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कान्हा के ब्रज में

कृष्ण की स्थली मथुरा-वृंदावन बनी सैलानियों का ठिकाना. कोई आस्था से यहां आ रहा है तो किसी को तलाश है सुकून की

अपडेटेड 10 सितंबर , 2013
जगह,मथुरा का कृष्ण जन्म स्थान मंदिर. समय दोपहर के 11:30 बजे. यहां-वहां छितरी श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ एकाएक सीढिय़ां चढ़ते हुए मुख्य मंदिर की ओर बढऩे लगती है. दस मिनट बाद आरती जो शुरू होनी है. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उसी को निहारने के लिए इंतजार कर रही है. इस भीड़ में विदेश से आए पर्यटकों से लेकर स्थानीय निवासी और सुकून की तलाश में पहुंचे लोग भी हैं. दिल्ली से आए 28 वर्षीय युवा वैभव भी इनमें शामिल हैं. माथे पर तिलक लगाए और धोती-कुर्ता पहने वैभव गुडग़ांव की आइटी कंपनी में मैनेजर हैं.

समय निकालकर वे अक्सर मथुरा का चक्कर लगा लेते हैं. इसके पीछे की वजह? काम की भाग-दौड़. वर्क फ्रॉम होम और स्मार्टफोन पर दिन-रात की मारामारी उन्हें घेरे रहती थी. वीकेंड भी काम करते गुजरता. लंबी छुट्टी मिल नहीं सकती थी, इसलिए सुकून के वास्ते दिल्ली के पास के किसी ठिकाने पर जाने की बाबत  सोचा. नेट पर सर्च करते हुए ध्यान मथुरा-वृंदावन पैकेज की ओर गया और सिलसिला शुरू हो गया. उन्हीं के शब्दों में, ''ब्रज आकर अच्छा लगा. आध्यात्मिकता और आधुनिकता का संगम देखने को मिला. '' ऐसा सोचने वाले वैभव अकेले नहीं हैं.

यही वजह है कि ब्रज भूमि (मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव और कृष्ण से संबंधित दूसरे स्थल) आने वाले पर्यटकों की संख्या में सालाना 3-5 फीसदी का इजाफा हो रहा है. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के पर्यटन अधिकारी डी.के. शर्मा बताते हैं, ''सालाना डेढ़ करोड़ पर्यटक ब्रज भूमि के भ्रमण पर आते हैं. ''

कान्हा की ब्रज भूमि
हरी-भरी छटा से भरपूर मथुरा नगरी धार्मिक पर्यटन के अलावा आध्यात्मिकता और सुकून के कुछ लम्हे गुजारने के लिहाज से उम्दा जगह है. कान्हा की यह नगरी दिल्ली से 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां कृष्ण से जुड़े स्थलों की कोई कमी नहीं है लेकिन श्री कृष्ण जन्मस्थान वाला मंदिर खास आकर्षण है. यहां जन्माष्टमी के मौके पर भव्य आयोजन होता है. श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा बताते हैं, ''यहां आने वाले लोगों की संख्या हर साल बढ़ रही है. कुछ पर्यटन के लिए आते हैं तो कुछ भक्ति-भाव से. उद्देश्य चाहे जो हो लेकिन वे बांके बिहारी के मोहक रूप के दीवाने होकर ही लौटते हैं. '' कपिल मानते हैं कि कि यहां आने वाले लोगों में युवाओं की संख्या बढ़ी है.
मथुरा के साथ-साथ गोवर्धन और वृंदावन भी पर्यटकों में काफी लोकप्रिय हैं. हर साल आषाढ़ पूर्णिमा पर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के लिए लोगों का हुजूम टूट पड़ता है.    

फैमिली ट्रिप के लिए भी मथुरा-वृंदावन सर्कल को एकदम फिट माना जाता है. डी.के.शर्मा कहते हैं, ''धार्मिक नगरी होने की वजह से यहां फैमिली हॉलिडे काफी पॉपुलर है. यहां आश्रमों में बने थ्री स्टार गेस्ट हाउस में 800-1,000 रु. में कमरा मिल जाता है. खाना भी यहां घर जैसा रहता है, जो आधुनिकता के रंग में रंगे लोगों को काफी अच्छा लगता है.''

उत्तर प्रदेश की इस धर्मनगरी में पर्यटकों की आवाजाही बढऩे की मुख्य वजह लोगों के अपने घरों से निकलने को लेकर बढ़ते रुझान को माना जा सकता है. वैभव कहते हैं, ''रुटीन लाइफ से हम लोग थक जाते हैं. ऑफिस में कई तरह के प्रेशर और रोज का ट्रैफिक तथा आपाधापी. ऐसे में कुछ रिलीफ तो चाहिए ही. ''

ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत से ही पर्यटक यहां आते हैं बल्कि विदेशी सैलानियों का हुजूम भी यहां देखा जा सकता है. कोई बरसाने की होली के लिए यहां आता है तो कोई जन्माष्टमी के आयोजन में शामिल होने के लिए. कई लोग तो ऐसे हैं जो कृष्ण प्रेम में ब्रज की गलियों को भूल नहीं पाते. ऐसे ही प्रेमपाश में ऑस्ट्रेलिया की ग्रेस फंसी हैं. वे पिछले तीन साल से लगातार मथुरा आती हैं. अब तो उन्होंने टूटी-फूटी हिंदी भी सीख ली है, खड़ी बोली के लहजे वाली. पेशे से आर्किटेक्ट ग्रेस बताती हैं, ''मुझे ब्रज बहुत अच्छा लगता है. बहुत शांति मिलती है यहां. मुझे यहां नाश्ते में मिलने वाली कचौडिय़ां और जलेबी भी पसंद हैं. '' उनकी कोशिश रहती है कि वे हर साल होली के मौके पर यहां हों. लेकिन पिछली बार ऐसा नहीं हो सका, इसलिए वे इस बार जन्माष्टमी के आयोजन में  शामिल होने आ पहुंचीं. ब्रजभूमि का चटपटा नाश्ता और मलाईदार लस्सी यहां आने वाले देसी-विदेशी सैलानियों में खूब पसंद की जाती है.

ब्रज भूमि के मुख्य ठौर-ठिकाने
ब्रज भूमि आने वाले सैलानी दो तरह के हैं. एक वे जो विशुद्ध धार्मिक पर्यटन या सिर्फ घूमने के लिए आते हैं दूसरे जो आगरा जाते समय मथुरा-वृंदावन को अपने प्लान में शामिल कर लेते हैं. आगरा यहां से 50 किमी की दूरी पर है, ऐसे में एक पंथ दो काज हो जाता है. डी.के. शर्मा बताते हैं, ''हर किसी की अपनी प्लानिंग होती है. मसलन, कई लोग कोकिलावन-गिरिराज की परिक्रमा और बांके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं. कुछ लोगों का और बड़ा प्रोग्राम होता है. '' मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर और विश्राम घाट हैं जबकि वृंदावन में भगवान कृष्ण का प्राचीन बांके बिहारी मंदिर, राधारमण मंदिर, केशी घाट और राधा गोविंद मंदिर काफी लोकप्रिय हैं.

इनके अलावा गोवर्धन पर्वत, राधाकुंड और कुसुम सरोवर भी मशîर हैं. यही नहीं, बदलते समय के साथ यहां मंदिरों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है वृंदावन में इस्कॉन मंदिर के बाहर तो भारतीय परिधानों में विदेशी सैलानियों का तांता हमेशा देखा जा सकता है, जबकि मनोरंजन के इच्छुक सैलानी वृंदावन के प्रेम मंदिर और माता वैष्णो देवी मंदिर भी जाने लगे हैं.

देश-दुनिया से सैलानी साल भर यहां आते हैं. वीकेंड पर तो यहां खासा हुजूम देखने को मिलता है. सड़क से बेहतरीन कनेक्टिविटी, ढेरों रेलगाडिय़ां और आगरा हवाई अड्डे से करीबी मथुरा-वृंदावन को सैलानियों के लिए ड्रीम डेस्टिनेशन में तब्दील कर देती है. तभी तो लोग जब चाहे यहां आ सुकून के लम्हे गुजारते हैं. महाकवि सूरदास ने ठीक ही लिखा था, ऊधो मोहे ब्रज बिसरत नाहीं.    

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