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...और फिर संवेदनाओं की जीत

स्टेज के उम्दा कलात्मक कौशल से हिंदुस्तानी किस्सागोई का दायरा बढ़ाने वाली प्रतिभाओं ने फिर मनवाया लोहा. चार दशकों से इटली से आकर कथकली सीखते बुजुर्ग कलाकार ने हथियाया श्रेष्ठ अभिनेता का खिताब.

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श्रेष्ठ नाट्य प्रस्तुति: मिथ्यासुर
अपडेटेड 7 अप्रैल , 2026

यह घटना एक मायने में अर्नेस्ट हेमिग्वे के दि ओल्ड मैन ऐंड द सी के बूढ़े मछुआरे सैंटियागो के साहसिक किस्से से कम नहीं. इटली के मिलान शहर के एक रंगकर्मी मारियो बरजगी को 28 साल की उम्र में संयोगवश अपने ही मुल्क में कथकली सीखने का मौका मिलता है. इस भारतीय शास्त्रीय नृत्य में दिलचस्पी बढ़ने पर तीन साल बाद 1985 में वे केरल आ पहुंचते हैं.

फिर पैसे जुटाकर हर साल दो महीने के लिए केरल के त्रिशूर जिले के चेरुतुरुति कस्बे में चलने वाले विश्वप्रसिद्ध केरल कलामंडलम आने और खुद को मांझने लगते हैं. अब 72 के हो चले कथकली के महारथी मारियो को हेमिंग्वे की उसी कृति में बूढ़े सैंटियागो का किरदार निभाने के लिए महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स-2026 में श्रेष्ठ अभिनेता का अवार्ड मिला है.

दो स्तरों पर 2,000 से ज्यादा अभिनेताओं के हुनर की परख के बाद. हिंदुस्तान में थिएटर का यह सबसे बड़ा अवार्ड उन्हें कलामंडलम के ही नीरज जी.एम. के निर्देशन में कथकली शैली में की गई अनूठी प्रायोगिक नाट्य प्रस्तुति में अभिनय के लिए मिला है. उनकी सबसे बड़ी चुनौती? ''मिलान से चला तो पारा -4 था और कोचीन में उतरते ही 30 डिग्री. पर जितनी ज्यादा चुनौती, काम में उतनी ही खूबसूरती निखरती है.’’

गौरतलब है कि 400 से ज्यादा नाटकों में से चुने गए 10 का मंचन 19 से 24 मार्च को दिल्ली के कमानी और श्रीराम सेंटर सभागारों में हुआ, जहां पांच दिग्गज निर्णायकों की टीम ने 13 श्रेणियों के विजेताओं का चुनाव किया. श्रेष्ठ अभिनेत्री का तमगा जीतने वाली दुशा (30) की अदाकारी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने समथिंग लाइक ट्रुथ के चार मोनोलाग्स में से एक निभाया.

वडोदरा के बेस्ट बेकरी कांड की जाहिरा शेख से प्रेरित 20 मिनट के इस एकालाप में दुशा ने 16 साल की जमीरा के मनोविज्ञान को पकड़कर उसकी जबान साध ली, देहभाषा के पूरे डीटेल्स के साथ. एआइ, एटेंशन स्पैन और ध्यान भटकने के दुनिया भर के तर्क उन 20 मिनटों में दर्शकों के लिए बेमानी हो गए. और वे खुद अगले दिन आराम या दिल्ली दर्शन की बजाय राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में महान विभूतियों की कलाकृतियां देखते पाई गईं.

पूर्वा नरेश के बहुचर्चित और नौ श्रेणियों में नामांकित म्यूजिकल चांदनी रातें को साउंड और म्यूजिक डिजाइन (कैजद घेरड़ा) के अवार्ड से ही संतोष करना पड़ा. इसकी नायिका नास्तेन्का के रोल में ठुमरियों-सी गायिकी में गिरिजा ओक गोडबोले ने उम्दा काम किया है. पर सबसे ज्यादा चार तमगे बांग्ला प्रस्तुति जे जानलागुलोर आकाश छिलो को मिले.

नायिका सोमा के रोल में तूर्णा दास नामांकित न होने के बावजूद श्रेष्ठ अभिनेत्री (साझा) आंकी गईं. यह नब्बे के दशक में सोमा समेत कलकत्ता के चार दोस्तों के अपने बचपन को याद करने की कहानी है: राजनीति, रोमांस और उनकी अपनी चेतनाओं में गुंथी हुई. सौरभ पालोधि इसी के लिए श्रेष्ठ निर्देशक और स्टेज डिजाइनर आंके गए. श्रेष्ठ मौलिक स्क्रिप्ट का खिताब मिथ्यासुर के प्रणय पांडे के साथ मलयालम की प्रस्तुति धूमि किता किता धूमि के नाटककार ओ.टी. शाजहां ने साझा किया.

ये प्रस्तुतियां देख सचमुच लगा, जैसा कि फेस्टिवल के प्रोड्यूसर संजॉय के. रॉय कहते भी हैं, ''हिंदुस्तानी रंगमंच की ये प्रतिभाएं किस्सागोई की सीमाओं को आगे, और आगे खींचकर ले जा रही हैं.’ के चलते अस्पताल में हैं. अवार्ड मेरी खातिर उनके संघर्ष पर मुहर है.’’

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