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थोड़ा और जोश की जरूरत

भारतीय फुटबॉल पिछले कुछ हफ्तों से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. कप्तानी और टीम के प्रदर्शन पर कप्तान सुनील छेत्री से बातचीत.

सुनील छेत्री
सुनील छेत्री
अपडेटेड 2 अक्टूबर , 2019

भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान सुनील छेत्री से शैल देसाई की बातचीत, पेश हैं अंशः

भारत ने हाल ही में एशियन चैंपियन कतर को गोल-रहित नतीजे में बराबरी पर रोक दिया. उसके बाद से टीम का मूड कैसा है?

हमने एक घंटे से कुछ अधिक समय तक शानदार फुटबॉल खेला लेकिन पूरे समय तक उसे बरकरार नहीं रख सके. फिर भी 90 मिनट तक विरोधी टीम के हमले को रोके रखना बड़ी बात है.

वह कौन सा खास गुण है जो कोच इगोर स्टिमैक ने आने के बाद टीम में पैदा किया है?

हर किसी—खासकर युवा खिलाडिय़ों—में यह विश्वास पैदा करना कि वे बेहतर कर सकते हैं. हम पीछे से गेंद को आगे की तरफ बढ़ा रहे हैं और दबाव में भी अब हम हड़बड़ाते नहीं हैं. यह सब कोच की वजह से संभव हुआ है. वे बहुत जोशीले हैं और खिलाडिय़ों को भी उसी दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं.

वर्ल्ड कप के इन क्वालीफाइ मैचों में आपका यथार्थपूर्ण लक्ष्य क्या है?

हम दो मैच खेल चुके हैं. एक में हमने दिखाया कि हम तीन अंक हासिल कर सकते थे. दूसरे में हमने एक अंक चुरा लिया जिसमें हमें कुछ भी हासिल होने की उम्मीद नहीं थी. आप यह कभी नहीं बता सकते कि नतीजा क्या होगा. हमें अपनी पूरी क्षमता से खेलकर अगले चरण में पहुंचने की कोशिश करने की जरूरत है.

आप उन खिलाडिय़ों के लिए क्या कहना चाहेंगे जो आपकी जगह पहुंचना चाहते हैं?

अगर उन्हें मेरा स्थान हासिल करना है तो उन्हें खेल के हर पहलू में मुझे पीछे छोडऩा होगा. मैं खेल के हर पहलू का मजा लेता हूं, यहां तक कि मैदान से बाहर की चीजों में भी. मैं जब फुटबॉल की पिच पर होता हूं तो मुझे बहुत खुशी मिलती है.''

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