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दमदार रोल मिलते कहां हैं?

कोंकणा सेनशर्मा अपनी नई फिल्म डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे और बॉलीवुड में सुकून वाला काम मिलने पर.

कोंकणा सेनशर्मा
कोंकणा सेनशर्मा
अपडेटेड 30 सितंबर , 2020

• आपने ट्वीट किया कि ''अरसे बाद एक उम्दा रोल मिलने के लिए शुक्रगुजार’’ हैं आप. सुकून वाले रोल मिलने इतने मुश्किल हैं?
अच्छा बताइए, मुझे ज्यादा किरदारों में और क्यों नहीं देखा आपने? कुछ अच्छे रोल जरूर किए हैं मैंने पर डॉली जैसे रोल अक्सर नहीं आते. शुक्रगुजार हूं कि अलंकृता श्रीवास्तव और एकता कपूर इस तरह का सिनेमा बना रही हैं और उसके साथ हैं. जब आप मुख्य धारा के नियम-कायदों से हटकर फिल्में बनाते हैं, तो उसमें आपको पैसे बहुत नहीं मिलते.

• आपका मानना है कि आप बेभाव रीट्वीट करने वालों में से हैं. उस सामग्री से आपके सियासी रुझान का भी पता लगता है. आपको इससे डर नहीं लगता?
मैं आदतन बेताब-अधीर रही हूं. आजकल कुछ भी कहने से पहले दो बार सोचती हूं क्योंकि देश में अलग-अलग मत वालों की बात सुनने के लिए सहनशीलता का रत्ती भर भी माहौल नहीं रह गया है. कई तो मन की बात कहने से भी डरते हैं. मुझे भी घबराहट-सी होती है. पर इधर-उधर कुछ बोलकर खुद को हल्का न करूं तो अपनी ही नजर में गिर जाऊंगी.

• कोविड के चलते मिले ब्रेक के दौरान आपने कोई किताब पढ़ी?
मैंने तारा वेस्टोवर की एजुकेटेड और तयारी जोन्स की ऐन अमेरिकन मैरिज पढ़ी. पिछले साल डैडी का इंतकाल हो गया था. गम के ऐसे लम्हों में जॉन डिडियन की ईयर ऑफ मैजिकल थिंकिंग पढ़कर बहुत सुकून मिला.  अब एलिना फरांते की नई किताब शुरू करनी है. लेकिन लॉकडाउन का इस्तेमाल मैंने अपने घुंघराले बालों से लाड़ करने, पैरेलल पार्किंग सीखने  और थोड़ा-बहुत कुकिंग में किया. बचाए गए एक भारतीय श्वान को मैंने गोद लिया है.

• आपने डेथ इन द गंज (2016) फिल्म निर्देशित की थी. कोई और फिल्म लिखने/ निर्देशित करने की योजना है?
जल्दी फिल्म बनाने को मैं अपने ऊपर किसी भी तरह का दबाव नहीं डाल रही हूं. कुछ लिखने की कोशिश कर रही थी लेकिन लॉकडाउन के दौरान वह काम भी बहुत चैलेंङ्क्षजग हो गया है. इस बीच उक्वमीद कर रही हूं कि कुछ अच्छे रोल ही मिल जाएं.

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