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रिंग में अब छाई रिंकू की रंगत

डब्ल्यूडब्ल्यूई के उनके फैन आजकल उन्हें वीर महान के नाम से जानते हैं, लेकिन बेसबॉल के खिलाड़ी रहे रिंकू सिंह तो हमेशा से अपने डैडी के लाडले रहे हैं.

रिंकू सिंह को उनकी शेर-सी दहाड़ के लिए जाना जाता है. प्रतिद्वंद्वी को वे गर्दन से ऐसे दबोचते हैं कि उसे दिन में तारे दिख जाएं
रिंकू सिंह को उनकी शेर-सी दहाड़ के लिए जाना जाता है. प्रतिद्वंद्वी को वे गर्दन से ऐसे दबोचते हैं कि उसे दिन में तारे दिख जाएं
अपडेटेड 8 अगस्त , 2022

करण मधोक

बचपन को याद करते हुए रिंकू सिंह बातचीत की शुरुआत करते हैं. वे हैरान रहते थे कि उनके पिता अमूमन घर पर क्यों नहीं दिखते. दिन बीतते, फिर हफ्ते, महीने गुजर जाते. रिंकू तब उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के एक गांव होलपुर में एक कमरे के घर में अपने लंबे-चौड़े परिवार में बड़े हो रहे थे. इंडिया टुडे से जूम पर बातचीत में रिंकू कहते हैं, ''लेकिन मैं जब बड़ा हुआ तो समझा कि हमारे परिवार में वे इकलौते हैं जिनसे हमें तीन वक्त भोजन, सिर पर एक छत मिला हुआ है.

तब मैंने तय किया कि अपने मां-बाप की जिंदगी बेहतर बनाऊंगा. मुझे कभी बाहर के किसी से प्रेरणा की दरकार नहीं पड़ी. वे ही मेरे हीरो हैं.’’ रिंकू के पिता ट्रक ड्राइवर थे. उनकी कई रातें सड़कों पर ही गुजरती थीं, अक्सर उत्तर भारत के उबड़-खाबड़ और ऊंच-नीच वाली सड़कों पर जूझना पड़ता था.

जल्दी ही रिंकू भी सफर पर निकल पड़े. पहले उन्होंने भाला फेंक (जेवेलिन थ्रो) आजमाया, फिर बेसबॉल थ्रो करने लगे, और अब वे कुश्ती के पहलवानों को रिंग से बाहर फेंकते हैं. रिंकू रिंग में वीर महान हैं, दुनिया में पेशेवर रेसलिंग की सबसे प्रभावी संस्था वर्ल्ड रेसलिंग इंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) में पहुंचने वाले कुछेक भारतीयों में से एक हैं. अब वे खूंखार हुंकार, अपनी लंबी लटों और दाढ़ी, माथे पर त्रिपुंड और प्रतिद्वंद्वियों को पस्त करने वाले घुमावदार जकड़न के लिए जाने जाते हैं.

किशोर उम्र में ट्रैक ऐंड फील्ड स्पर्धाओं में करियर बनाने की रिंकू की राह में एक अहम मोड़ तब आया, जब बेसबॉल आधारित रियलिटी टीवी शो मिलियन डॉलर आर्म में वे दूसरे प्रतिद्वंद्वियों से 37,000 ज्यादा अंक हासिल कर पाए. अपने पिता की तरह रिंकू को भी काम और मौके जड़ से उखाड़ ले गए. उन्हें और दूसरे नंबर के दिनेश पटेल को बेसबॉल की ट्रेनिंग के लिए अमेरिका जाना पड़ा.

पिट्सबर्ग पाइरेट्स के लिए खेलते हुए रिंकू ने इतिहास रच दिया. वे अमेरिका में पेशेवर बेसबॉल खेलने वाले पहले भारतीय बन गए. रिंकू और पटेल की कहानी 2014 में आई फिल्म मिलियन डॉलर आर्म के साथ बड़े परदे पर बेहद शानदार बन गई. दोनों ने ही काफी देर बाद बेसबॉल की ओर रुख किया था, और आखिरकार, इस परीकथा जैसी कहानी का अंत आ गया.

पटेल भारत लौट आए और राष्ट्रीय स्तर के जेवेलिन थ्रो खिलाड़ी बन गए. इस बीच, रिंकू सिंह ने ऑस्ट्रेलिया और डोमिनिकन रिपब्लिक में छोटी-मोटी लीग में शिरकत करने के बाद एक और छलांग लगाई. उन्होंने 2018 में पेशेवर कुश्ती की दुनिया में पांव रखने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूई के करार पर दस्तखत किया और इस तरह 'डायमंड’ से 'स्क्वायर्ड सर्किल’ में चले गए. 

अपनी जिंदगी के सफर के बारे में रिंकू कहते हैं, ''मेरा उद्देश्य हमेशा समाज की मदद करना रहा है. मैं 33 साल का हूं और यह मेरा तीसरा करियर है. जब तक मैं अपने देश, उसकी संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व करने के काबिल हूं, करता रहूंगा.’’ रिंकू के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी शारीरिक बनावट को बदलना था.

वे अपेक्षाकृत लंबे (6 फुट 3 इंच) तो हमेशा से हैं, मगर रिंग में सबसे ताकतवर पहलवानों से भिड़ने के लिए उन्होंने अपना वजन 125 किलो तक बढ़ाया. ''यह वजन बढ़ाने और शरीर को एक खास सांचे में ढालने जैसा था. मेरी राय में खाना बड़ा मुश्किल भरा था, और ट्रेनिंग अलग किस्म की थी.’’

''आसान तो कतई नहीं था.’’ वे हंसते हुए कहते हैं, ''लेकिन मुझे तो करना ही था.’’ शुरू में रिंकू कुश्ती टैग टीम में साथी भारतीय सौरभ गुर्जर के साथ दिखे. गुर्जर 2013 की महाभारत टीवी सीरीज में भीम बने थे. इधर हाल में रिंकू अपने नए अवतार में वीर महान बनकर लुंगी में रिंग में उतरते हैं और प्रतिद्वंद्वी को पहले नमस्ते कहते हैं, फिर दहाड़ते हैं.

पेशेवर कुश्ती—और खासकर डब्ल्यूडब्ल्यूई—भारतीय दर्शकों में दशकों से लोकप्रिय है. हालांकि तकनीकी तौर पर यह 'खेल’ नहीं है, फिर भी डब्ल्यूडब्ल्यूई के कार्यक्रम भारतीय स्पोट्र्स चैनलों पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रमों में है, इसके ऊपर तो बस क्रिकेट और कबड्डी का नंबर है. इसीलिए डब्ल्यूडब्ल्यूई अतीत में भारतीय मूल के कई सुपरस्टार पेश कर चुका है, जिसमें ग्रेट खली (दलीप सिंह राणा) और जिंदर महाल (युवराज सिंह धेसी) प्रमुख हैं. रिंकू सिंह यही उम्मीद करेंगे कि वीर ही बड़े नामों की सूची में अगला होगा.

वे कहते हैं, ''आखिरकार यह सफर अच्छी जगह ले जाने वाला है. शायद चैंपियनशिप बेल्ट लेकर भारत लौटूं. शायद (दिग्गज पहलवानों) ब्रॉक लेसनर या रोमन रेन्स के साथ रिंग में उतरूं, क्योंकि भारतीय फैन यही देखना चाहते हैं.’’

फिलहाल तो रिंकू अपने ब्रांड में इजाफा करना जारी रखेंगे, ताकि इस नए करियर को आगे बढ़ाते रहें, अपने पिता को गर्व से सिर उठाने का मौका देते रहें. वे याद करते हैं कि मां की मृत्यु के बाद अपने पिता से कितना जुड़ गए, कितना कुछ उनकी जिंदगी के सफर से सीखना शुरू किया.

''मैं उनसे पूछा करता, 'सुपरमैन जैसा दिखना कैसा होता है? मुझे पक्का यकीन है कि आप थका महसूस कर रहे हैं, आपको लगता है कि सब कुछ छोड़ दें? फिर आपको क्या चलाए रखता है?’ उनका जवाब था, 'तुम, तुम लोग मुझे चलाए रखते हो.’’

कुश्ती के करिश्माई

भारत के वे पेशेवर पहलवान जिन्होंने किया रिंग पर राज

टाइगर अली सिंह: टाइगर जीत सिंह के बेटे टाइगर अली नब्बे के दशक में डब्ल्यूडब्ल्यू एफ में उतरने से पहले न्यू जापान प्रो-रेसलिंग दोजो की ओर से लड़ते थे

महाबली शेरा और रिंग का किंग: इंपैक्ट रेसलिंग (पहले टीएनए के नाम से मशहूर) ने 2011 में भारत में नए ढंग की एक पेशेवर कुश्ती प्रतियोगिता रिंग का किंग करवाई थी, जिसमें महाबली शेरा (अमनप्रीत सिंह रंधावा) को वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन चुना गया था.

दारा सिंह: भारतीय पहलवानों के गॉडफादर दारा सिंह रंधावा एशियाई पेशेवर रेसलिंग के हलकों में अपने दबदबे के लिए जाने जाते थे. पचास के दशक में लू थेज, किंग कांग स्जाया, जॉर्ज गोर्डेंको और ऐसे ही दूसरे नामी पहलवानों से उनके मुकाबले चहुंओर चर्चा में रहे

द ग्रेट खली: बॉडी बिल्डिंग मिस्टर इंडिया के विजेता रह चुके दलीप सिंह राणा ने डब्ल्यूडब्ल्यूई स्टार बनने से पहले कई रेसलिंग सर्किट्स में अपना कमाल दिखाया था. वे डब्ल्यूडब्ल्यूई की वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप बेल्ट जीतने वाले पहले भारतीय हैं.

कविता देवी: हरियाणा की इस पूर्व वेटलिफ्टर और पावर लिफ्टर तथा डब्ल्यूडब्ल्यूई में उतरने वाली पहली भारतीय महिला ने 2016 में पेशेवर पहलवान बनने का फैसला किया

जिंदर महल: रिंग में पगड़ी और शेरवानी पहनकर उतरने वाले इस भारतीय-कनाडाई (गामा सिंह के भतीजे) पहलवान को अपनी पंजाबियत पर बड़ा नाज रहा. उन्होंने 2017 में डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियनशिप बेल्ट जीती

द ग्रेट गामा: उर्फ गुलाम मोहम्मद बख्श दत्त और रुस्तमे हिंद गामा उन शुरुआती भारतीय पहलवानों में से थे जिन्होंने  1910 में अंतरराष्ट्रीय रेसलिंग सर्किट में गहराई के साथ अपनी छाप छोड़ी

सतनाम सिंह भामरा: भामरा 2015 में एनबीए के लिए चुने गए और बास्केटबॉल की दुनिया में इतिहास बनाया. 2021 में ऑल एलीट रेसलिंग (एईडब्ल्यू) के लिए साइन किए जाने पर उन्होंने खूब स्लैम डंक (खास किस्म के शॉट) लगाए.

सांगा: 2013 में आई महाभारत सीरीज में भीम की भूमिका के लिए मशहूर सौरभ गुर्जर ने रिंग का किंग से शुरुआत की और फिर बाद में उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यई ज्वाइन किया.

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