खुशी की खोज
बुगुरी कम्युनिटी लाइब्रेरी
स्थापना : 2016
बेंगलूरू
साउथ बेंगलूरू की भीड़भाड़ से दूर बनशंकरी बाजार की एक रिहाइशी गली में तीन किशोर एक स्टोर के सामने इंतजार कर रहे हैं. पास ही नजर आ रहे टिन की छत वाले एक छोटे-से घर का दरवाजा बुगुरी कम्युनिटी लाइब्रेरी का है, और यही वह जगह हैं जहां वे अपने स्कूल के बाद कुछ वक्त बिताते हैं. लगभग चार बजे लाइब्रेरियन पुष्पलता एस. अपने छोटे बच्चे को स्कूटर पर लेकर यहां पहुंच जाती हैं और ग्रिल वाला दरवाजा खोलती हैं. उत्साहित किशोर उनके पीछे-पीछे चलकर लाइब्रेरी में दाखिल हो जाते हैं. थोड़ी ही देर में कुछ और बच्चे भी वहां पहुंच जाते हैं.
कन्नड़ भाषा में बुगुरी का मतलब लट्टू (स्पिनिंग टॉप) होता है और इस लाइब्रेरी की शुरुआत 2016 में एक गैर-लाभकारी संस्था हसीरू डाला ने की थी, जो कचरा बीनने वाले समुदाय के बीच उनके बच्चों के कल्याण के लिए काम करती है. हसीरू डाला में बुगुरी चिल्ड्रन प्रोग्राम के निदेशक सात्विक एन.एन. कहते हैं, ''हम उन्हें कहानियां पढ़ने और सुनाने की आदत डालकर सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा पर जोर देते हैं.’’
दो कमरों वाली यह लाइब्रेरी बच्चों के बनाए चित्रों और अन्य कलाकृतियों से सजी हुई है, जिसमें किताबों से भरी तीन अलमारियां हैं. वालंटियर्स के एक समूह ने बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रखी है, और सत्र में शामिल बच्चे जोर-जोर से अपना पाठ दोहरा रहे हैं. इसके बाद उनकी एक सिंगिग क्लास चलती है और फिर एक नाटक की रिहर्सल भी कराई जाती है.
नौवीं कक्षा की एक छात्रा रमाई कहती है, ''मुझे तो यह जगह अपने स्कूल से भी ज्यादा पसंद है.’’ उसकी सहेली जेसी बताती हैं कि वे पिछले चार साल से यहां रीडिंग के साथ कला और बुनाई की कक्षाओं में हिस्सा ले रही हैं. वे कहती हैं, ''हम यहां जो कुछ भी सीखते हैं, स्कूल जाकर अपने दोस्तों को भी सिखाते हैं.’’
हसीरू डाला संस्था नगर निकायों और कचरा बीनने वालों के बीच एक कड़ी के तौर पर काम करती है ताकि उन्हें पहचान पत्र, न्यूनतम मजदूरी, स्वास्थ्य योजनाओं और आवास जैसे सामाजिक सुरक्षा उपायों का लाभ मिल सके. सात्विक कहते हैं, ‘‘अपने प्रोग्राम के तहत हम कचरा बीनने वालों के बच्चों के बीच काम करते हैं, और यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें स्कूल भेजा जाए.
हम सबसे ज्यादा ध्यान इस पर देते हैं कि बच्चों को कूड़ा बीनने के काम में न लगाया जाए.’’ यहां बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और समर कैंप की भी व्यवस्था है. प्रोग्राम प्राइमरी स्कूल से लेकर 12वीं कक्षा तक के बच्चों के लिए चलाया जाता है. हर शाम जब पढ़ाने-सिखाने से जुड़ी सारी गतिविधियां पूरी हो जाती हैं तो हर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ यह भाव साफ नजर आता है—एक और सुखद दिन बीता.
खुशी के सूत्र
'' मुझे खुशी होती है बच्चों को नए विचार से उत्साहित होते....कूदते देखकर, लगता है वे इसी तरह प्रफुल्लित होने के लिए पैदा हुए हैं’’
—स्वास्तिक एन.एन., डायरेक्टर, बुगुरी चिल्ड्रेंस प्रोग्राम.
—अजय सुकुमारन

