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...के जी जानता है

गायिका कविता सेठ अ सुटेबल बॉय में गजल गायिकी, चुनिंदा काम करने, पुनर्विवाह और लॉकडाउन में ध्यान पर.

कविता सेठ
कविता सेठ
अपडेटेड 13 नवंबर , 2020

• अ सुटेबल बॉय में तब्बू के पचास के दशक के किरदार सईदाबाई के लिए आपकी गाई गजलों की काफी चर्चा है. मीरा नायर ने आपको क्या ब्रीफ दिया था?
मीरा जी रेकॉर्डिंग में खुद बैठीं. गजलों के समय, माहौल और भावों के बारे में बताती जा रही थीं, जैसे यहां थोड़ा रोमांस, यहां दर्द चाहिए. नूरजहां की गाई दाग की गजल लुत्फ वो इश्क...में उन्होंने कहा कि जी (चढ़ाव के साथ) जानता है तुम नूरजहां के अंदाज वाला ही रखो, बाकी कविता सेठ के मॉडर्न अंदाज में. दोनों की ब्लेडिंग करने में खासी मशक्कत हुई, पर शुक्र है कि लोगों को पसंद आई.

• बरेली से दिल्ली, फिर मुंबई. लंबे संघर्ष के बाद सिनेमा में 15 साल के करियर के बावजूद आपने चुनिंदा गाने ही गाए हैं. क्या मौके कम मिले?
मैंने वही गाने गाए जिनमें पोएट्री और संदेश दोनों थे. हीरे तो कम ही होते हैं (हंसते हुए), आर्टिफिशियल भरा पड़ा है. हिमेश रेशमिया ने हुक्का बार गाने को मना करने का आज तक अफसोस नहीं. जब तक गाना मेरी रूह में न उतरे, मेरी रग रग से न बहे, तब तक उसमें वह रंग नहीं आता. और इंडस्ट्री हम लोग ही तो हैं. मैंने तो ठाना है कि किसी को कोसने की बजाए मैं तो अच्छा करूं.

• लॉकडाउन कैसा बीता आपका?
यह वरदान बन गया मेरे लिए. विपश्यना की और ओशो का तानदेन ध्यान लगाया. बहुत स्ट्रांग हो गई. इस बीच अपने पॉडकास्ट मैं कविता हूं के लिए गालिब, मीरा, कबीर, कुंवर बेचैन, खुशबीर सिंह  'शाद’ वगैरह को कंपोज कर लिया है. शायरों, क्लासिक कविता और श्रोताओं के बीच मैं सेतु बनना चाहती हूं.

• दस साल पहले पति के निधन के बाद दो बच्चों की परवरिश और करियर का संघर्ष. कैसे गुजरा वह दौर?
मैंने पॉजिटिवली लिया. सेठ साहब की पहली बरसी पर आनंद उत्सव नाम से सेलिब्रेट किया. अब भी पुण्यतिथि पर निर्वाण नाम से आयोजन करती हूं. संयोगवश 2015 में एक अच्छे दोस्त मिले, जैन मारवाड़ी धर्मेश कुमार बोथरा. उनकी पत्नी का निधन हो चुका था. हम एक-सी मनोदशा में थे. हमने शादी कर ली. 2-3 वाकए ऐसे हुए थे, कोई भी मुंह उठाए चला आ रहा है. पार्टियों में जाती नहीं तो कोई फ्रेंड सर्कल भी नहीं था. सुरक्षा को देखते हुए लगा कि निर्णय सही था.

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