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सुरक्षित ठिकाना अब खतरे में

जंग के दौरान विमानन, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसे यूएई की ग्रोथ से जुड़े स्तंभ सीधे निशाने पर आए. ऐसे में इस देश का निवेशकों के साथ किया गया स्थिरता का वादा डांवाडोल नजर आ रहा है

संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में पहली मार्च को हमले का शिकार एक वेयरहाउस
अपडेटेड 22 अप्रैल , 2026

दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा के बाद संयुक्त अरब अमीरात में जिस शांति की उम्मीद थी, वह क्षणभंगुर निकली. युद्धविराम लागू होने के चंद मिनटों बाद तड़के ही अबू धाबी के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित हबशान गैस कॉम्प्लेक्स पर हमला हुआ.

19 मार्च के बाद इस जगह पर यह तीसरा हमला था. हमले से लगी आग को जल्द ही बुझा लिया गया लेकिन तब तक तीन लोग घायल हो चुके थे, जिनमें दो अमीराती और एक भारतीय शामिल था. कई लोगों के लिए यह एक सबक है कि स्थिति कितनी जल्दी बदल सकती है.

अमीरात की तरफ से पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा कि देश ने ''एक ऐसी जंग में जीत हासिल की जिससे हम पूरी शिद्दत से बचना चाहते थे.'' साथ ही उन्होंने आगाह भी किया कि केवल युद्धविराम ही उन गहरे खतरों को खत्म नहीं कर पाएगा जो अस्थिरता पैदा कर रहे हैं.

दुबई के वित्तीय बाजार ने युद्धविराम पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और शुरुआती कारोबार में 6.7 फीसद उछला, जो करीब छह साल में इसकी एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त थी. वहीं, दुबई के मनखूल स्थित अपने दो-बेडरूम वाले अपार्टमेंट की बालकनी में खड़े प्रवासी भारतीय एस. बाबू कतई उत्साहित नहीं थे. दो हफ्ते पहले उनकी लॉजिस्टिक्स कंपनी ने कर्मचारियों की छंटनी कर दी जिससे उनकी नौकरी चली गई, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले रास्ते बंद होने लगे थे.

अंदर, उनके बेटे अपने लैपटॉप पर वर्चुअल क्लास अटेंड कर रहे थे क्योंकि इसने ही स्कूल की जगह ले ली है. उनकी पत्नी ने यह पूछना बंद कर दिया है कि आगे क्या होगा. रेलिंग को पकड़े खड़े बाबू बताते हैं, ''मैं 17 साल से यहां हूं. मेरे बेटे यहीं पले-बढ़े हैं. यह अपार्टमेंट, उनकी पढ़ाई, हमारी जिंदगी, सब कुछ दुबई से जुड़ा है. आप यूं ही यह सब छोड़कर नहीं जा सकते.''

सात अमीरातों (अबू धाबी, दुबई, शारजाह, अजमान, उम अल क्वैन, रास अल खैमा और फुजैरा) के संघ यूएई में बसे 1.1 करोड़ निवासी बाबू की तरह ही मुश्किल हालात से जूझ रहे हैं. यूएई की आबादी में 89 फीसद लोग प्रवासी हैं, जिनमें 40 लाख या 50 फीसद भारतीय हैं. यूएई अब भारत को सालाना मिलने वाले कुल 130 अरब डॉलर के विदेशी रेमिटेंस में करीब 30 अरब डॉलर या 20 फीसद का योगदान देता है.

यही वजह थी, जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज्राएल ने ईरान पर हमला किया तो यूएई में जबरदस्त दहशत का माहौल बन गया. हमले ने उस 'सुरक्षित ठिकाने' वाली छवि को चोट पहुंचने का खतरा उत्पन्न कर दिया है जो इस संघ की पहचान बन चुकी है और जो प्रवासियों के साथ-साथ दुनियाभर की प्रतिभाओं और निवेश को अपनी ओर आकृष्ट करती रही है.

आर्थिक जख्म
आठ अप्रैल को कुछ समय के लिए युद्धविराम लागू होने से पहले तक ईरानी सेनाएं यूएई पर हर रोज 40-50 हमले कर रही थीं. दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का संचालन दो बार रोकना पड़ा क्योंकि ड्रोन हमलों से गिरा मलबा रनवे पर फैल गया था. पाम जुमेरा पर एक पांच-सितारा होटल के सामने के हिस्से के पास हमला हुआ. शेख जायद रोड पर स्थित गगनचुंबी इमारतों की खिड़कियां आसपास हुए हमलों से थर्रा उठीं.

क्रीक हार्बर से लेकर दुबई मरीना तक कई अपार्टमेंट में आग लगी. अबू धाबी, शारजाह और फुजैरा में गिरे मलबे के कारण औद्योगिक क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं सामने आईं, जिससे उन्हें बंद करना पड़ा. दिन में कई बार बैठकों और खाने के दौरान फोन पर अलर्ट आते थे. युद्ध शुरू होने के बाद से यूएई की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने लगभग 550 मिसाइलों और 2,200 से ज्यादा ड्रोनों को रोका है; यह जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) में सबसे बड़ा आंकड़ा है. अधिकारियों के मुताबिक, इन घटनाओं में 11 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हैं.

असर अब आंकड़ों में भी नजर आ रहा है. आमतौर पर प्रति दिन औसत तेल उत्पादन करीब 34 लाख बैरल होता है, जो हालात सबसे ज्यादा खराब होने के दौरान 50 फीसद से ज्यादा नीचे आ गया था; इसकी दो वजहें थीं: होर्मुज जलसंधि का बंद होना और यूएई के बुनियादी ढांचे पर ईरान की तरफ से लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले होना.

विश्लेषकों ने 2026 के लिए यूएई के विकास अनुमानों को संशोधित करके 1.5 से 2.5 फीसद के बीच कर दिया है, जो पहले 4 फीसद से ज्यादा रहने की उम्मीद थी. इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने अपने अनुमान को 4.2 फीसद से घटाकर 1.5 फीसद कर दिया है. इसके लिए उसने विमानन, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में आ रही रुकावटों का हवाला दिया है. ये ऐसे क्षेत्र हैं जो दुबई की अर्थव्यवस्था में खासी अहम भूमिका निभाते हैं.

विमानन इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक है. दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आमतौर पर उड़ान भरने वाले विमानों की कतारें लगी रहती थीं और अब महज चार हफ्तों में यात्री संख्या एक-तिहाई घट गई है. कार्गो शिपमेंट भी घटा है, क्योंकि जहाज होर्मुज के रास्ते जा नहीं पा रहे हैं; इससे आपूर्ति का समय कई दिन तक बढ़ गया, बीमा लागत भी बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है.

शारजाह स्थित एबीसी कार्गो ऐंड कूरियर के ऑपरेशंस मैनेजर नासिर का कहना है कि अब इसका असर आम घरों तक भी पहुंचने लगा है. उनके मुताबिक, ''जो परिवार यहां से जाने वाले हैं, वे सामान घर नहीं भेज पा रहे हैं. कंटेनर बंदरगाहों पर अटके हैं, और समयसीमा के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है.''

पर्यटन क्षेत्र भी गहरे दबाव से गुजर रहा है, जिसने 2025 में दुबई में रिकॉर्ड 1.96 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की मेजबानी की थी. मार्च में कुछ इलाकों में होटलों में कमरों के भरे होने की दर घटकर 60 फीसद के आसपास रह गई, जिसकी वजह से समुद्र तट और शहर के बीचो-बीच स्थित होटलों को कमरों के किराए में 20-40 फीसद तक कटौती करनी पड़ी. अर्थव्यवस्था और पर्यटन विभाग ने 2026 की पहली तिमाही में होटलों की कमाई में 28 फीसद की गिरावट दर्ज की है. पर्यटन स्थलों पर अब कम भीड़ दिख रही है और कुछ कार्यक्रमों का आकार छोटा किया जा रहा है या उन्हें ऑनलाइन माध्यम पर शिफ्ट किया जा रहा है.

रियल एस्टेट बाजार में भी इसी तरह की अनिश्चितता दिख रही है. डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने में कतरा रहे हैं. खरीदार, यहां तक प्राइम इलाकों में भी, अगर पहले से कोई योजना नहीं है तो संपत्ति खरीदने से बच रहे हैं. दुबई लैंड डिपार्टमेंट का डेटा बताता है कि मार्च में दुबई के ऑफ-प्लान मार्केट में लेन-देन 35 फीसद गिर गया. वहीं दूसरी ओर, मौकापरस्त निवेशक कम कीमतों पर संपत्तियां खरीद रहे हैं. वॉल्व्स इंटरनेशनल रियल एस्टेट की सीईओ ऋषिका मिहानी कहती हैं, ''कुछ समय के लिए चीजें थोड़ी धीमी पड़ गई थीं. जो सौदे अटके थे, वे अब फिर आगे बढ़ने लगे हैं, और खरीदार भी लौटने लगे हैं.''

युद्ध के बीच निकाली राह
अब दुबई ने 1 अरब दिरहम (27.2 करोड़ डॉलर) का सहायता पैकेज घोषित किया है, जो 1 अप्रैल से लागू हुआ. इसमें पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और विमानन क्षेत्र से जुड़े व्यवसायों के लिए शुल्क में छूट, किराये में सहायता और विशेष राहत दी गई है. सेंट्रल बैंक ने भी बाजार में नकदी बनाए रखने के उपाय किए हैं ताकि ऋण का प्रवाह जारी रहे. कुछ कंपनियां कर्मचारियों का भरोसा कायम रखने में जुटी हैं. बुर्ज खलीफा और दुबई मॉल बनाने वाली कंपनी एमार किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं करने का वादा किया है. भारतीय अरबपति और डेन्यूब ग्रुप के संस्थापक रिजवान साजन ने कहा है कि उनके 6,000 से अधिक कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलता रहेगा. अन्य क्षेत्रों के व्यवसाय भी डटे हुए हैं; यूएई स्थित क्रिएटिव एजेंसी अल सायेग वर्ल्डवाइड का कहना है कि वह न छंटनी करेगी और न ही वेतन काटेगी.

लेकिन ऐसे आश्वासन सबको नहीं मिलते हैं. प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों प्रवासियों को वेतन रुकने और बोनस घटने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों में भेजे जाने वाले पैसे (रेमिटेंस)—जो वहां परिवारों का सहारा होते हैं—अब कम होने लगे हैं. निर्माण कार्यों की गति धीमी होने से मजदूर पहले से ही दहशत में हैं. बिहार के एक निर्माण श्रमिक राम खिलावन, अपने फोन पर व्हाट्सऐप मैसेज देखते हुए कहते हैं, ''मेरा परिवार भारतीय टीवी पर धमाके देखता है और उन्हें लगता है कि पूरा दुबई जल रहा है. मैं उन्हें बार-बार कह रहा हूं कि मैं सुरक्षित हूं.''

दूसरी तरफ, यूएई के नेता भी लोगों के बीच आकर शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं. पिछले महीने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद को दुबई के मॉल में लोगों से बातचीत करते देखा गया, जबकि उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम एक अन्य जगह लोगों के बीच नजर आए. 'हम सब अमीराती हैं' अभियान के बिलबोर्ड एकता और अपनेपन की भावना पर जोर देते हैं. मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले टेक पेशेवर एजाज अहमद कहते हैं, ''अब दुबई ही मेरा घर है.

जब कोई अलर्ट आता था या कोई जोरदार धमाका सुनाई देता था तो थोड़ी घबराहट जरूर होती थी लेकिन लोगों में कोई अफरा-तफरी या डर नहीं था. यहां ईंधन या रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कोई कमी नहीं है. अपने देश में तो एलपीजी और ईंधन जैसी जरूरी चीजें भी कभी-कभी मुश्किल से मिलती हैं. इसलिए, मैं यहां से कहीं नहीं जा रहा.'' मीडिया सिटी में काम करने वाले एक ब्रिटिश मार्केटिंग कंसल्टेंट का कहना है, ''दुबई ने हमें ऐसे मौके दिए जो हमें कहीं और नहीं मिल सकते थे: करियर में तरक्की, सुरक्षा और बेहतर जीवन स्तर. अगर मैं यहां से चला जाऊं तो मुझे यही लगेगा जैसे मैं फिर जीरो से शुरुआत कर रहा हूं.''

युद्धविराम घोषित होने के बाद यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार गर्गाश ने व्यापक सुरक्षा ढांचे की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें होर्मुज के रास्ते आवाजाही की सुरक्षा के उपाय भी शामिल हों. अब तक, यूएई ने सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप से परहेज किया है, जबकि तनाव घटाने और बातचीत की अपील जारी रखी है. गर्गाश ने संकेत दिया कि उनका देश इसी तरह संयम के रास्ते पर चलता रहेगा और इस अस्थिर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी पुरानी सुरक्षा साझेदारियों पर ही टिका रहेगा. साथ ही, उसने एक नाजुक संतुलन भी साध रखा है.

अब्राहम समझौते के तहत इज्राएल के साथ संबंध होने से उसे आर्थिक और रणनीतिक फायदे तो हुए हैं लेकिन क्षेत्र में जहां लोगों की भावनाएं काफी संवेदनशील हैं, इन रिश्तों को बहुत सावधानी से बरकरार रखने की जरूरत है. यूएई का नजरिया व्यावहारिक है: संबंध बहाल रखना, तनाव बढ़ने से रोकना और बातचीत के रास्ते खुले रखना.

फिलहाल, ज्यादातर लोग अपनी जगहों पर ही टिके हुए हैं और हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए यही इंतजार कर रहे हैं कि यह शांति बनी रहे. विश्लेषकों ने 2026 के लिए यूएई के विकास अनुमानों को संशोधित कर 1.5 से 2.5 फीसद के बीच कर दिया है, जो पहले के 4 फीसद से काफी कम है. 

मजहर फारुकी (दुबई स्थित पत्रकार और द मैज फाइल्स: स्कूप्स, स्कैम्स ऐंड शोडाउन्स के लेखक)

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