खुशी की खोज : गुरुवाणी
''खुद पर ध्यान केंद्रित कीजिए’’
स्वामी गौर गोपाल दास
जब कभी हमारी मनोदशा नकारात्मक होती है, उस समय अच्छी से अच्छी चीजों से भी सुख और प्रसन्नता नहीं मिलती. और मनोदशा सही हो तो मामूली से मामूली चीजें भी आनंद देती हैं. तो यह मन ही है जो स्वर्ग को नरक में और नरक को स्वर्ग में बदल सकता है. हमें मन को वश में करना और विचारों, भावनाओं और एहसासों पर काबू करना सीखना होगा.
जब हम लगातार दूसरों की ओर देखते हैं या जब दूसरों से हमारी तुलना की जाती है, तो हम अपूर्ण महसूस करने लगते हैं. हमें लगने लगता है कि हम पूर्ण नहीं. पूर्ण महसूस करने और अपने से इतर कोई अन्य होने के प्रयत्न का दबाव और तनाव हमसे हमारे जीवन की प्रामाणिकता छीन लेता है.
मुश्किल तब पैदा होती है जब हम लगातार दूसरों की तरफ देखने लग जाते हैं. जितना अधिक हम दूसरों की जिंदगी की तरफ देखते हैं, उतना ही हमें लगता है कि हमारी अपनी जिंदगी में बहुत खालीपन है. याद रखिए, इस वक्त खुशियों भरी जिंदगी जीने के लिए आपके पास सब कुछ है. खुद पर ध्यान केंद्रित करो.
मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि उस वक्त खुशी की मनोदशा कैसे कायम रखें जब खुश महसूस न कर रहे हों. दिन में हम तरह-तरह की भावनाओं से गुजरते हैं. इसलिए खुश और सकारात्मक होने और हर समय मुस्कराते रहने की जरूरत से बहुत ज्यादा ग्रस्त रहना बंद करें. हर समय मुस्कराने की, खुश होने की कोई जरूरत नहीं.
खुश और सकारात्मक होने का दबाव आपको नकारात्मक और दयनीय बना रहा है. अपनी भावनाओं को पूरी प्रामाणिकता के साथ स्वीकार कीजिए. थोड़ा उदास महसूस करने में कोई हर्ज नहीं, जब तक कि तुम गंभीर और लाइलाज ढंग से हर समय उदास महसूस नहीं करते. दबाव झेलना बंद करें.
दुख-तकलीफ और संघर्ष हम सबकी जिंदगी में हैं और हम सब इनसे गुजरते हैं. कोई मुस्करा रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे संघर्ष नहीं करना पड़ता. अपनी पीड़ा के बारे में कुछ बदलाव ला सकते हैं तो लाना सीखिए. पर यह भी याद रखिए कि ऐसी भी चीजें हैं जिन्हें आप बदल नहीं सकते.
मुस्कराना सीखें, जिसे आप बदल नहीं सकते, उसे स्वीकार कीजिए और उनसे ऊपर उठना सीखिए. आध्यात्मिकता, सजगता और ध्यान इसीलिए अहम हैं. इतना ही महत्वपूर्ण है सचेत ढंग से सांस लेना और अपनी अवस्था में होना है ताकि स्थिति को स्वीकार कर पाएं.
अच्छे पहलुओं को देखने की कोशिश करें और नकारात्मक पहलू से निबटें. दुनिया में कोई भी व्यक्ति आपकी उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकता. चारों ओर विषैले लोग होंगे. अपनी सीमा तय करें, स्पष्ट बोलें और अच्छी तरह अपनी बात कहें. हम सब एक सफर पर ही तो हैं.
खुशी के सूत्र
''हर समय खुश रहने की चाहत एक तरह की सनक है, इस सनक से बचिए. आपके मन के भाव जिस वक्त जैसे हैं, उन्हें पूरी प्रामाणिकता से स्वीकार करें.’’
(स्वामी गौर गोपाल दास लाइफ कोच और मोटिवेशनल स्पीकर हैं)

