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वस्त्रनगरी में शतरंज का जादूगर

भीलवाड़ा के एक माहिर ने कम उम्र में ही लगाया उपलब्धियों का अंबार. अब नजरें शतरंज विश्व चौंपियन बनने पर.

अपडेटेड 13 अक्टूबर , 2012

कहते हैं न कि पूत के पांव पालने में ही दिखाई पड़ जाते हैं. इसी कहावत को फिर साबित किया है वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के इंटरनेशनल ग्रांड मास्टर 23 वर्षीय युवा अभिजीत गुप्ता, जिन्होंने 12 सितंबर को तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित शतरंज ओलंपियाड में पुरुष वर्ग में रजत पदक जीतकर देश को इस स्पर्धा में 16 वर्ष बाद पदक दिलाया है. इससे पहले 1996 में दिव्येंदु बरुआ ने शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीता था.

बात 1995 की गर्मियों की छुट्टी की है. बैंक अधिकारी पिता अजय गुप्ता को शतरंज खेलते देख नन्हे अभिजीत को भी उसका शौक चढ़ गया. अजय बताते हैं, ‘‘वह पड़ोस से अपने से बड़ी उम्र के एक लड़के को बुला लाता, उसे शतरंज सीखने की किताब पढ़ाता और खुद उसके साथ खेलता. अभि ने 1996 में सात साल की उम्र में ही बीकानेर में 18 वर्ष आयु वर्ग की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर पहले/दूसरे चरण में पिछले साल के उपविजेता और विजेता को मात दे दी. सनसनी क्यों न फैलती! इसके बाद ही इस बालक का जीवन शतरंज के लिए समर्पित हो गया. पिता और मां अंजना गुप्ता ने भी खुद को बेटे के शतरंज कैरियर के लिए समर्पित कर दिया.

पांच महीने बाद अभिजीत ने चेंबूर (मुंबई) में 8 वर्ष आयु वर्ग में नेशनल चौंपियनशिप का खिताब लेकर स्वर्ण पदक जीतने का सिलसिला ही शुरू कर दिया. 2005 में इंटरनेशनल मास्टर और 2008 में इंटरनेशनल ग्रांड मास्टर बने इस नन्हे शातिर ने 13 वर्ष 10 दिन की आयु में नेशनल जूनियर चौस चौंपियनशिप (अंडर 19) जीतकर सबसे कम उम्र में यह खिताब जीतने का नेशनल रिकॉर्ड बनाया, जो अब तक कायम है.

अभि ने जीवन के पहले टूर्नामेंट सरीखा वाकया 2005 में फिर दोहराया. इंग्लैंड के नामी और विश्वकप के फाइनलिस्ट नाइजल शॉर्ट भारत आए थे. अभि ने उनके साथ बाजी ड्रॉ खेली. नाइजल को चेस बेस्ट डॉट कॉम को उसके कसीदे पढऩे पड़े.

वर्ष 2012 उनके लिए ढेर सारी कामयाबियां लेकर आया है. ओलंपियाड में रजत से पहले वे ग्रीस में आयोजित कवाला इंटरनेशनल ओपन, फिलाडेल्फिया इंटरनेशनल ओपन (अमेरिका), एशियन टीम चौंपियनशिप (चीन) में स्वर्ण पदक और एशियन ब्लिट्ज टीम चौंपियनशिप (चीन) में दो रजत पदक जीत चुके हैं.

कॉमनवेल्थ और एशियाई स्तर के 23 पदक उनके खाते में दर्ज हैं. शतरंज का मौजूदा राष्ट्रीय चौंपियन भी भीलवाड़ा का यह युवक ही है. ओलंपियाड के प्रदर्शन से 13 रेटिंग प्वाइंट हासिल करने के बाद सर्वश्रेष्ठ 2667 प्वाइंट पर पहुंचे अभिजीत ने इंडिया टुडे से कहा कि उनका लक्ष्य वर्ष के अंत तक रेटिंग प्वाइंट 2700 तक पहुंचाना है. विश्वनाथ आनंद को अपना आदर्श मानने वाले अभि के लिए खुद आनंद ने कहा था कि ‘‘इस बालक में मुझे भारत के शतरंज का भविष्य नजर आता है.’’

खेल के बूते अभि भारत पेट्रोलियम में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर हैं. कंपनी ने 16 वर्ष की आयु में ही उन्हें साथ जोड़ लिया था. फिर 18 वर्ष का होने पर उन्हें आधिकारिक रूप से नियुक्ति दे दी गई. अभी इंटरनेशनल मास्टर विशाल सरीन सहित कई विदेशी विशेषज्ञों से कोचिंग ले रहे ‘अभ्यि ने प्रारंभिक गुर भीलवाड़ा शतरंज संघ के सचिव कैलाश गार्ड से सीखे थे. शुरू के चार साल तक कोच रहे गार्ड बताते है, ‘‘अभि के पिता पांच बजे बैंक से छूटते ही बेटे को लेकर मेरे घर आ जाते और 2-3 घंटे यहीं बिताते. वह जल्द ही विश्व चौंपियन बन जाए तो मुझे हैरत न होगी.’’

अभिजीत की कोचिंग का खर्च पहले तो परिजनों ने ही उठाया. अब यह जिम्मा भारत पेट्रोलियम और चौस फेडरेशन मिलकर उठा रहे हैं. पिता अजय बताते हैं कि पुरस्कारों से मिलने वाला पैसा भी वे ट्रेनिंग पर ही खर्च कर रहे हैं. अभिजीत ने सफलता के शुरुआती झंडे तो गाड़ दिए हैं, लेकिन उनका पूरा बचपन और जवानी भी तो इसी के नाम कुर्बान हो गई.

चेसबोर्ड से इतर कोई हॉबी? तपाक से जवाब आता है, ‘‘इतना वक्त ही कहां मिलता है? रोजाना 7-8 घंटे शतरंज का अभ्यास करता. इस खेल में कामयाबी के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ होना जरूरी है, सो रोज दो, ढाई घंटे व्यायाम को देने पड़ते हैं. हां, समय मिलता है तो टीवी पर फुटबॉल देख लेता.’’

अमूमन सालभर में 9 महीने बाहर और तीन महीने गृहनगर भीलवाड़ा में गुजारने वाले ‘‘अभ्यि के अपने शहर में चार-पांच दोस्त हैं, वे भी नर्सरी से आठवीं तक साथ पढऩे वाले. ‘‘उन्हीं के साथ कभी-कभार एकाध मूवी देख आता.’’ पढ़ाई उनकी नवीं तक ही हो पाई है. स्नातक उन्होंने हाल ही पत्रकारिता में पत्राचार से किया है.

शादी का इरादा? ‘‘तीन-चार साल तो बिलकुल नहीं.’’

भीलवाड़ा के होनहार राष्ट्रीय चौस चौंपियन अभिजीत गुप्ता की राष्ट्रीय वरीयता पांचवीं, एशियन वरीयता चौदहवीं, विश्व रैंकिंग सौंवीं और  एफआइडीई (फिडे) रेटिंग 2654 है. उनकी उपलब्धियों से राजस्थान में अब शतरंज के प्रति खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.  -

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