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क्या ललित मोदी की वापसी से बदलेगी आरसीए की तस्वीर

राजस्थान क्रिकेट संघ में ललित मोदी की वापसी से राज्य क्रिकेट में उम्मीदें जगीं. वही बीसीसीआई ने संघ को बर्खास्त कर नया विवाद छेड़ दिया है.

अपडेटेड 19 मई , 2014
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) ने 7 मई को राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) की सदस्यता को निलंबित करके क्रिकेट की राजनीति में नया विवाद छेड़ दिया है. इसके एक दिन पहले ही आरसीए ने ललित मोदी को अपना नया अध्यक्ष चुना था. संघ के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष महमूद आब्दी ने बोर्ड के फैसले को मनमाना बताते हुए उसके कार्यवाहक अध्यक्ष शिवलाल यादव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए.

आब्दी कहते हैं, ‘‘हमें उनसे निष्पक्ष फैसले की उम्मीद थी लेकिन उन्होंने श्रीनिवासन की कठपुतली की तरह काम किया और आरसीए को काफी नुकसान पहुंचाया है. आप किसी व्यक्ति की सदस्यता तो मुल्तवी कर सकते हैं लेकिन पूरे राज्य संघ का निलंबन   हास्यास्पद है.’’ इसका सबसे दुखद पहलू यह है कि बीसीसीआइ के टूर्नामेंट में आरसीए के चुने गए खिलाडिय़ों के खेलने पर पाबंदी है.

दूसरी ओर, पांच साल बाद आरसीए के अध्यक्ष बने मोदी ने 7 मई को ही अपनी नवनिर्वाचित टीम को लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया. वे मार्च 2009 के चुनाव में हार गए थे. आब्दी और दूसरे उपाध्यक्ष अमीन पठान समेत 24 सदस्यों की अपनी नई टीम से उन्होंने कहा कि बीसीसीआइ की पाबंदियां ज्यादा दिन नहीं टिकेंगी, इसलिए आरसीए को मजबूत करने में जुट जाना चाहिए.

मोदी की वापसी से राजस्थान क्रिकेट बिरादरी में उम्मीद जगी है कि इससे क्रिकेट को फायदा होगा. हालांकि राजनैतिक तौर पर यह भी साफ है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उन्हें क्रिकेट से बाहर राज्य प्रशासन में दखल की इजाजत नहीं देंगी, जैसा कि कांग्रेस उन पर पहले आरोप लगा चुकी है. 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोदी के प्रति सख्ती दिखाई थी. अब नई सरकार ने खेल विभाग को निर्देश दिया है कि न मोदी के पक्ष में कुछ करना है न विरोध में.

मोदी के वफादार और कानूनी सलाहकार आब्दी को उम्मीद है कि उनकी भारत वापसी में कोई समस्या नहीं होगी. मोदी ने भी अपनी जीत के ऐलान के बाद कहा कि उन्होंने श्रीनिवासन के खिलाफ अपना दम दिखा दिया है. मोदी पहले भी कह चुके हैं कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उनकी भारत वापसी आसान हो जाएगी. हालांकि अपने ट्वीट से वे बीजेपी नेता अरुण जेटली और नरेंद्र मोदी के सहयोगी अमित शाह को नाराज करके अपने लिए कुछ मुश्किलें भी बढ़ा चुके हैं.

लेकिन केंद्र से कांग्रेस की विदाई को भांप जांच एजेंसियों का रुख भी उनके प्रति थोड़ा नरम हुआ है. प्रवर्तन एजेंसियों ने उनके खिलाफ नियमों के उल्लंघन के कई आरोप लगाए थे. अब इन एजेंसियों का मानना है कि मोदी के खिलाफ गंभीर अपराध के पुख्ता सबूत नहीं हैं.

मोदी और उनकी टीम को बीसीसीआइ में फिर से सक्रिय होने के लिए बेशक, कई कानूनी पचड़ों से गुजरना होगा. लेकिन इसके पहले अपने पांच साल से कम के कार्यकाल में मोदी ने राजस्थान में राज्य क्रिकेट को एक अलग पहचान दी थी. मोदी ने उसके बाद आइपीएल की स्थापना की और राजस्थान रॉयल्स टीम का गठन किया था.

हालांकि उनके अचानक उत्थान और तेजतर्रार शैली ने राज्य में कई लोगों को उनके खिलाफ कर दिया. वे भारत से बाहर गए तो राज्य में उन सभी लोगों की कलई खुल गई जो खुद को उनकी बराबरी का मानते थे. वैसे मोदी को वापस आने के बाद खुद को क्रिकेट तक ही सीमित रखना होगा, ताकि वे राजे पर बोझ न बनें. लेकिन उनके विरोधी कहते हैं कि मोदी भला ऐसा संयम कैसे बरत सकते हैं?
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