेगा कि पूरा नैरेटिव आगे क्या आकार लेगा. कारोबारी सम्राटों की देश के अंदर-बाहर गहरी पकड़ होती है. एक सियासी साम्राज्य अभी इतिहास रचने में लगा है. कहानी में हेनरी नाम का रॉटवीलर भी शामिल हो गया है. साजिश इतनी पुख्ता है कि उसकी गहराई का अंदाजा लगाना तक मुश्किल है. और, कभी-कभी एकदम हास्यास्पद ढंग से इतनी छिछली नजर आती है कि उसकी कोई तुक नहीं दिखती.

भले ही मौजूदा घटनाक्रम के पीछे महुआ और दुबे के बीच लंबे समय से चले आ रहे कटुतापूर्ण रिश्ते नजर आ रहे हों, लेकिन मामले की शुरुआत असल में 2019 में हुई थी. उसी साल लोकसभा में पहली बार कदम रखने वाली महुआ ने कुछ ही दिनों बाद 25 जून को सदन में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ जोरदार भाषण देकर खासी लोकप्रियता बटोरी थी, जिसमें उन्होंने 'फांसीवाद के सात लक्षण' गिनाए थे. तबसे, अपने आत्मविश्वास के बलबूते उन्होंने भाजपा की सबसे मुखर आलोचक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना ली और यह अपने आप में एक अलग फैक्टर नजर आने लगा.

लोगों को हर कहानी में किसी न किसी चेहरे की जरूरत पड़ती है, जो इसे बांधकर रख सके और जब जरूरत पड़े तो उसके सहारे कहानी का सिरा भी बदला जा सके. और इस सबके लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाली महुआ से बेहतर कोई चेहरा नहीं हो सकता. इस सौम्य, स्पष्टवादी, भावपूर्ण चेहरे से कोई भी वैश्विक निवेश बैंकिंग में 11 साल तक काम करने के अनुभवी जितनी समझदारी के साथ-साथ बंगाल के किसी विपक्षी सांसद जितनी वाक्पटुता की भी अपेक्षा कर सकता है.

और हां, यह चेहरा इतना फोटोजनिक भी है कि फैशन पत्रिकाओं के कवर पर जगह बना सके. विवाद शुरू होने से ठीक एक हफ्ते पहले पाउडर-ब्लू कलर की क्रिस्टल से सजी तरुण तहिलियानी साड़ी में महुआ की एक फोटो काफी वायरल हो रही थी. सबसे बड़ी बात यह कि उनमें अकेले ही पूरा मोर्चा संभालने की काबिलियत भी है. जब कुछ दक्षिणपंथी सोशल मीडिया हैंडल पर महुआ की कुछ तस्वीरें क्रॉप करके वायरल हुईं जिसमें वे अपने जन्मदिन पर शशि थरूर के साथ थीं, तो उन्होंने जवाब देने में जरा-भी देर नहीं की- ''बंगाल की महिलाएं जीवन को जीती हैं, झूठ को नहीं.'' दूसरे शब्दों में कहें यह रुख पितृसत्तात्मक मानसिकता को चुनौती देता है.

सियासी दुश्मनी जिस तरह बढ़ रही थी, ऐसा कुछ होना तय लग रहा था. महुआ दिग्गज कारोबारी गौतम अदाणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी कथित नजदीकी के मुद्दे को जिस आक्रामकता से उठा रही थीं, उससे भाजपा-विरोधी समूह के हौसले बुलंद थे. दूसरी ओर, नाराजगी जरूरत से ज्यादा बढ़ती जा रही थी. वे सोशल मीडिया पर भी अदाणी समूह की परियोजनाओं, धन प्रवाह, स्टॉक प्राइस आदि को लेकर सवालों की बौछार कर रही थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नियमों के उल्लंघन पर ध्यान नहीं दे रही. इससे पहले शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग ने जनवरी 2023 में अदाणी पर 'खुले-आम स्टॉक हेरफेर और बही-खातों में धोखाधड़ी' का आरोप लगाकर एक बम फोड़ा था.

जब हिंडनबर्ग रिपोर्ट सामने आई तो महुआ ने ट्वीट किया था, ''खुशी की बात है कि हिंडनबर्ग रिसर्च ने सेबी इंडिया को लिखे गए मेरे पत्रों को अपनी पड़ताल का हिस्सा बनाया और इस 'पुष्ट निष्कर्ष' पर पहुंचे. जबकि सेबी ऐसा नहीं कर सका!'' बस कुछ साथी सांसद- नाटकीय ढंग से अयोग्यता का सामना करने वाले राहुल गांधी- और कुछ गिने-चुने मीडिया समूह ही उनका साथ देते नजर आए. इसमें कोई दो राय नहीं कि भाजपा पर उनके हमले लगातार इस कदर तीखे होते थे कि उसको खुद से यह सवाल करने के लिए गलत नहीं ठहराया जा सकता कि 'महुआ जैसी मुसीबत से कैसे छुटकारा पाया जाए?' जाहिर है, जवाब उन्हीं सवालों से निकलना था जो महुआ ने सदन पटल पर पूछे थे.
 
कई किरदार शामिल

इस मामले में सबसे पहले आरोप लगाने वाले देहद्राई सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं और यूपेन/व्हार्टन का नाम उनके बायोडाटा में चार चांद ही लगाता है. वे मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी जैसे व्हाइट-कॉलर आपराधिक मामलों के माहिर वकील हैं और परिचितों के बीच काफी 'तेजतर्रार' माने जाते हैं. पिछले साल दिसंबर में महुआ के साथ उनके रिश्तों में कड़वाहट आ गई और दोनों के रास्ते अलग हो गए. इसके बाद महुआ ने कथित तौर पर 'अश्लील संदेश भेजने, दुर्व्यवहार, चोरी और अनधिकार प्रवेश' जैसी पुलिस शिकायतें दर्ज कराईं.

इन आरोपों से जुड़े दो मामले मार्च और सितंबर के हैं. देहद्राई जिस एक चीज पर अपना अधिकार बनाए रखना चाहते थे, वह है रॉटवीलर डॉग हेनरी. वे खुद को इसका 'पिता' बताते हैं. हेनरी को लेकर महुआ कितनी भावुक हैं, वह सोशल मीडिया पर छाए एक वीडियो से साफ जाहिर है. यह थोड़ा अविश्वसनीय लग सकता है कि एक कुत्ते को पाने की लड़ाई देश के सबसे बड़े राजनैतिक विवादों में से एक में केंद्र बिंदु बन रही है. हेनरी भी चाहे-अनचाहे ही सही, इस प्रकरण में शामिल किरदारों में एक बन गया है.

दो-टूक बात करने वाले गोड्डा (झारखंड) के सांसद निशिकांत दुबे एक वामपंथी के बेटे हैं, जिन्होंने युवावस्था में भगवा पार्टी की ओर रुख किया और अब पूरी मजबूती से पार्टी में आगे बढ़ रहे हैं. कभी पार्टी की नारेबाजी करने वाली ब्रिगेड में शामिल रहे दुबे अब वह मुकाम हासिल कर चुके हैं कि महिला आरक्षण विधेयक पर बहस की शुरुआत करें. महुआ के साथ उनकी अदावत पुरानी है. वह महुआ ही थीं जिन्होंने उन पर 2009 और 2014 के चुनावी हलफनामे में एमबीए की फर्जी डिग्री का आरोप लगाया था. इस तरह देहद्राई का साथ देना उन्हें फायदेमंद नजर आया, आखिर दुश्मन का दुश्मन दोस्त ही होता है.

पूरे मामले में एक अन्य अहम किरदार से आरोपों की पुष्टि की दरकार थी. इसे दर्शन ने पूरा किया जिन्होंने 2017 से महुआ का 'करीबी निजी दोस्त' होने की बात मानी. दर्शन को हीरानंदानी ग्रुप का रियल एस्टेट कारोबार को भारत से बाहर ले जाने का श्रेय दिया जाता है. साथ ही समूह के डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऊर्जा और औद्योगिक वेयरहाउसिंग/लॉजिस्टिक्स आदि क्षेत्रों में उतरने के पीछे भी उन्हीं का दिमाग है. वे योट्टा डेटा सर्विसेज, तेल और गैस इंफ्रा कंपनी एच-एनर्जी, टार्क सेमीकंडक्टर्स और उपभोक्ता सेवाएं देने वाले तेज प्लेटफॉक्वर्स के अध्यक्ष हैं. दर्शन के आक्रामक कारोबारी रुख ने ही उन्हें पिछले साल अक्टूबर में यूपी सरकार के साथ एक समझौते के लिए प्रेरित किया, जिसके तहत प्रदेश में अगले पांच से सात साल में 39,000 करोड़ रुपए के निवेश से एक डेटा सेंटर परिसर स्थापित होना है.

उनके हलफनामे के जवाब में महुआ ने आरोप लगाया कि इसे 'पीएमओ के कुछ अहम लोगों' ने तैयार किया और फिर उनसे 'डरा-धमकाकर' हस्ताक्षर कराए गए. साथ ही सहानुभूतिपूर्ण अंदाज में जोड़ा, ''वैसे, बहुत दुख की बात है कि दर्शन (जो प्रिय मित्र हैं) यह समझ नहीं पा रहे कि उन्होंने क्या दांव पर लगा दिया है.'' बहरहाल, महुआ को दर्शन से मिले उपहारों की सूची ने पूरी कहानी में पेज-3 जैसा तड़का लगा दिया है, इस सूची में शामिल हैं—सल्वाटोर फेरागामो, बर्लुटी, लुइ वुइटन और गुच्ची जैसे लग्जरी ब्रान्ड. यही नहीं उपहारों की सूची में शामिल कुछ चीजें आरोपों की गंभीरता को और बढ़ाती नजर आती हैं. मसलन, शराब की बोतलें, छुट्टियां, लुटियंस बंगले का रूप-रंग बदलना और अंत में सीधे तौर पर नकदी भी शामिल है. यह आखिरी उपहार और लॉगइन/पासवर्ड साझा करना, दोनों ही महुआ के लिए मुश्किल बढ़ाने वाले साबित हो सकते हैं.

प्रमुख सवाल

देहद्राई का दावा है कि महुआ ने सांसद के रूप में कुल 61 सवाल पोस्ट किए, जिसमें करीब 50 'दर्शन हीरानंदानी और उनकी कंपनी के व्यावसायिक हितों' से जुड़े थे. आरोप है कि अदाणी को लेकर पूछे गए उनके सवाल-जिनकी संख्या बाद में घटाकर 12 कर दी गई-हीरानंदानी समूह के प्रतिस्पर्धी हितों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए. दरअसल, तीन ऐसे कारोबार हैं जहां उनके हित परस्पर टकराते हैं- रियल एस्टेट, डेटा सेंटर और एलएनजी टर्मिनल. इससे पहले शायद ही किसी को इनकी प्रतिद्वंद्विता की जानकारी थी. स्वीकारोक्ति अंदाज में लिखे दर्शन के हलफनामे का ब्योरा थोड़ा गंभीर है. एच-एनर्जी, जिसकी स्थापना उन्होंने 2017 में की, के पास महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के जयघर बंदरगाह पर एक एलएनजी पुन: गैसीकरण टर्मिनल है.

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस का आयात करने और इसे पुन: गैसीकृत करने के लिए ओडिशा में धामरा एलएनजी टर्मिनल के साथ समझौता किया था, जो अदाणी समूह और फ्रांसीसी फर्म टोटलएनर्जीज का एक संयुक्त उद्यम है. दर्शन का आरोप है कि मोइत्रा को पता था कि आइओसी 'धामरा के साथ दीर्घकालिक ऑफ-टेक समझौता करना चाहेगी', न कि उनकी कंपनी के साथ. दर्शन के मुताबिक, इस सूचना के आधार पर मोइत्रा ने ऐसे सवाल तैयार किए जो ''अदाणी समूह को निशाना बनाकर सरकार को घेरने में काम आ सकते थे. उन्होंने सांसद के तौर पर अपनी ईमेल आइडी मेरे साथ साझा की, ताकि मैं उन्हें जानकारी भेज सकूं और वह संसद में सवाल उठा सकें. मैं उनके प्रस्ताव पर सहमत हो गया.''

दर्शन ने इसे एक और मोड़ देते हुए आरोप लगाया कि महुआ ने जान-बूझकर अदाणी से नाम जोड़कर मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाने की कोशिश की, क्योंकि वे एक 'बेहद महत्वाकांक्षी' नेता हैं और 'राष्ट्रीय स्तर पर जल्द खास मुकाम बनाना' चाहती थीं. हलफनामे में कहा गया, ''उन्हें मोदी पर निशाना साधने के लिए गौतम अदाणी और उनके समूह पर हमला करना बेहतर विकल्प लगा क्योंकि दोनों गुजरात से हैं.'' वहीं, महुआ ने एक ट्वीट कर जान-बूझकर फंसाए जाने का आरोप लगाया, ''आचार समिति के अध्यक्ष खुले तौर पर मीडिया से बात करते हैं.

कृपया लोकसभा के नियमों पर गौर करें. हलफनामा मीडिया तक कैसे पहुंचा? पहले तो अध्यक्ष को इसकी जांच करानी चाहिए कि ये लीक कैसे हुआ. मैं फिर यही बात कहती हूं कि भाजपा का एकसूत्रीय एजेंडा अदाणी पर मुंह बंद कराने के लिए मुझे लोकसभा से निष्कासित करना है.'' एक और कटाक्ष करते हुए उन्होंने लिखा, ''मेरे दरवाजे पर पहुंचने से पहले प्रवर्तन निदेशालय और अन्य एजेंसियों की ओर से कोयला घोटाले में अदाणी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का भी इंतजार रहेगा.'' हलफनामे में जिन अन्य किरदारों का जिक्र आया उन्होंने भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी समेत कड़ा प्रतिरोध जताया है. इनमें शामिल थे वकील दंपती शार्दुल और पल्लवी श्रॉफ, बीजद सांसद पिनाकी मिश्रा और पत्रकार सुचेता दलाल. दर्शन का टेलीविजन पर आकर अपनी बात कहना महुआ पर शिकंजे के प्लान ए की ही अगली कड़ी नजर आता है.

बेबाक व्यक्तित्व

मूलत: असम में बंगाली बहुल हिस्से कछार की रहने वाली महुआ शुरू से ही राजनीति में अपनी रुचि को लेकर कुछ किस्से सुनाती रही हैं. मसलन, एक बार उन्होंने अपने माता-पिता को एक एरोग्राम भेजा था जब वे एक मेधावी छात्रा की तरह गणित और अर्थशास्त्र की पढ़ाई कर रही थीं. मैसाचुसेट्स स्थित माउंट होलोएक के पास से भेजे उस संदेश में कुछ साल तक अमेरिका में काम करने के बाद भारत में सार्वजनिक जीवन अपनाने की इच्छा जाहिर की गई थी. कई साक्षात्कारों में वे अपने बैच के 10वें पुनर्मिलन के बारे में भी बताती हैं, जहां उन्हें अपने साथी निवेश बैंकरों की भीड़ को देखकर अचानक ही जीवन में कुछ नया करने का ख्याल आया. अपने अच्छे-खासे चलते करियर के 11वें वर्ष में वे जेपी मॉर्गन चेज, लंदन में वाइस प्रेसिडेंट पद पर थीं, लेकिन उन्होंने अपने दिल की सुनी और सब कुछ छोड़कर आगे बढ़ गईं.

सबसे पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा, और राहुल गांधी की नजदीकी टीम का हिस्सा रहीं, लेकिन एक साल बाद ही टीएमसी में चली गईं. 2016 में नादिया की करीमपुर सीट से टिकट मिला और जीत हासिल कर विधानसभा पहुंच गईं. वहीं से उनके 2019 में लोकसभा पहुंचने का रास्ता खुला. लेकिन अब उनकी सदस्यता दांव पर लगी है. वैसे भी अदाणी के खिलाफ उनका लगातार हमला करना उनकी पार्टी के हितों से भी मेल नहीं खाता है- पिछले साल ही अदाणी समूह ने राज्य में 25,000 करोड़ रुपए की ताजपुर बंदरगाह परियोजना हासिल की है. वैसे भी, वे एक ऐसी पार्टी में बेबाक चेहरा बनती जा रही थीं, जिसका नेतृत्व खुद एक बेहद तेजतर्रार नेता के हाथ में है.

इससे कई बार असहज स्थिति भी आ चुकी है. फिलहाल, तृणमूल में भी उनका भविष्य अधर में ही अटका है. अपनी पार्टी से खुलकर समर्थन न मिलने के बारे में पूछे जाने पर महुआ ने इंडिया टुडे से कहा, ''मैं सच के लिए बोलती हूं और सच्चाई को पीछे से किसी समर्थन की जरूरत नहीं है. मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगी.'' सच्चाई कहां और कितनी टिकेगी, इसका तो पता नहीं, लेकिन चौतरफा हमले से मुकाबले के लिए महुआ को अपनी पसंदीदा देवी मां काली के आशीर्वाद की जरूरत अवश्य पड़ेगी.

कितने किरदार
14 अक्टूबर को वकील जय अनंत देहद्राई ने महुआ मोइत्रा पर आरोपों की सूची के साथ 39 पन्नों का एक पत्र भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और सीबीआई को भेजा.

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे

पत्र में आरोप लगाया गया कि गौतम अदाणी समूह के खिलाफ सवाल पूछने के बदले महुआ ने दुबई में रहने वाले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से महंगे गिफ्ट और नकद स्वीकार किए

कारोबारी दर्शन हीरानंदानी

निशिकांत दुबे ने सदन की आचार समिति से महुआ के खिलाफ कदम उठाने की मांग की है और लोकपाल से भी उनके खिलाफ शिकायत की है. महुआ ने देहद्राई को 'अ जिल्टेड एक्स' बताया और दुबे पर 'फर्जी डिग्री वाला होने' का आरोप दोहराया; महुआ ने कहा कि प्रतिशोध की भावना से निराधार आरोप लगाए गए हैं.

हीरानंदानी ने खुद को निर्दोष और महुआ को दोषी ठहराते हुए एक हलफनामा दाखिल किया. उसमें कहा कि महुआ ने उन्हें लोकसभा का अकाउंट लॉग-इन और पासवर्ड दिया ताकि सीधे वे सवाल पूछ सकें. बंगाल ग्लोबल समिट 2017 के दौरान तब विधायक रहीं महुआ की मुलाकात दर्शन हीरानंदानी से हुई. उनकी लगातार सामाजिक मुलाकातें बाद में करीबी दोस्ती में बदल गई. जिन 'सवालों पर सवाल' उठ रहे हैं उनमें अदाणी के धामरा एलएनजी से जुड़ा सवाल शामिल है. हीरानंदानी के उस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी हित जुड़े हैं.

कारोबारी गौतम अदाणी

- अर्कमय दत्ता मजुमदार

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