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क्या है यूएफओ फाइलों का रहस्य

अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों के दिए ब्योरों से लेकर आज की सेनाओं से मिले फुटेज तक, अमेरिका में हाल ही सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों ने फिर से अनआइडेंटिफाइड एरियल घटनाओं पर नए सिरे से छेड़ी बहस

नवंबर 1969 में चंद्रमा के क्षितिज के ऊपर दिखाई देने वाली एक अज्ञात घटना की इमेज
अपडेटेड 16 जून , 2026

मशहूर अमेरिकी फिल्म निर्माता स्टीवन स्पिलबर्ग की नई साइंस-फिक्शन फिल्म डिस्क्लोजर डे 12 जून को रिलीज होने वाली है. लेकिन हॉलीवुड की इस नई अजनबी या एलियन कहानी के सिनेमाघरों तक पहुंचने से पहले ही अमेरिकी सरकार ने खुद ऐसा 'डिस्क्लोजर' (खुलासा) कर दिया है, जिसने इस विषय को लेकर दुनिया भर में नई जिज्ञासा पैदा कर दी है.

आठ मई को वॉशिंगटन ने उन गोपनीय दस्तावेजों का पहला हिस्सा जारी किया, जो अब तक 'अनआडेंटिफाइड एनोमलस फेनोमेना' (यूएपी) से जुड़े थे. यूएपी वह नया और ज्यादा वैज्ञानिक शब्द है, जिसका इस्तेमाल अब उन घटनाओं के लिए किया जाता है जिन्हें पहले आम तौर पर यूएफओ (अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) या उड़नतश्तरी कहा जाता था.

ये दस्तावेज पेंटागन के नए पोर्टल—प्रे‌सिडेंशियल अनसीलिंग ऐंड रिपोर्टिंग सिस्टम फॉर यूएपी एनकाउंटर्स (परसू)—के तहत जारी किए गए हैं. अब तक दो चरणों में 220 से ज्यादा डीक्लासिफाइड दस्तावेज, वीडियो और तस्वीरें सार्वजनिक की जा चुकी हैं. दूसरा चरण 22 मई को जारी हुआ. इनमें शीत युद्ध के दौर में देखी गई 'उड़नतश्तरियों' के बारे में चश्मदीद बयानों से लेकर आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म के सेंसरों से रिकॉर्ड की गई इन्फ्रारेड फुटेज तक शामिल हैं.

1965 के जेमिनी 7 अंतरिक्ष मिशन के दौरान हुआ यह रेडियो संवाद इसकी एक दिलचस्प मिसाल है. ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर के मिशन कंट्रोल और अंतरिक्ष यात्रियों के बीच हुई इस बातचीत के मूल हस्तलिखित नोट्स—जिन पर 'यूएफओ साइटिंग बाइ बॉर्मन' लिखा गया था—अब सार्वजनिक कर दिए गए हैं.

अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक बॉर्मन: ''जेमिनी-7 बोल रहा हूं, ह्यूस्टन—क्या आप सुन पा रहे हैं?''

ह्यूस्टन: ''आवाज पूरी तरह साफ आ रही है, 7. बोलिए.''

बॉर्मन: ''दस बजे की दिशा में ऊपर एक संदिग्ध वस्तु दिखाई दे रही है...''

ह्यूस्टन: ''रोजर. जे‌मिनी-7, क्या वह बूस्टर है या वास्तव में कुछ दिखाई दे रहा है?''

बॉर्मन: ''यहां मलबा मौजूद है, सचमुच कोई वस्तु दिखाई दे रही है.''

बाद में उनके साथी अंतरिक्ष यात्री जिम लॉवेल ने उस वस्तु को 'काले अंतरिक्ष में सूरज की रोशनी के बीच चमकती हुई चीज, जिस पर करोड़ों कण चिपके हुए थे' बताया था.

एक और डीक्लासिफाइड रिकॉर्ड 1969 के अपोलो 11 मून लैंडिंग मिशन से जुड़ा है, वही मिशन जिसने पहली बार इंसानों को चांद पर उतारा था. मिशन के तकनीकी डिब्रीफिंग रिकॉर्ड में लूनर मॉड्यूल पायलट बज एल्ड्रिन ने बताया कि जब वे लाइट बंद करके सोने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें ''केबिन के भीतर छोटी-छोटी चमकती रोशनियां दिखाई दीं जो कुछेक मिनटों के अंतराल पर नजर आ रही थीं.''

कुछ साल बाद, 1972 में हैरिसन श्मिट ने भी इसी तरह का अनुभव दर्ज किया. उन्होंने बताया कि जब आंखें अंधेरे की अभ्यस्त हो गई थीं, तब पूरी उड़ान के दौरान लगातार रोशनी की चमक दिखाई देती रही. इसी बीच, अपोलो 17 मून लैंडिंग मिशन की एक तस्वीर भी दोबारा जांच के दायरे में आई है. इस तस्वीर में चंद्रमा के निचले आसमान में त्रिकोणीय आकार में तीन बिंदु दिखाई देते हैं.

पेंटागन के खुलासे के मुताबिक, शुरुआती विश्लेषण यह संकेत देता है कि ''तस्वीर में दिख रही आकृति शायद किसी वास्तविक भौतिक वस्तु का परिणाम हो सकती है.'' दिलचस्प बात यह है कि वर्षों तक इस 'असामान्य घटना' की प्रकृति को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई थी.

भारत में उड़नतश्तरियों का रहस्य
इस तरह की अजूबी घटनाएं दशकों से भारत समेत दुनिया भर में कयास, किस्से और सुरक्षा संबंधी फिक्र पैदा करती रही हैं. अपने देश में इसकी कहानियां सबसे ज्यादा हिमालय के दूरदराज इलाकों से जुड़ी रही हैं, खासकर लद्दाख के कोंगका पास से, जो चीन सीमा से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब है.

हाल के वर्षों में हालांकि भारत में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाली 'यूएफओ' घटना नवंबर 2023 में मणिपुर के इंफाल एअरपोर्ट पर हुई थी. एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर के ऊपर एक अज्ञात सफेद वस्तु मंडराती दिखने के बाद करीब तीन घंटे तक व्यावसायिक उड़ानें रोकनी पड़ी थीं. इसके बाद नोटैम (नोटिस टू एअर मिशन्स) जारी किया गया. उस समय की रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि जवाबी कार्रवाई के तहत दो फाइटर जेट भी भेजे गए थे.

उस साल 14 दिसंबर को लोकसभा में दिए गए जवाब में तत्कालीन नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री वी.के. सिंह ने कहा था, ''वह वस्तु सफेद रंग की दिखाई दे रही थी. वह एटीसी टावर के ऊपर दक्षिण दिशा की तरफ बढ़ी और कुछ समय तक वहीं स्थिर रही...फिर गायब हो गई.'' कम से कम सार्वजनिक तौर पर आज तक इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है.

बेंगलूरू के खगोल भौतिकीविद् जयंत मूर्ति मानते हैं कि यूएपी से जुड़ी हर घटना का आखिरकार कोई न कोई 'सामान्य' धरती से जुड़ा कारण होता है, चाहे वह प्राकृतिक घटना हो या कोई ऐसा सैन्य विमान जिसे लोग पहचान न पाए हों. वे कहते हैं, ''अगर आज ऐसी कोई घटना होती है, तो मैं सबसे पहले किसी ड्रोन पर शक करूंगा. लेकिन पहले के समय में शायद उसे गुब्बारे की उड़ान माना जाता.'' उनके मुताबिक, ''ऐसी कई घटनाएं हैं जिनकी हमारे पास स्पष्ट व्याख्या नहीं है, और बाद में उनके लिए ठोस जवाब ढूंढ़ना बेहद मुश्किल होता है.''

पेंटागन के पास कहानियों की भरमार
अमेरिका में ऐसे रहस्य अब सिर्फ हाशिए की दिलचस्पी भर नहीं रह गए हैं. वे आधिकारिक जांच का विषय बन चुके हैं, जिनके समर्थन में सैन्य फुटेज और कांग्रेस की सुनवाई तक मौजूद हैं. फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा था कि ''लोगों की जबरदस्त दिलचस्पी को देखते हुए'' वे ''युद्ध मंत्री और दूसरी संबंधित एजेंसियों'' को ''एलियन और बाह्य जीवन, यूएपी और यूएफओ'' से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने का निर्देश दे रहे हैं. इसी फैसले ने बाद में परसू खुलासों का रास्ता तैयार किया.

सबसे पुराने रिकॉर्ड 1947 के हैं, जब अमेरिका में 'फ्लाइंग डिस्क' या 'उड़नतश्तरियों' को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक तरह का उन्माद फैल गया था. उस दौर के संग्रहित पत्र, टेलीग्राम और एफबीआइ मेमो बताते हैं कि देश के कई हिस्सों से ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट लगातार आ रही थीं. अमेरिकी वायु सेना के एक आंतरिक दस्तावेज से पता चलता है कि उसकी खुफिया यूनिट इन घटनाओं को चिंता का विषय मानती थी. हाल के खासकर पिछले एक दशक के रिकॉर्ड आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म पर लगे सेंसरों से रिकॉर्ड की गई रहस्यमयी हवाई गतिविधियों की इन्फ्रारेड फुटेज भी शामिल करते हैं.

इनमें कुछ मामले खास तौर पर ज्यादा दिलचस्प माने जा रहे हैं. जैसे 2013 में पश्चिम एशिया के ऊपर रिकॉर्ड की गई आठ कोनों वाली उड़ती वस्तु, 2024 में किसी अज्ञात स्थान पर पवन चक्कियों के बीच तेजी से गुजरती वस्तु का वीडियो (देखें: रहस्य से आमना-सामना). इनमें जगह की पहचान छिपाने के लिए कई हिस्से काले कर दिए गए हैं. इन्हें ऑल-डोमेन एनोमली रेजॉल्यूशन ऑफिस (एएआरओ) को भेजा गया था. यह एजेंसी 2022 में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के तहत यूएपी घटनाओं की जांच के लिए बनाई गई थी. लेकिन अब तक इन घटनाओं की कोई अंतिम व्याख्या सामने नहीं आई है.

वैज्ञानिक व्याख्या
इन खुलासों ने एक बार फिर उस सवाल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिसने पीढ़ियों से इंसानों को आकर्षित किया है: क्या ब्रह्मांड में कहीं और भी बुद्धिमान जीवन मौजूद है? लेकिन इस सामग्री का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. गैलीलियो प्रोजेक्ट के प्रमुख अवी लोएब कहते हैं, ''नई फाइलों की समीक्षा के बाद हमारी रिसर्च टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इनमें से कोई भी वस्तु इतनी असाधारण नहीं है कि उसके लिए किसी बाहरी या रहस्यमयी स्रोत की जरूरत पड़े.'' हालांकि लोएब मानते हैं कि ‌फिर भी इन खुलासों की अहमियत है क्योंकि इससे यूएपी पर होने वाली चर्चा मुख्यधारा के वैज्ञानिक विमर्श का हिस्सा बनी है.

वे कहते हैं, ''बदकिस्मती से वीडियो से जुड़ी कई अहम जानकारियां हटा दी गई हैं और ज्यादातर तस्वीरों को कैमरे के भीतर पड़ने वाले प्रतिबिंब या मानव निर्मित वस्तुओं से समझाया जा सकता है.'' मसलन, अपोलो 11 के अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन ने जिन चमकती रोशनियों का जिक्र किया था, वे शायद कॉस्मिक किरणों या सूक्ष्म उल्कापिंडों की वजह से हो सकती हैं. लोएब बताते हैं कि चंद्रमा के पास न तो पृथ्वी जैसा वातावरण है और न ही चुंबकीय सुरक्षा कवच. इसी वजह से उसकी सतह पर कॉस्मिक किरणों का प्रभाव पृथ्वी की तुलना में लगभग 200 गुना ज्यादा होता है. दरअसल हाल ही आर्टेमिस-2 मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने भी 'इंपैक्ट फ्लैश' देखने की बात कही थी. ये वे छोटी चमक होती हैं, जो उल्कापिंडों के चंद्रमा की सतह से टकराने पर पैदा होती हैं.

नासा ने 2023 में एक बाहरी अध्ययन पैनल की सिफारिश के बाद यूएपी रिसर्च में अपनी भागीदारी बढ़ाई है. दुनिया के दूसरे देशों में भी सरकारें इसी तरह की पहल कर रही हैं. मसलन, फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस 1970 के दशक के आखिर से जीईआइपीएएन (ग्रुप फॉर स्टडी ऐंड इन्फॉर्मेशन ऑन अनआइडेंटिफाइड एअरोस्पेस फेनोमेना) नाम की विशेष इकाई चला रही है. जीईआइपीएएन साफ तौर पर कहता है कि वह न तो एलियन जीवन की जांच करता है और न ही किसी पैरानॉर्मल गतिविधि की.

उसकी वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक जांचे गए 3,351 यूएपी मामलों में से 27.8 फीसद घटनाओं को 'पूरी तरह पहचानी गई' श्रेणी में रखा गया. 38.8 फीसद मामलों को 'संभावित तौर पर पहचाना गया' माना गया. वहीं 30.3 फीसद घटनाएं 'पर्याप्त जानकारी न होने की वजह से अनजानी' रह गईं. सिर्फ 3.1 फीसद मामले ऐसे थे जिन्हें जांच के बाद भी 'अनजाना' माना गया. यानी ज्यादातर मामलों के पीछे आखिरकार सामान्य वजहें ही निकलकर सामने आती हैं.

आगे क्या
बहरहाल, उड़नतश्तरी या अंतरिक्ष में अज्ञात वस्तुओं का अध्ययन करने वाले लोएब का मानना है कि यूएपी से जुड़े रहस्यों का जवाब सिर्फ 'ऊंची गुणवत्ता वाले सबूतों' से ही मिल सकता है. वे कहते हैं, ''अगर इन वस्तुओं की दूरी, गति और त्वरण का सही पता चल जाए, तो यह समझना आसान होगा कि क्या इनमें से कोई मानव निर्मित तकनीक की सीमाओं से बाहर है.''

उनका गैलीलियो प्रोजेक्ट आसमान में मौजूद कई वस्तुओं की एक साथ ट्रैकिंग कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से उनकी प्रकृति समझने की कोशिश करता है. यह तरीका दशकों पुराने सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस (एसईटी) कार्यक्रम का पूरक माना जा रहा है, जो अंतरिक्ष से आने वाले विद्युत-चुंबकीय संकेतों की खोज पर केंद्रित है.

आने वाले महीनों में अमेरिका और ज्यादा गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक कर सकता है. अमेरिकी सरकार के एक बयान में कहा गया, ''यह एक अपूर्व और ऐतिहासिक प्रक्रिया है, जिसके लिए दर्जनों एजेंसियों के बीच समन्वय और करोड़ों दस्तावेजों की समीक्षा जरूरी है. इनमें से कई रिकॉर्ड सिर्फ कागजी रूप में मौजूद हैं और कई दशकों पुराने हैं.''

बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिकी युद्ध विभाग समय-समय पर नई फाइलें जारी करता रहेगा. लोएब का मानना है कि ''सबसे दिलचस्प चीजें अभी सामने आनी बाकी हैं.'' उनके मुताबिक, ज्यादा महत्वपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री को सार्वजनिक होने में ज्यादा समय लगेगा, क्योंकि उसे नौकरशाही की कई परतों वाली जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. फिलहाल रहस्य और जिज्ञासा दोनों बरकरार हैं.

रहस्य का चंद्रकोण
अपोलो-12 नवंबर 1969 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने वाला अमेरिका का दूसरा चंद्र मिशन था. लूनर मॉड्यूल पायलट एलन एल. बीन और ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल के बीच हुई यह बातचीत मिशन के पांचवें दिन लगभग एक घंटे तक देखी गई एक अज्ञात घटना से जुड़ी है. पांच दशक से ज्यादा समय बाद भी इस घटना की गुत्थी अभी तक अनसुलझी

बीन: जब आप अंधेरे हिस्से में एओटी (अलाइनमेंट ऑप्टिकल टेलीस्कोप) से बाहर देखते हैं... तो आप इन रोशनियों को देख सकते हैं—रोशनी के कण, रोशनी की किरणें ... वे बस अंतरिक्ष में तैरती जा रही हैं. मैं सोच रहा था कि ये मेरे वॉटर बॉयलर से गिर रही हैं लेकिन ऐसा लग रहा है कि इनमें से कुछ चीजें चंद्रमा से बाहर निकल रही हैं

ह्यूस्टन: हम इस डेटा के साथ कुछ भी करने से पहले इसकी अच्छे से जांच-परख करेंगे

रहस्य से आमना-सामना
अमेरिकी प्रशासन ने अनआइडेंटिफाइड एनॉमलस फेनोमेना (यूएपी) यानी अज्ञात असामान्य घटनाओं के बारे में आठ मई और 22 मई को परसू (प्रेसिडेंशियल अनसीलिंग ऐंड रिपोर्टिंग सिस्टम फॉर यूएपी एनकाउंटर्स) के तहत 220 से ज्यादा फाइलें जारी कीं. ये मामले अब भी आधिकारिक तौर पर अनसुलझे हैं. यहां पेश हैं कुछ पेंचीदा उदाहरण

आसमान में हीरा: साल: 2024 स्थान: यूनान
अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म पर लगे कई सेंसरों के जरिए रिकॉर्ड की गई 1 मिनट 5 सेकंड की फुटेज 

इसके साथ जारी मिशन रिपोर्ट में  यूएपी को 'हीरे के आकार की' वस्तु बताया गया है. इसकी गति लगभग 434 नॉट (800 किमी प्रति घंटा) दर्ज की गई

आठ नोक वाला तारा: साल: 2013 स्थान: पश्चिम एशिया
इन्फ्रारेड सेंसर से रिकॉर्ड की गई 1 मिनट 46 सेकंड की फुटेज में एक ऐसी वस्तु दिखाई देती है, जो आठ नोक वाले तारे जैसी लगती है. इसकी भुजाएं बारी-बारी से अलग-अलग लंबाई की हैं

यह सेंसर के दृश्य क्षेत्र में गतिमान है और पीछे एक स्पष्ट लकीर छोड़ता है

पवन चक्कियों के बीच यूएफओ: साल: 2024 स्थान: अज्ञात
अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म पर लगे इन्फ्रारेड सेंसर के जरिए रिकॉर्ड की गई 1 मिनट 39 सेकंड की फुटेज में एक अज्ञात वस्तु पवन चक्कियों के बीच तेज गति से गुजरती हुई दिखाई देती है

इसे अमेरिका की इंडो-पैसिफिक कमान ने जमा किया था

 विशेषज्ञ की राय- 

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के गैलीलियो प्रोजेक्ट के प्रमुख अवी लोएब कहते हैं कि यूएपी फाइलों के जरिए जिन भी ऑब्जेक्ट का खुलासा हुआ है, उनमें से कोई भी ''इतना असाधारण'' नहीं है कि इनको ''विचित्र स्रोत'' का माना जाए. उनका कहना है कि कई तस्वीरों को ''कैमरे के ऑप्टिक्स में प्रतिबिंब या मानव निर्मित वस्तुओं के रूप में समझाया जा सकता है.'' अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों की बताई गई चमकीली रोशनी ''कॉस्मिक किरणों या सूक्ष्म उल्कापिंडों'' के कारण हो सकती हैं

जब भारत में चर्चा में आए 'एलियन'
नवंबर 2023 में इंफाल एअरपोर्ट पर एटीसी टावर के पास एक सफेद अज्ञात वस्तु दिखाई देने के बाद तीन घंटे तक उड़ान संचालन रोक दिया गया था और दो फाइटर जेट भेजे गए थे. यह रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है.

भारत में यूएफओ से जुड़ी कहानियां सबसे ज्यादा हिमालय के दूरदराज के इलाकों, खासकर लद्दाख में एलएसी के पास स्थित कोंगका पास से जुड़ी रही हैं, जहां कइयों किलोमीटर दूर तक साफ-साफ दिखाई देता है.

2012-13 में पैंगोंग त्सो झील के पास तैनात भारतीय सेना के जवानों ने पूर्वी आसमान में ऊपर-नीचे होती एक चमकदार वस्तु देखने की रिपोर्ट दी थी. बाद में जांच में शामिल एक खगोलशास्त्री ने बताया कि वह दरअसल बृहस्पति ग्रह था.

हॉलीवुड में एलियन के व्यापक तौर पर लोकप्रिय होने से बहुत पहले सत्यजीत राय ने दि एलियन नाम की साइंस-फिक्शन पटकथा लिखी थी. यह फिल्म कभी बन नहीं पाई, लेकिन इसे स्टीवन स्पिलबर्ग की ई.टी. द एक्स्ट्रा-टेरिस्ट्रियल (1982) से लगभग 15 साल पहले विकसित किया गया था.

राय की यह पटकथा उनकी कहानी बंकूबाबुर बंधु पर आधारित थी, जिसमें एक एलियन ग्रामीण बंगाल में उतरता है. भारतीय लोकप्रिय संस्कृति में सिनेमा ने बाद में इस विषय को कई बार दोहराया, जिनमें कोई मिल गया (2003) और पीके (2014) जैसी फिल्में शामिल हैं.

बेंगलूरू के खगोल भौतिकीविद् जयंत मूर्ति मानते हैं कि यूएपी (अनआडेंटिफाइड एनोमलस फेनोमेना) से जुड़ी हर घटना का कोई न कोई 'सामान्य' कारण होता है, प्राकृतिक घटना से लेकर ऐसे किसी सैन्य विमान तक जिसे देखने वाले पहचान न पाए हों. सत्यजीत राय का अपनी फिल्म के लिए बनाया गया 'दि एलियन' का स्केच, हालांकि वह फिल्म बन नहीं पाई. 

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