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विरासत की नई इबारत

साल 2022 में, पिछले दो दशकों के पहले गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के लिए मार्ग प्रशस्त करने और अभूतपूर्व पैदल जन-संपर्क अभियान शुरू करने के साथ, राहुल ने दिखा दिया कि वे अपने काम को लेकर गंभीर हैं.

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी
अपडेटेड 3 जनवरी , 2023

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राहुल गांधी, कांग्रेस नेता

साल 2019 में कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ते हुए राहुल गांधी ने खेद जताया था कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ सियासी जंग में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला. उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि न तो वे और न ही गांधी परिवार के अन्य दो सदस्य—मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका—पार्टी के अध्यक्ष पद पर काबिज होंगी.

साल 2022 में कांग्रेस के इस 'प्रथम परिवार’ यानी सर्वोच्च परिवार ने दो दशकों के बाद गैर-गांधी पार्टी अध्यक्ष के चुनाव का रास्ता खोलते हुए राहुल ने साबित कर दिया कि वे अपने काम को लेकर बेहद गंभीर हैं. इस प्रक्रिया में राहुल ने न केवल खुद को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर लिया है, बल्कि जाहिरा तौर पर पार्टी की बार-बार की चुनावी हार के दोष से बचने की भी कोशिश की है. उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान कोई प्रचार नहीं किया और गुजरात में केवल दो दिन तक कुछ ही सार्वजनिक रैलियों को संबोधित किया.

इसके बजाए, राहुल ने राष्ट्रीय जनमानस को ऊबा चुकी कांग्रेस की विरासत से खुद को अलग करने की अपनी वर्षों पुरानी योजना पर काम शुरू किया. मई में उदयपुर चिंतन शिविर में राहुल ने, घोटालों के आरोपों से जूझ रहे यूपीए-2 के दौर के नेताओं पर परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए, खुद को कई अन्य कांग्रेसी नेताओं से अलग बताया और दावा किया कि वे मोदी से नहीं डरते क्योंकि वे कभी भी भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं रहे. यह अलग बात है कि उसके एक महीने बाद ही नेशनल हेराल्ड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर राहुल और सोनिया से ईडी की पूछताछ के विरोध में पार्टी सड़कों पर उतर आई.

इस बीच, राहुल एक नए सफर पर निकले हैं—कन्याकुमारी से कश्मीर तक जाती भारत जोड़ा यात्रा का 3,500 किमी पैदल मार्च. आजादी के बाद भारत में यह अपनी तरह का अनूठा प्रयोग है. यह न केवल जनसंपर्क का अभ्यास है, बल्कि  यह स्थापित करने का प्रयास है कि वे एक गंभीर, पूर्णकालिक राजनेता हैं, जो एक ट्रक पर बने कंटेनर में रह सकते हैं और गर्मी, बारिश, ठंड, धूल तथा विरोधियों के उपहास का सामना करते हुए रोजाना 20 किमी पैदल चल सकते हैं, बखूबी यह जानते हुए कि इसका तुरंत चुनावी लाभ भी शायद कुछ न मिले.

आभासी दुनिया में इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है. हर राज्य में अच्छी संख्या में बुद्धिजीवियों और मशहूर हस्तियों को भारत जोड़ो यात्रा में शामिल करके पार्टी ने भीड़ को खींचने में भी कामयाबी हासिल की है. लेकिन असली चुनौती वही है कि क्या नए राहुल कांग्रेस को वोट भी दिला पाएंगे? 

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