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इन्फ्रास्ट्रक्चर का नया तोहफा

बजट में दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों  में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष जोर है, जोखिम गारंटी फंड और निवेश ट्रस्ट रियल स्टेट के लिए संभावनाओं के दरवाजे खोलने में मददगार होगा.

Union Budget: metro corridors
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 3 मार्च , 2026

हम लोगों के लिए सरकार के निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र के ताजा प्रस्तावों का असर, शहरों में जिंदगी, कामाकज और निवेश में सहूलत के रूप में दिखेगा. इसी मकसद से बजट में निर्मला सीतारमण शहरी आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) की नई अवधारणा लेकर आई हैं. इसके तहत फोकस दूसरे और तीसरे दर्जे तथा टेंपल-टाउन्स के क्लस्टर पर होगा, जहां एकीकृत आर्थिक क्षेत्र के विकास के लिए हरेक में पांच साल के लिए 500 करोड़ रुपए के समर्पित फंड का प्रावधान किया गया है.

इससे सड़कें, जलापूर्ति, नालियों, परिवहन और सामाजिक सुविधाओं जैसे बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण होगा. सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पार्थ जिंदल के मुताबिक, इससे निर्माण और रियल एस्टेट की अकूत संभावनाएं खुलेंगी. वे कहते हैं, ''इससे आवास, परिवहन और शहरी सेवाओं में इजाफा होना चाहिए.’’

सीतारमण ने लंबी संभावना वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की फंडिंग में जोखिम के मद्देनजर सरकारी नियंत्रण वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड के गठन का प्रस्ताव किया. यह फंड जोखिम भरी निर्माण अवधि के लिए परियोजनाओं को कर्ज देने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को आंशिक गारंटी मुहैया कराएगा. वजह यह है कि देरी, लागत बढ़ने और नियमों के पालन के झमेले से अक्सर परियोजनाएं पटरी सें उतर जाती हैं.

ऐसे में जोखिम का बोझ एक हद तक उठाकर सरकार उम्मीद कर रही है कि इससे निजी डेवलपरों को कर्ज उठाने में आसानी होगी. रियल एस्टेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टार्क इंडिया के एमडी तथा सीईओ अमर सरीन कहते हैं, ''यह रियल एस्टेट क्षेत्र में जोखिम घटाने का एक सार्थक कदम है...सरकारी खर्च के बदले निजी निवेश पर भरोसा का इरादा जाहिर करने से निवेश के वातावरण में स्थायित्व और भरोसा बढ़ेगा.’’

सरकार की रियल एस्टेट ट्रस्टों के जरिए सार्वजनिक क्षेत्र की अतिरिक्त जमीन और इमारतों के मौद्रीकरण की दूसरी कोशिश भी स्वागत योग्य है. आखिरकार वे बाजार में आपूर्ति में इजाफा करेंगे और नए इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सर्वाजनिक धन मुहैया कराएंगे. 
कुल मिलाकर, ये सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.

मसलन, निर्माण के लिए उपकरण तैयार करने के घरेलू उद्यम, इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा. फिर औद्योगिक कॉरिडोर के पास यूनिवर्सिटी टाउनशिप के प्रोत्साहन से निर्माण खर्च में कमी आने की उम्मीद के साथ टैलेंट पूल का भी विकास होगा. केपीएमजी के एक विश्लेषक का कहना है कि सीईआर के तहत कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश से छोटे शहरों में रियल एस्टेट विकास का नया बाजार खुल सकता है.

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