आपकी फिल्म कटहल किस बारे में हैं?
यह कॉमेडी ड्रामा असली घटनाओं पर आधारित है. एक एमएलए के चोरी हुए दो कटहल खोजने के लिए पूरी पुलिस फोर्स लगी है. इसमें रोमांस भी है, सोशल मैसेज भी और यह एक पॉलिटिकल सटायर भी है. मेरे लिए महिमा के किरदार का डायलेक्ट पकड़ना बहुत मुश्किल रहा. इसके लिए मैं ग्वालियर जाकर कुछ दिन रही. वहां एक महिला पुलिस के साथ वक्त बिताया और उन्हें ऑब्जर्व करके इस किरदार को क्रैक किया.
अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी से फोटोग्राफ में काम के दौरान आपने क्या सीखा?
दरअसल नवाज जो भी किरदार निभाते हैं, वैसे दिखने लगते हैं. फोटोग्राफ में उनके लुक में कोई चेंज नहीं था. वे जैसे हैं वैसे ही उसमें थे पर उनकी पर्सनैलिटी एकदम शांत थी. वो हमेशा अपने किरदार रफी जैसे दिखते थे. हम दोनों एक ही जिम में जाते थे. फोटोग्राफ का शूट खत्म हुए हफ्ता भर बीता था.
जिम में वे नवाज ट्रेडमिल पर थे. मैंने सोचा हेलो कर लेती हूं. तो देखा एकदम अलग ही लुक. न वे नवाज थे, न ही रफी. खासे डरावने से. मैंने पूछा, ''सर, आजकल क्या चल रहा है?’’ उन्होंने कहा, ''सैक्रेड गेम्स का शूट चल रहा है.’’ तब समझ आया. किरदार के अनुरूप वे शक्ल और हावभाव बदल लेते हैं.
दंगल में काम के दौरान आमिर खान से भी कुछ सीखा होगा.
उन्होंने सिखाया कि किसी कैरेक्टर के लिए तैयारी करना कितना जरूरी है. दंगल में हमने एक साल तक रेस्लिंग की. स्क्रिप्ट और डायलॉग पर काम किया. वह मेहनत स्क्रीन पर हमें दिखती भी है. बतौर ऐक्टर वह मेरे लिए एक नियम बन गया कि होमवर्क और अच्छी तरह से मेहनत किए बगैर किसी सेट पर नहीं जाना है. यह नहीं कि बिना स्क्रिप्ट पढ़े सेट पर पहुंच गए. यह मैंने दंगल के दौरान आमिर खान से सीखा.
आपने दो बड़े डायरेक्टर्स विशाल भारद्वाज और अनुराग बसु के साथ काम किया है. दोनों के काम के तरीके में क्या अंतर देखा?
पटाखा के दौरान विशाल जी के साथ हफ्तों रिहर्स किया. पूरी तरह से तैयार होने पर ही हम सेट पर गए. वहां सेट पर हमें बिल्कुल टाइम नहीं लगता था. यहां तक कि सेट के बाहर भी मैं छुटकी ही थी. दूसरी ओर अनुराग सर कभी भी कुछ भी बदल सकते हैं. उनके सेट पर आप तैयारी करके नहीं जा सकते. यह दिखाता है कि अपने ऐक्टर्स पर वे बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं.
—अनुभव.

