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मशहूर हो रही तापसी आखिर क्या चाहतीं थी जो मिला नहीं?

अब ऐसी जिंदगी चाहिए कि खुशी से दिन गुजरे, डिप्रेशन न हो, अच्छी नींद आए.

तापसी पन्नू
तापसी पन्नू
अपडेटेड 7 फ़रवरी , 2018

अभिनेत्री तापसी पन्नू से हुई बातचीत के अंश

कॉमर्शियल हिट फिल्म का सपना जुड़वां-2 से पूरा हो ही गया.

यह बात सही है कि मैं एक ऐसी कॉमर्शियल हिट फिल्म चाहती थी जिसमें गाना-बजाना हो, मौज-मस्ती हो. अभी मेरी एक रोमांटिक फिल्म दिल जंगली रिलीज होने वाली है. मैं बेहद गंभीर और कॉमेडी रोल्स के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रही हूं.

डेविड धवन कितना बड़ा रोल निभाते हैं आपके करियर में?

वे मेरे लोकल गार्जियन हैं. बिना ऑडिशन के मैंने उनके निर्देशन में अपनी पहली हिंदी फिल्म चश्मेबद्दूर की थी. डेब्यू के बाद कामयाब फिल्म जुड़वां-2 की. यह योगदान है. वे हर हफ्ते मुझे फोन करते हैं और हाल-खबर लेते हैं.

अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार के साथ काम करने में फर्क क्या लगा?

इन दोनों कलाकारों के साथ अलग-अलग तरह के अनुभव रहे हैं. अक्षय खासे जागरूक कलाकार हैं. उन्हें पता है कि किन मुद्दों पर फिल्म बननी चाहिए. वे हर फिल्म में हीरो नहीं बनना चाहते. उन्होंने मुझे टाइटल रोल दिया. वे एक लड़की को हीरो बनाते हैं. वहीं अमिताभ अपने एक-एक शॉट पर मेहनत करते हैं. अपने डायलॉग को लेकर तैयारी करते हैं. उनके जज्बे की मिसाल मिलना सचमुच मुश्किल है.

आज के समाज को आप भी पुरुषवादी मानती हैं?

इस तरह का समाज हमेशा रहेगा, पूरी तरह से कभी खत्म नहीं होगा. बावजूद इसके धीरे-धीरे बदलाव भी दिख रहा है. पुरुष और महिलाओं की सोच में बदलाव आ रहा है. दोनों के बीच संतुलन हिला हुआ है, यह बात अब लोगों ने मान ली है. इस तरह से जागरूक होना बदलाव का पहला कदम है. मैं भी अपनी जिंदगी में इस मुद्दे को अपने ढंग से आगे ले जाने की कोशिश कर रही हूं.

जिंदगी जीने के अंदाज में कोई बदलाव आया है?

प्लान बनाना बंद कर दिया है. चाहती थी वह मिला नहीं. बस, एक फिल्म, फिर दूसरी फिल्म...रोज जैसे बेमन से काम करना हो. उत्साह नाम की चीज नहीं. अब ऐसी जिंदगी चाहिए कि खुशी से दिन गुजरे, डिप्रेशन न हो, अच्छी नींद आए.

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