करोड़पति से खानाबदोश! पत्रकार रहीं सुनीता नाइक की दास्तान सचमुच बड़ी ही दर्द भरी है. इस पर से परदा पिछले हफ्ते उस वक्त उठा जब मुंबई के एक दंपती ग्रेगरी और क्रिस्टिन मिसकीटा ने उन्हें और उनकी पॉमेरियन डॉग शशि को अपने विले पार्ले स्थित घर में शरण दी. 65 वर्षीया सुनीता मशहूर मराठी पत्रिका गृहलक्ष्मी की संपादक रही हैं. पिछले दो महीने से वे वर्सोवा में आराम नगर गुरुद्वारे के बाहर एक फुटपाथ पर रह रही थीं.
सुनीता के पास वर्ली इलाके में कभी दो फ्लैट थे और पुणे में एक बंगला था. मुंबई के रसूख वाले लोगों में उनका उठना-बैठना था. कुछ साल पहले उनकी नौकरी क्या गई, सब कुछ बदल गया. उन्होंने प्रॉपर्टी के धंधे में हाथ आजमाने की कोशिश की पर वहां वे कुछ लोगों के चंगुल में फंस गईं. उधार चुकाने के चक्कर में गाड़ी, मकान सब बिक गए. बकौल सुनीता, ''मेरे एकाउंट में 50 लाख रु. से ज्यादा थे. मुझे शक है कि मेरे कर्मचारियों में से एक मोहतरमा ने वह हड़प लिया. उनके खिलाफ मुकदमे में वकील को देने के भी पैसे मेरे पास नहीं हैं.”
सुनीता की कहानी एक अखबार में छपी तो कई शुभचिंतक शरण देने को तैयार हो गए लेकिन उनकी कुतिया को कोई भी साथ ले जाने को तैयार न था. वे बोलीं, ''मैं शशि को कैसे छोड़ सकती हूं? पिछले 12 साल से वह मेरी साथी है.” लेकिन मिसकीटा दंपती के पास दस कुत्ते पहले से थे, सो उन्हें कोई समस्या न हुई. अंतत: सुनीता को एक छत मिल गई.
एक करोड़पति संपादक सड़क पर
सुनीता नाइक की दास्तान सचमुच बड़ी ही दर्द भरी है. नौकरी गई और प्रॉपर्टी के धंधे में लुटने के बाद कभी करोड़पति संपादक रहीं सुनीता पहुंचीं फुटपाथ पर

अपडेटेड 10 सितंबर , 2013
Advertisement
Advertisement
