इस साल सितंबर-अक्तूबर में श्रीलंका में हुए टी20 वर्ल्ड कप में अपनी एक झलक दिखलाकर गायब हो गए टीम इंडिया के सबसे अनुभवी स्पिन गेंदबाज को मौके-बेमौके महज प्रयोग में तब्दील करके रख दिया गया है. टेस्ट क्रिकेट में 406 विकेट ले चुके 32 वर्षीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह अब कप्तान एम.एस. धोनी की पहली पसंद नहीं रह गए हैं.
उनसे पहले स्पिन गेंदबाज प्रज्ञान ओझा और आर. अश्विन की सफल जोड़ी ने अपनी जगह बना ली है. दोनों ही 26 साल के हैं और जूनियर क्रिकेट के दिनों से साथ खेल रहे हैं. इस जोड़ी ने छह मैचों में 86 विकेट लिए हैं. ऐसी उपलब्धि किसी भी भारतीय स्पिन जोड़ी के खाते में नहीं है. दोनों में बस एक फर्क अपनी पसंदीदा फुटबॉल टीम को लेकर है—ओझा बार्सिलोना के फैन हैं जबकि अश्विन मैनचेस्टर युनाइटेड के दीवाने!
अनिल कुंबले और कपिल देव के बाद भारत के सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट लेने वाले 'टर्बनेटर’ हरभजन को टीम में तीसरे स्पिन गेंदबाज के तौर पर रखा गया है. यह जगह भी उन्हें इसलिए मिल सकी क्योंकि लेग स्पिनर अमित मिश्र, पीयूष चावला और राहुल शर्मा का दावा कमजोर पड़ गया. अगर आखिरी 11 में हरभजन का चयन हो भी गया है, तो इस बात की उम्मीद कम ही है कि धोनी उन्हें पर्याप्त मौके देंगे.
भारतीय टीम के पूर्व ऑफ स्पिनर इरापल्ली प्रसन्ना मानते हैं कि अच्छे प्रदर्शन का दबाव होने की वजह से हरभजन को पॉजिटिव बातों पर ध्यान देना चाहिए. वे कहते हैं, ''उन्हें कोशिश करके याद करना चाहिए कि उन्हें इतने विकेट कैसे मिले. फिलहाल वे तीसरे स्पिनर हैं और यह जानना दिलचस्प होगा कि उन्हें टीम में कैसी भूमिका मिलती है. उनके पीछे 400 विकेट का इतिहास खड़ा है, फिर भी हम नहीं जानते कि वे 100 मैच वाली श्रेणी में कब शामिल होंगे.” इंग्लैंड के खिलाफ सिरीज से पहले हरभजन ने कुल 98 टेस्ट खेले थे.
अहमदाबाद में हुए पहले टेस्ट में जब ओझा और अश्विन अपने बीच 13 विकेट बांट रहे थे, उस समय हरभजन मैदान के बाहर पीली बिब और ड्रिंक होल्डर लिए खड़े थे. हर बार ओझा या अश्विन में से कोई एक विकेट लेने के बाद उछलता और कैमरे हरभजन के उदास चेहरे की ओर मुड़ जाते. टेलीविजन की स्क्रीन पर उनका चेहरा नजर आता.
हरभजन ने यह अनुरोध किया था कि उन्हें टीम इंडिया के तैयारी कैंप में भेजने की बजाए अभ्यास के लिए रणजी ट्रॉफी का दूसरा राउंड खेलने दिया जाए. पर बीसीसीआइ ने सैद्धांतिक आधार पर इसकी इजाजत नहीं दी. ओपनर मुरली विजय और अशोक डिंडा को जब रणजी के तीसरे राउंड में खेलने के लिए टीम इंडिया के मैनेजमेंट ने आजाद कर दिया, तब भी हरभजन को सब्स्टिट्यूट के तौर पर टीम में रखा गया.
भारतीय टीम में बाएं हाथ के ऑफ स्पिनर रहे मनिंदर सिंह कहते हैं कि हरभजन को धीरज रखना होगा. उन्होंने कहा, ''मैं हरभजन को सिर्फ एक ही सलाह दे सकता हूं और यही हमें बिशन सिंह बेदी (महान स्पिन गेंदबाज) भी दिया करते थे—गेंदबाजी जारी रखो.”
पिछले कुछ माह के दौरान हरभजन एसेक्स के लिए इंग्लिश काउंटी क्रिकेट और मुंबई इंडियंस के लिए साउथ अफ्रीका में चैंपियंस लीग खेल चुके हैं और पंजाब की ओर से घरेलू क्रिकेट में भी मामूली सफलताएं हासिल कर चुके हैं. विडंबना यह है कि अपने करियर में मील के पत्थर को छूने के कगार पर खड़े हरभजन सिंह की कामयाबी अकेले उनके प्रदर्शन पर ही नहीं टिकी है. अब यह दूसरों की नाकामी से काफी गहरे से जुड़ी है.

