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नाजुक संतुलन

पुदुच्चेरी में दोनों पक्षों के गठबंधन नाजुक डोर से बंधे हैं. मगर कांग्रेस-द्रमुक की चुनौती का सामना कर रहे एनडीए को मतदाताओं के बीच मुख्यमंत्री मंत्री एन. रंगास्वामी की लोकप्रियता से फायदे की उम्मीद.

assembly polls: puducherry
पुदुच्चेरी में 30 मार्च को मुतियालपेट निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार वैयापुरी मणिकांदन का प्रचार करते मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी
अपडेटेड 15 अप्रैल , 2026

दरअसल, पुदुच्चेरी की 30 सदस्यों वाली अपेक्षाकृत छोटी विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को होने वाले चुनावों में उस तरह की सीधी टक्कर नहीं दिख रही, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. इस केंद्र शासित प्रदेश के मतदाताओं के सामने अनिश्चित त्रिकोणीय मुकाबला है और सीट बंटवारे से भी उम्मीदवार असंतुष्ट नजर आ रहे हैं.

एक ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) है तो दूसरी ओर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कलगम (द्रमुक). इनके बीच तमिलगा वेत्रि कलगम (टीवीके) भी चुनौती पेश कर रही है. टीवीके के पास भले ही निर्णायक ताकत न हो मगर वह दोनों पक्षों के अहम वोट काटकर खेल बिगाड़ सकती है.

इतने छोटे प्रदेश में किसी को भारी बहुमत बहुत कम ही मिलता है और जीत अक्सर कुछ सौ वोटों से तय होती है. ऐसे में नाजुक डोर से बंधे गठबंधनों के बीच जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि मतदाता किसे बेहतर तालमेल के साथ काम करने वाला मानते हैं.

मुख्यमंत्री मंत्री एन. रंगास्वामी की पार्टी ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (एआइएनआरसी) की अगुआई वाला एनडीए अपने इस दिग्गज नेता पर काफी उम्मीदें टिकाए हुए है. लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता और जुड़ाव चुनावी हिसाब-किताब को पीछे छोड़ देता है. इसी के दम पर वे तीन दशकों में कई सियासी फेरबदल के बावजूद टिके हुए हैं.

इनका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कलगम (अन्नाद्रमुक) और हरित लक्षिया जननायक काच्चि (एलजेके) के साथ गठबंधन है. एलजेके पार्टी लॉटरी कारोबारी के बेटे ने बनाई है और भाजपा ने उसे गठबंधन में शामिल करने पर पूरा जोर दिया था. इस पर काफी खींचतान हुई तथा सीट-बंटवारे का मसला और उलझ गया. काफी मशक्कत के बाद गठबंधन कायम रहा, मगर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.

विपक्ष की हालत तो और मुश्किल भरी रही. कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन में चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस को 16 और द्रमुक को 13 सीटें मिली हैं. मगर यह सीट-बंटवारा एकदम आखिरी समय में ही तय हो पाया और बहुत मनमुटाव हुए. विदुतलै चिरुतैगल काच्चि (वीसीके) सीट-बंटवारे में मतभेद का हवाला देकर इस गठबंधन से बाहर निकल गई.

वह अब अकेले तीन सीटों पर लड़ेगी. कांग्रेस में भी माहौल तनावपूर्ण हो गया जब पूर्व मुख्यमंत्री मंत्री वी. नारायणस्वामी को नामांकन के आखिरी दिन टिकट नहीं मिला. कांग्रेस ने गठबंधन सहयोगियों के लिए छोड़ी सीटों पर नामांकन दाखिल करने की वजह से अपने छह बागी उम्मीदवारों को निलंबित कर दिया.

उनमें पांच अब भी चुनाव मैदान में हैं. 30-सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में इस तरह के नुक्सान को संभाल पाना आसान नहीं होता. ऐसे में इस गठबंधन के नजरिए से इन बागी उम्मीदवारों की बहुत बुरी हार जरूरी है. 

वहीं, सबसे अहम मुकाबला तत्तनचावडी में देखने को मिल सकता है जहां रंगास्वामी को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष वी. वैद्यलिंगम चुनौती दे रहे हैं. वैद्यलिंगम मौजूदा लोकसभा सांसद हैं और दो बार मुख्यमंत्री मंत्री रह चुके हैं.

लोग इस दुविधा में हैं कि नई शुरुआत की जाए या फिर यथास्थिति को बनाए रखा जाए. अभिनेता विजय की टीवीके इसी असमंजस को भुनाने की कोशिश कर रही है. वह सभी 30 सीटों पर अपना पूरा जोर युवा मतदाताओं को लुभाने पर लगा रही जो पुराने चेहरों से ऊब चुके हैं. 2021 के विधानसभा चुनावों में जिन सीटों पर जीत का अंतर कम था, वहां टीवीके को अगर इस बार थोड़े-से भी वोट मिले तो इससे नतीजे पलट सकते हैं.

पुदुच्चेरी के एक सियासी विश्लेषक मुदलवन कहते हैं, ''यह रंगास्वामी को बढ़त देने वाली स्थिति है. कांग्रेस कई मोर्चों पर कमजोर पड़ रही है. पार्टी असरदार नेतृत्व खड़ा करने में नाकाम रही और उसके पास ऐसे नेता भी नहीं हैं जो जातीय वोटों को साध सकें.’’

इस त्रिकोणीय मुकाबले में सभी दल प्रभावशाली वन्नियार समुदाय, ओबीसी वर्गों और दलितों के साथ-साथ मुसलमानों तथा ईसाई अल्पसंख्यकों को भी लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. अब कौन मतदाताओं को यह भरोसा दिला पाने में सफल होता है कि नाजुक डोर से बंधा गठबंधन जरूरी नहीं कि कमजोर सरकार ही दे, नतीजा इसी बात पर निर्भर करेगा.

सबसे अहम चुनावी मुकाबला शासन तक आसान पहुंच के प्रतीक रंगास्वामी तथा अनुभव और अपनी साख पर भरोसा करने वाले वैद्यलिंगम के बीच होने की संभावना. 

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