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Odisha Assembly Election: क्या इस बार नवीन पटनायक इतिहास बनाएंगे या बन जाएंगे?

देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने उतरे नवीन पटनायक को भाजपा से मिल रही है कड़ी चुनौती. क्या वे होंगे कामयाब या फिर ओडिशा में 24 साल के उनके शासन का होगा अंत

भुवनेश्वर में रैली के दौरान सीएम पटनायक के साथ पांडियन
भुवनेश्वर में रैली के दौरान सीएम पटनायक के साथ पांडियन
अपडेटेड 3 जून , 2024

मई की 20 तारीख. भुवनेश्वर में सूर्यास्त के वक्त आसमान सुर्ख लाल रंग का दिख रहा है. यह राज्य की राजधानी के बीच में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के रोड शो के रास्ते के किनारे खिले हुए गुलमोहर के पेड़ों की लालिमा से मिलता-जुलता है. हल्की हवा सड़क के दोनों ओर उमड़े समर्थकों के मजमे को उमस भरी गर्मी से राहत दिला रही है.

इस राज्य की पहचान संबलपुरी साड़ियां पहने महिलाएं हरे रंग के बीजद (बीजू जनता दल) के झंडे लहरा रही हैं, जिसके बीच में पार्टी का चुनाव चिन्ह सफेद शंख चमक रहा है. कुछ ने तो उनके कार्डबोर्ड फेस मास्क भी पहन रखे हैं. तीन पंक्तियों में खड़े ढोल वादक ढोल को ऐसे पीट रहे हैं, जैसे इससे ज्यादा आवाज निकालने का मौका फिर नहीं मिलेगा. दूसरी ओर आदिवासी पोशाक में महिलाएं दलखई कर रही हैं, जो फसल कटाई के दौरान का पॉपुलर लयबद्ध लोकनृत्य है.

लेकिन नवीन के लिए इतिहास के ढोल की थाप ज्यादा स्पष्ट है. ओडिशा के पांच बार के मुख्यमंत्री इन भीड़ भरे रोड शो में शामिल होकर वोटों की एक और भरपूर फसल काटने उतरे हैं. उन्हें बीजद और खुद के लिए लगातार छठी बार जीत के साथ सभी चुनावी रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद है. ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों के लिए राज्य की 21 लोकसभा सीटों के साथ ही चुनाव हो रहे हैं.

अगर नवीन जीतकर फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वे देश के विधायी इतिहास में सबसे लंबे समय तक सीएम रहने के पवन चामलिंग के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे. चामलिंग 24 साल और 165 दिनों तक सिक्किम के सीएम रहे. 4 जून को जब नतीजे घोषित किए जाएंगे, तब नवीन मुख्यमंत्री के तौर पर 24 साल और 90 दिन पूरे कर चुके होंगे और उन्हें शीर्ष सम्मान हासिल करने के लिए सिर्फ 73 दिन और चाहिए. लेकिन अगर वे राज्य के चुनाव में बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे तो इतिहास बन जाएंगे क्योंकि 77 साल की उम्र में यह शायद उनका आखिरी चुनाव होगा.

नवीन के लिए ये रैलियां अपनी ताकत दिखाने से कहीं ज्यादा अपना चेहरा दिखाने का एक जरिया हैं. खासकर उस वक्त जब राज्य में उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने उनके गंभीर रूप से बीमार होने, शायद डिमेंशिया से पीड़ित होने और तमिल भाषी आईएएस अधिकारियों के एक समूह के हाथों की कठपुतली बनने की अफवाह फैला रखी है. उनका आरोप है कि वास्तव में यही समूह सरकार चला रहा है.

इस आलोचना का एक बड़ा हिस्सा उनके पूर्व निजी सचिव वी. कार्तिकेय पांडियन पर केंद्रित है, जिन्होंने अक्टूबर 2023 में आईएएस से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफे के बाद उन्हें राज्य के शक्तिशाली 5टी कार्यक्रम का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर राज्य सरकार के सभी प्रमुख विभागों की देखरेख करने का अधिकार दिया गया. पांडियन बाद में बीजद में शामिल हो गए और अब पार्टी के स्टार प्रचारक हैं. उन पर असली मुख्यमंत्री के रूप में काम करने और नवीन के उत्तराधिकारी के रूप में पेश किए जाने का आरोप है.

संबलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे और मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बिना किसी संकोच के पूछते हैं, "नवीन पटनायक कहां हैं? वे केवल वीडियो में दिखाई देते हैं और क्षेत्र में अनुपस्थित रहते हैं. न तो मंत्री और न ही सचिव उनसे मिल सकते हैं. उनकी पार्टी में उनके खिलाफ गुस्सा है क्योंकि वे कार्टेल की गिरफ्त में हैं."

भाजपा की योजना

भाजपा ने 'ओडिया अस्मिता' को बहाल करने को अपना प्राथमिक चुनावी मुद्दा बनाया है और तमिल मूल के पांडियन जैसे 'बाहरी लोगों' को राज्य पर शासन करने से रोकने का संकल्प लिया है. पार्टी ने राज्य में गहरी पैठ बना ली है और बीजद की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में कांग्रेस से आगे निकल गई है. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 38.4 फीसद वोट हासिल कर 2014 में अपनी एक सीट की संख्या को बढ़ाकर आठ कर लिया, जबकि बीजद ने 12 सीटें जीतीं और 42.8 फीसद वोट हासिल किए.

लेकिन भाजपा की जीत का यह सिलसिला विधानसभा चुनाव तक नहीं बढ़ा, जिसमें नवीन ने 2014 की तरह भारी जीत हासिल की. बीजद ने 2019 के विधानसभा चुनाव में 147 में से 112 सीटें जीतीं, जो बहुमत के लिए जरूरी 74 सीटों से 38 ज्यादा थीं.

बीजद अपने वोट शेयर में 1.3 फीसद इजाफा करके 44.7 फीसद करने में भी सफल रहा, लेकिन 2014 के मुकाबले उसे पांच सीटों का नुक्सान हुआ. दूसरी ओर, भाजपा का वोट शेयर 14.5 फीसद इजाफे के साथ 32.5 फीसद हो गया; पार्टी ने 23 सीटें हासिल कीं, जो 2014 की तुलना में 13 ज्यादा थीं. हालांकि बीजद को हराने के लिए उसे इससे तीन गुने से भी ज्यादा सीटें जीतनी होंगी.

मौजूदा चुनाव में भाजपा न केवल राज्य में ज्यादा लोकसभा सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है, बल्कि विधानसभा चुनाव में बीजद को खत्म करने और नवीन को बाहर करने की भी उम्मीद पाले हुए है. इस कोशिश में भाजपा ने नवीन को जलील करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है.

पुरी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार संबित पात्रा ने मंदिर नगरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक कामयाब रोड शो आयोजित करने के बाद नवीन का मजाक उड़ाते हुए इंडिया टुडे से कहा, "नवीन पटनायक अर्ध-देवता बन गए हैं, एक ऐसे देवता जो पलक नहीं झपकाते, न बोलते हैं और न ही सोते हैं. वे पांडियन जैसे पंडों को राज्य चलाने की रस्में निभाते हुए देखते रहते हैं. कम बोलकर वे रहस्य को बनाए रखते हैं और काम न करने के लिए लोग उनके बजाय पंडों की लानत-मलामत करते हैं. लेकिन हम यह पक्का कर देंगे कि नवीन के लिए खेल खत्म हो जाए."

पात्रा की चूक

लेकिन पात्रा का यह अतिआत्मविश्वास उसी दोपहर काफूर हो गया जब उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगवान जगन्नाथ को 'मोदी भक्त' बता दिया. फिर क्या था! बीजद ने तुरंत उन पर हमला बोल दिया. पात्रा की इस हरकत पर नवीन ने एक्स पर लिखा, "महाप्रभु को किसी दूसरे इंसान का भक्त कहना भगवान का अपमान है. इससे करोड़ों जगन्नाथ भक्तों और दुनिया भर के ओडिया लोगों की भावनाओं और उनकी आस्था को ठेस पहुंची है."

माफी मांगने के लिए मजबूर पात्रा ने कहा कि वे भगवान से माफी मांगने के लिए मंदिर के सामने तीन दिन तक उपवास करेंगे. पांडियन ने कटे पर नमक छिड़कते हुए एक समाचार एजेंसी से कहा, "इस गर्मी और धूल में उन्हें अपना ख्याल रखना चाहिए और होश नहीं गंवाना चाहिए."

इस बीच, पीएम मोदी, जिनके कभी नवीन के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध थे और एक महीने पहले ही एक समारोह में उनकी प्रशंसा भी की थी, ने 11 मई को कंधमाल जिले में एक चुनावी रैली में मुख्यमंत्री पर निशाना साधकर सभी को चौंका दिया.

उन्होंने कहा, "राज्य के लोग सीएम से नाखुश हैं क्योंकि वे बिना कागज के टुकड़े को पढ़े सार्वजनिक मंच से राज्य के जिलों और उनकी राजधानियों का नाम नहीं बता सकते. क्या आप अपने बच्चों के भविष्य के लिए उन पर भरोसा कर सकते हैं?"

कुछ लोगों ने उनकी इस टिप्पणी का मजाक उड़ाया क्योंकि जिलों के मुख्यालय होते हैं, राजधानी नहीं. उसी दिन एक अन्य रैली में, नवीन की कथित रूप से शासन करने में अक्षमता और पांडियन के इस कमी को पूरा करने का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "ओडिशा में एक सुपर मुख्यमंत्री है जो लोकतांत्रिक रूप से चुने गए सीएम और विधायकों पर हावी रहता है."

उसी दिन एक वीडियो रिकॉर्डिंग में नवीन ने पलटवार करते हुए कहा, "केवल चुनावों के दौरान ओडिशा को याद करने से आपको मदद नहीं मिलेगी. क्या आपको 2014 और 2019 में किए गए वादे याद हैं?

ओडिशा के लोगों को एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने, दो करोड़ नौकरियां पैदा करने, सभी को मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने, जीएसटी को कम करने और माफ करने का आपका वादा याद है. आप इन सभी अधूरे वादों को भूल गए हैं, लेकिन राज्य के लोग इनमें से किसी को भी नहीं भूले हैं." 29 मई को ओडिशा के बारीपदा की एक रैली में प्रधानमंत्री ने यहां तक आरोप लगा दिया कि नवीन की गिरती सेहत के लिए पांडियन जिम्मेदार हैं.

भले ही भाजपा अपने चुनाव प्रचार में व्यक्तिगत हमले बोल रही हो लेकिन नवीन ने अपनी रैलियों में विकास के अपने ट्रैक रिकॉर्ड, अपनी सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं और एक और कार्यकाल की स्थिति में ओडिशा को देश में शीर्ष रैंकिंग वाला राज्य बनाने के अपने विजन और योजना पर ध्यान केंद्रितत किया है.

भुवनेश्वर रोड शो में प्रचार की यह शैली देखने को मिली. जब उनकी हरे रंग की चुनाव प्रचार बस सफेद शंखों से सजी हुई आई, तो उसका स्वागत पटाखों और रंग-बिरंगे चमकीले कागज के टुकड़ों की बौछार से हुआ. जब हाइड्रोलिक लिफ्ट से नवीन गाड़ी की छत पर पहुंचे तो भीड़ ने जोरदार तालियां बजाईं. अपने खास सफेद खादी के कुर्ते-पाजामे में सजे नवीन ने भीड़ की ओर जोरदार तरीके से हाथ हिलाया और फिर माइक्रोफोन उठाया.

सादगी के साथ

बगैर किसी लफ्फाजी के नवीन ने छोटा और सारगर्भित भाषण दिया और अपने मुख्य चुनावी वादों पर फोकस किया. उन्होंने उड़िया में अपने श्रोताओं से पूछा, "आपको जुलाई से मुफ्त बिजली मिलेगी, क्या आप खुश हैं?" भीड़ से सहमति का शोर उठा. फिर उन्होंने बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना (बीएसकेवाई), जिसके तहत ओडिया नागरिक सर्वश्रेष्ठ निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज करा सकते हैं, के बारे में भी पूछा तो भीड़ ने और ज्यादा शोर के साथ खुशी का इजहार किया.

जब उन्होंने गरीबी घटाने और किसानों की मददगार योजना—कालिया (कृषक असिस्टेंस फॉर लाइवलीहुड ऐंड इनकम ऑगमेंटेशन) के बारे में बात की तो भी ऐसे ही जोरदार उत्साह के साथ जवाब मिला. लेकिन सबसे जोरदार आवाज उस वक्त आई जब उन्होंने विनम्रतापूर्वक पूछा, "क्या नवीन पटनायक अच्छा है?" इसके बाद मुख्यमंत्री ने लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव में मतदान मशीन पर शंख का बटन दबाने के लिए कहा.

नवीन न केवल विरोधियों की आलोचना टाल रहे हैं बल्कि वे वोटों के लिए जाति और धर्म के इस्तेमाल से भी इनकार कर रहे हैं. उनका विश्वास है कि जब आपका काम खुद बोलता है तो उसे बोलने दीजिए. वाकई उनका काम बोलता है. जब नवीन ने पहली बार 5 मार्च, 2000 को मुख्यमंत्री का पद संभाला तो सारी स्थितियां उनकी कामयाबी के खिलाफ थीं. दून स्कूल के छात्र रहे नवीन, जिनके सहपाठी इंदिरा गांधी के छोटे पुत्र संजय गांधी थे, का जन्म और पालन-पोषण ऐशो-आराम की सुविधाओं के साथ हुआ.

उनके पिता दिग्गज हस्ती बीजू पटनायक ओडिशा के मुख्यमंत्री थे लेकिन नवीन राजनीति में आने को कतई इच्छुक नहीं थे. इसके बजाए वे सफल और ऐश्वर्यपूर्ण जीवनशैली में ढल गए थे जिसमें बार-बार विदेश जाना और जैकलीन कैनेडी ओनसिस और माइक जैगर जैसे बड़े और मशहूर लोगों के साथ उठना-बैठना शामिल था. उन्होंने एग्जॉटिक प्लांट (दूसरे माहौल के पेड़-पौधे) और भारतीय इतिहास पर किताबें लिखीं, दिल्ली में बुटीक चलाया और जीवन भर के लिए कुंआरापन अपनाया.

लेकिन 1997 में अपने पिता की मृत्यु के बाद वे उनकी विरासत संभालने को मजबूर हो गए. नवीन ने बीजू जनता दल का गठन किया और कुछ समय के लिए वाजपेयी सरकार में केंद्रीय इस्पात मंत्री के रूप में काम किया. उनकी पार्टी ने भाजपा के साथ गठजोड़ करके 2000 के विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया और कांग्रेस को हराया. नवीन ने मुख्यमंत्री का पद संभाला और हमेशा के लिए दिल्ली की शानदार जिंदगी से मुंह मोड़ लिया.

उस समय ओडिशा को भारत के सबसे गरीब और सबसे पिछड़े राज्यों में माना जाता था. वह अकाल, चक्रवात और भ्रष्टाचार के लिए जाना जाता था. बदलाव के इरादे के साथ नवीन इन चीजों को दुरुस्त करने में लग गए. वैभव छोड़कर उन्होंने गांधीवादी जीवनशैली अपना ली, खादी का कुर्ता पहनने लगे और भुवनेश्वर में अपने पिता के विशालकाय बंगले के बाहर एक आउटहाउस में रहने लगे.

हालांकि वे उड़िया भाषा बहुत सहजता के साथ नहीं बोल सकते थे (उनके आलोचक कहते हैं कि वे आज भी नहीं बोल सकते) लेकिन नवीन ने गंदगी या भ्रष्टाचार के अड्डों, जिन्हें वे 'ऑजियन स्टेबल्स' कहते हैं, की सफाई शुरू कर दी. भ्रष्टाचार पर जोरदार प्रहार किया और विकास पर दृढ़ता के साथ ध्यान दिया. सादगी, गंभीरता, कम से कम बात करने और अधिकतम शासन के नजरिए से उन्होंने सक्षम अधिकारियों को अपना विजन लागू करने के लिए तैनात किया और भ्रष्टाचार में शामिल विधायकों पर सख्ती दिखाई.

सांप्रदायिक राजनीति से छिटकते हुए उन्होंने 2008 में भाजपा के साथ नाता तोड़ लिया. यह कदम उन्होंने लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद संघ परिवार के तत्वों की ओर से कंधमाल में की गई हिंसा में 39 ईसाइयों को मार डालने और 395 चर्चों को जला डालने के बाद उठाया. उनका रुख सही साबित हुआ जब 2009 के विधानसभा चुनाव में बीजद को अपने बलबूते 103 सीटें—दो-तिहाई बहुमत—मिलीं और भाजपा को सिर्फ छह सीटें.

नवीन ने तब से फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. बीजद 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव में अपने बल पर भारी बहुमत लाता रहा है. इस दौरान नवीन ने शासन का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गरीबी 2006 में 63.8 फीसद थी जो अब घटकर 11.07 फीसद रह गई है. राज्य सरकार का अनुमान है कि उसकी योजनाओं के कारण पिछले पांच साल में 62 लाख लोग गरीबी से बाहर आए हैं.

पिछले दो दशक में धान की पैदावार 50 गुना बढ़ गई है—2004 में यह 1 लाख टन थी जो पिछले साल 54 लाख टन हो गई. इससे खाद्यान्न में ओडिशा न केवल आत्मनिर्भर हुआ है बल्कि अन्य राज्यों को बेचने की स्थिति में भी है. राज्य की जच्चा और बच्चा मृत्यु दर में भी अच्छी खासी कमी आई है और प्रति व्यक्ति आय 2012 के बाद से तीन गुनी हो गई है. यह अभी 1.6 लाख रुपए प्रति वर्ष है जो उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे अन्य पिछड़े राज्यों के मुकाबले ज्यादा है. पिछले साल जीडीपी वृद्धि भी 7.8 फीसद के शानदार स्तर पर रही जो 7 फीसद के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है.

राजकोषीय प्रबंधन के मामले में ओडिशा का ऋण और जीडीपी अनुपात 13.1 फीसद है जो देश में सबसे कम है. उसका राजस्व अधिशेष 43,471 करोड़ रुपए है और बाजार से उसने कोई उधार नहीं ले रखा है.

काफी कुछ बढ़ोतरी 2019 में नीति में बदलाव की वजह से हुई है. इसमें न केवल रॉयल्टी हासिल करना बल्कि खनिज संपदा की उचित नीलामी शामिल है. इस वजह से राजस्व में पांच गुना वृद्धि हो गई और नवीन के विशाल कल्याण कार्यक्रमों के लिए धन उपलब्ध हो गया.

2019 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नवीन ने 5टी का विचार पेश किया, जिसका मतलब था टीमवर्क, टेक्नोलॉजी, ट्रांसपैरेंसी ऐंड टाइम लीडिंग टू ट्रांसफॉर्मेशन. उन्होंने इस दिशा में प्रयास की अगुआई करने के लिए पांडियन को चुना, जो उस वक्त उनके प्रमुख सचिव थे. वे इस हकीकत से हिल गए थे कि भाजपा ने राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से आठ पर कब्जा कर लिया था और उसका वोट शेयर अब बीजद के लिए एक गंभीर खतरा बन गया था. उन्होंने नई विकास और कल्याण योजनाओं को तैयार करते वक्त वोट बैंक को ध्यान में रखना शुरू किया. 

वोट बैंक पर नजर

इस तरह उनके विकास के ज्यादातर प्रयास युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित थे, साथ ही उन्होंने समग्र गरीबी को कम करने पर काम किया. उन्होंने युवाओं के लिए शिक्षा और खेल सुविधाओं में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया. लिहाजा, इंग्लिश मीडियम में तालीम देने वाले 315 ओडिशा आदर्श विद्यालय खोलने के अलावा, 8,500 से ज्यादा स्कूलों को अपग्रेड किया गया, हाइस्कूलों में डिजिटल ब्लैकबोर्ड, क्लासरूम के बुनियादी ढांचे और पुस्तकालयों में सुधार और सरकारी स्कूलों में शौचालय बनाए गए.

यह बदलाव 171 साल पुराने पुरी जिला स्कूल में साफ नजर आता है, जिसमें 1,700 स्टुडेंट्स हैं और पिछले दो साल में इसके क्लासरूम को डिजिटल ब्लैकबोर्ड और बेहतर खेल सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया गया है. पुरी जिला स्कूल में जिमनास्टों के लिए एक मुकम्मल प्रशिक्षण केंद्र शामिल है, जहां हमें 12 वर्षीया भूमिका रेड्डी हूप्स या कमर पर छल्ला नचाते हुए नजर आईं. वे ओलंपिक स्टार बनना चाहती हैं.

नवीन की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है ओडिशा को खासकर हॉकी और प्रशिक्षण के लिए देश का प्रमुख खेल केंद्र बनाना. इस राज्य में अब भुवनेश्वर और राउरकेला में दो विश्व स्तरीय हॉकी स्टेडियम हैं, जो पिछले एक दशक में बने हैं; राज्य ने पिछले पांच वर्षों में दो बार हॉकी विश्व कप की मेजबानी भी की है. भुवनेश्वर के कलिंग स्टेडियम को अत्याधुनिक उपकरणों के साथ एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय खेल प्रशिक्षण केंद्र में बदल दिया गया है, जिसमें खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर शामिल हैं.

इस बदलाव को अंजाम देने वाले खेल सचिव और सीएम के विशेष सचिव विनील कृष्ण कहते हैं, "हमने महसूस किया कि विश्व चैंपियन बनाने के लिए अन्य देशों ने एथलीट के प्रदर्शन का अध्ययन करने और उसे बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड कंप्यूटरों का उपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर विज्ञान का इस्तेमाल किया है. ओडिशा के खिलाड़ियों के अलावा, हमारे पास देश भर से एथलीट और खिलाड़ी आते हैं और हमारी सुविधाओं का उपयोग करते हैं."

जब महिलाओं की बात आती है, तो नवीन हमेशा उन्हें सशक्त बनाने में अग्रणी रहे हैं. मिशन शक्ति, जो सन् 2000 में उनके सीएम बनने के तुरंत बाद शुरू हुआ, ने महिलाओं के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है. 2011 में राज्य ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 फीसद सीटें आरक्षित करने वाला कानून पारित किया. 2018 में उन्होंने राज्य की विधानसभा और संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसद सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव पारित करवाया और सुनिश्चित किया कि उनकी पार्टी 2019 और 2024 के चुनावों में इसे लागू करे.

राज्य ने अपने स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) कार्यक्रम के जरिए महिला उद्यमियों को काफी बढ़ावा दिया है. पिछले पांच साल में अकेले 6,00,000 ऐसे समूहों को 40,000 करोड़ रुपए के ऋण वितरित किए गए हैं. इनमें से कई महिलाएं अब अपने परिवारों के लिए रोजी-रोटी कमाती हैं और अपने आप में नेता के रूप में उभर रही हैं. भुवनेश्वर के नए राज्य बस टर्मिनल में देबजानी दास और उनके सहकर्मी एक बेकरी चलाते हैं, जिसमें अन्य चीजों के अलावा बाजरे के लड्डू भी बनाए जाते हैं.

एक पुलिस प्रशिक्षक से विवाहित तीन छोटे बच्चों की मां देबजानी ने कहा कि वे पहले समूह में शामिल नहीं होना चाहती थीं क्योंकि उन्हें बेक करना नहीं आता था. लेकिन कार्यक्रम से मिली ट्रेनिंग के जरिए उन्होंने इस कला में महारत हासिल कर ली और अब वे प्रति माह 10,000 रुपए कमाती हैं. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में वे अपनी आय तीन गुना कर लेंगी. 

ओडिशा में प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती लोकप्रियता और भाजपा के बढ़ते प्रभाव को काटने के लिए नवीन ने केंद्रीय योजनाओं के साथ राज्य की अभिनव कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया है. लिहाजा, नवीन ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सभी टर्शियरी और सेकंडरी देखभाल वाले सरकारी अस्पतालों को नया रूप देने के अलावा, जिसमें उपकरण और दवाएं प्रदान करना शामिल है, 2018 में बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना (बीएसकेवाइ) शुरू की. केंद्र की आयुष्मान भारत योजना के विपरीत, जो बीमा दावों पर आधारित है, बीएसकेवाई के तहत हरेक वयस्क को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का लाभ उठाने के लिए एक कार्ड दिया जाता है, जिसमें राज्य अस्पताल को राशि का भुगतान करता है.

पांडियन फैक्टर

अगर मोदी और भाजपा ने सोचा कि वे अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का भोंपू बजा सकते हैं तो नवीन ने पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के परिक्रमा (परिधि) पथ को नया रूप देकर हिंदुत्व वोट को रिझाया है.

पांडियन की अगुआई में जगन्नाथ मंदिर के चारों तरफ 75 मीटर की परिक्रमा की योजना बनाई गई और मौजूदा इमारतों और बाधाओं को ध्वस्त कर दिया गया, और क्षेत्र को आरामदायक पैदल मार्ग और सुंदर उद्यानों के साथ बदल दिया गया.

नवीन ने इस साल जनवरी में मोदी के अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह करने से कुछ दिन पहले इसका उद्घाटन किया. पांडियन का कहना है कि ओडिशा सरकार के प्रयास धर्मनिरपेक्ष रहे हैं. जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के अलावा राज्य सरकार ने राज्य के 12,393 दूसरे मंदिरों, 1,160 चर्चों और 550 मस्जिदों की दशा सुधारी है.

हालांकि, जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार ने नवीन की हिंदू साख को चमकाया है, पर राम मंदिर निर्माण को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो भाजपा को अधिक आकर्षक बना रहा है. पार्टी ने परिक्रमा परियोजना पर विवाद भी खड़ा कर दिया है. उसने मंदिर के अभिन्न अंग रहे कई ऐतिहासिक मठों को उजाड़ने और बीजद पर हिंदू भावना को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है.

फिर भी यह पांडियन को जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का अपने अंदाज में उपयोग करने से नहीं रोक पाया. हर चुनावी सभा से ठीक पहले मेकओवर के वीडियो चलाने के अलावा, पांडियन अपने भाषण की शुरुआत 'जय जगन्नाथ' के साथ करते हैं, जिस पर भीड़ हमेशा उत्साह से प्रतिक्रिया जताती है.

वास्तव में, पांडियन की चुनावी सभाएं सावधानीपूर्वक कोरियोग्राफ की गई होती हैं. इसके तहत वे अधिकांश विधानसभा सीटों का दौरा करते हैं और नवीन अधिकांश लोकसभा चुनाव रैलियों को संभालते हैं. पांडियन सभी बैठकों में नवीन के काम को सावधानी से प्रोजेक्ट करते हैं और खुद को सीएम का वफादार सैनिक करार देते हैं.

चिल्का में चुनावी रैली के लिए हेलिकॉप्टर से जाते समय पांडियन ने अपने कार्यालय से निर्वाचन क्षेत्र के लिए सरकार की ओर से किए गए सभी कामों का ब्यौरा संकलित करवाया, जिसमें खर्च की गई राशि, प्रमुख मुद्दे और उन्हें सुलझाने के लिए किए गए सभी कार्य शामिल थे, साथ ही उस निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहा, इस पर एक अद्यतन सर्वेक्षण भी शामिल था.

उनके कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले नवीन की प्रशंसा में गीत बजाए जाते हैं और उनकी कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की फिल्में दिखाई जाती हैं. पांडियन के भाषण नवीन के भाषणों से थोड़े लंबे हैं, लेकिन फिर भी सरकार की प्रमुख योजनाओं और सीएम के अपने छठे कार्यकाल के लिए शुरू किए गए नबीन ओडिशा (नए ओडिशा) मिशन पर प्रकाश डालते हैं.

इसमें घरों में मुफ्त बिजली, अगले 10 साल के लिए युवाओं के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का एक अलग बजट, महिलाओं के लिए सफल उद्यमी बनने की खातिर एक लैंगिक बजट और किसानों के लिए 5 लाख रुपए तक के मुफ्त ऋण के साथ ही मुफ्त बिजली शामिल होंगे. आदिवासियों की स्थिति में सुधार के लिए भी कई योजनाएं हैं, जो राज्य की आबादी का 22 फीसद हैं.

न केवल 50 वर्षीय पांडियन के स्टार स्टेटस ने उनकी अपनी पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है, बल्कि वे भाजपा के भी पसंदीदा पंचिंग बैग बन गए हैं. फिटनेस फ्रीक और लंबी दूरी के धावक पांडियन एक दशक से ज्यादा समय से नवीन के करीबी सहयोगी हैं. विडंबना यह है कि वे एक अन्य आईएएस अफसर से राजनेता बने प्यारीमोहन महापात्र के तख्तापलट की कोशिश को विफल करके सुर्खियों में आए. महापात्र नवीन के पिता बीजू पटनायक के करीबी थे.

2000 में नवीन के सीएम बनने के बाद महापात्र उनके राजनैतिक सलाहकार थे और उन्हें 2004 में राज्यसभा सदस्य बनाया गया था. लेकिन जून 2012 में जब नवीन लंदन में थे, उन्होंने बीजद में उनके खिलाफ विद्रोह भड़का दिया. पांडियन, जो उनके निर्वाचन क्षेत्र गंजम में एक कलेक्टर के रूप में कार्य करते समय अपनी दक्षता से नवीन का ध्यान आकर्षित कर चुके थे, ने नवीन को सचेत कर दिया. नवीन अपनी यात्रा अधूरी छोड़कर लौटे और महापात्र को बर्खास्त कर दिया. पांडियन की पत्नी सुजाता कार्तिकेयन, जो खुद आईएएस अफसर हैं और ओडिशा से हैं, मिशन शक्ति के पीछे प्रेरक शक्ति थीं. चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार शुरू होने पर उन्हें प्रभार से मुक्त कर दिया.

बीजद-भाजपा अलग-अलग

पांडियन के केंद्र में आने से भाजपा को नवीन को एक कमजोर और अप्रभावी सीएम के रूप में पेश करने का मौका मिल गया है. यह तब है, जब भाजपा 2024 के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से ठीक पहले सीट-बंटवारे की व्यवस्था के लिए बीजद के साथ गठजोड़ करने के लिए तैयार थी. एक ओर जहां बीजद भाजपा को लोकसभा की अधिक सीटें देने को तैयार था, लेकिन जब भाजपा ने विधानसभा के लिए बड़ी संख्या में सीटों की मांग की तो बातचीत टूट गई.

प्रधान जाहिरा तौर पर बीजद के साथ किसी भी तरह के गठजोड़ के खिलाफ थे क्योंकि उनका मानना था कि राज्य भाजपा में अब नवीन को चुनौती देने और हराने की ताकत है. उनका कहना है कि नवीन की कई कल्याणकारी योजनाएं खराब प्रदर्शन कर रही हैं और अधिकांश विकास राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा करते हुए पुरी, कटक और भुवनेश्वर जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों तक ही सीमित है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवाओं में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है और ओडिशा पलायन का केंद्र बन गया है. नवीन इस बार दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं—गंजम जिले में उनकी पारंपरिक हिंजिली सीट और बलांगीर जिले में कांताबंजी निर्वाचन क्षेत्र. इसे भाजपा इस बात के संकेत के रूप में देख रही है कि इस बार उनकी जीत को लेकर अनिश्चितता है.

लेकिन पांडियन नवीन की घटती लोकप्रियता या सत्ता विरोधी लहर की बात को खारिज करते हैं. वे मार्च 2022 के पंचायत चुनावों का हवाला देते हैं, जब बीजद ने सभी 30 जिलों पर कब्जा कर लिया और 852 जिला परिषद सीटों में से 765 पर जीत हासिल की थी. पांडियन न तो विधानसभा और न ही लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे वे राज्य का दौरा करने के लिए आजाद हैं.

फिर भी बीजद के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है, इसके कई प्रमुख सदस्य मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हो गए, जिनमें छह बार के लोकसभा सदस्य और कटक के सांसद भर्तृहरि महताब और दो बार के सांसद सिद्धांत महापात्र शामिल हैं. बीजद ने दो भाजपा नेताओं—उपाध्यक्ष लेखाश्री सामंतसिंहर और भृगु बक्सीपात्र को पाला बदलने के लिए मजबूर करके जवाबी हमला किया. ओडिशा के एक वरिष्ठ राजनैतिक पर्यवेक्षक कहते हैं, "दोनों पार्टियों से बड़े पैमाने पर दलबदल हो रहा है."

33 फीसद लोकसभा सीटें आरक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए बीजद ने मौजूदा सदस्यों की पत्नियों को चुनाव लड़ने के लिए नामित किया है. इससे मौजूदा सदस्यों की बगावत को रोकने के साथ ही महिला मतदाताओं को आकर्षित करने में मदद मिली है.

दूसरी ओर, नवीन के विपरीत भाजपा के दो दिग्गज, धर्मेंद्र प्रधान और बैजयंत पांडा, जो 2019 में बीजद से अलग हो गए थे, विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी का प्रदर्शन और वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन भाजपा अभी भी सफलता के लिए मोदी पर बहुत ज्यादा निर्भर है. यह सब नवीन को, उनकी साफ छवि और पिछले दो दशकों में ओडिशा के उत्थान के ट्रैक रिकॉर्ड के साथ विधानसभा के दांव में निर्णायक बढ़त देता है. लेकिन हमें 4 जून को पता चलेगा कि नवीन पटनायक इतिहास बनाएंगे या इतिहास बन जाएंगे.

—साथ में अर्कमय दत्ता मजूमदार.

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