scorecardresearch

निवेश की समस्या का समाधान

म्यूचुअल फंड निवेश का आसान और सुविधाजनक तरीका हैं जिनके जरिए आप अनिश्चितताओं को अपने वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचने के अवसरों में बदल सकते हैं

म्यूचुअल फंड निवेश
म्यूचुअल फंड निवेश
अपडेटेड 19 जुलाई , 2022

नारायण कृष्णमूर्ति

शेयर बाजारों के हिचकोले खाते सूचकांक, आमदनी के दवाब, बढ़ती महंगाई, निवेश के नए मौके, गिरता रुपया और आर्थिक सुस्ती ऐसी परेशानियां हैं जो ज्यादातर निवेशकों को सामान्यत: झेलनी ही पड़ती हैं. अक्सर निवेशकों को अच्छी तरह पता नहीं होता कि इन समस्याओं से कैसे निपटें ताकि अपने निवेश के मामले में दहशत में आकर वे कोई फैसला न ले बैठें. निवेश उतना ही दिमाग में होता है जितना वित्तीय विश्लेषण में. आखिरकार ज्यादातर निवेशक लंबे वक्त में संपदा निर्माण और अपने निवेशों पर लाभदायक प्रतिफल हासिल करने की तलाश में रहते हैं.

तो निवेश क्या है? आप किसी से भी पूछें तो संभावना यही है कि आपको ऐसी परिभाषाएं मिलें जो सही हों पर जिन्हें समझना आसान न हो. निवेश के बारे में सबसे आम ढंग से ऐसे बताया जा सकता है कि यह धन लगाकर मुनाफा कमाना है. मुनाफा ब्याज या धन के मूल्य में बढ़ोतरी के तरीके से हो सकता है.

मगर ज्यादा गहराई में जाएं तो निवेश का मतलब मौजूदा ब्याज दरों, जीडीपी, आर्थिक नीतियों सरीखी जानकारियों का इस्तेमाल करके यह फैसला लेना है कि किसी वित्तीय साधन में कितना पैसा लगाएं ताकि बाद में उस वक्त उसका मूल्य बढ़े जब आपको बच्चे की पढ़ाई या अपनी सेवानिवृत्ति या किसी ऐसे ही ठोस नतीजे के लिए इसकी जरूरत हो.

निवेश की परेशानियों को हल करना न तो आसान है और न सीधा-सादा. निवेशकों के लिए यही अच्छा होगा कि वे निवेश के बारे में समस्या के रूप में नहीं बल्कि समस्या के निदान के रूप में सोचें. इस समस्या को सफलता से हल करने के लिए आपको एक नजरिया विकसित करना और निवेश से जुड़े कई पहलुओं को संभालना होता है.

ऐसी लिखत या साधन हैं जिनमें उस वक्त निवेश कर सकते हैं जब ब्याज दरें बढ़ रही हों, ऐसे भी साधन हैं जिनमें आप बाजारों में गिरावट के वक्त निवेश कर सकते हैं, ऐसे संपत्ति वर्ग हैं जिनमें आप निवेश जोखिम को कम से कम रखने के इरादे से निवेश कर सकते हैं इत्यादि. गैर-जानकार निवेशक को इनमें से कई पहलू बेमेल मालूम दे सकते हैं.

निवेश के विचार दरअसल अक्सर तर्क के दोनों पहलुओं में से किसी का भी समर्थन कर सकते हैं, पर अलग-अलग वक्त और परिस्थितियों में. ये सभी तर्क पिछले आंकड़ों से पुष्ट होते हैं, पर जरूरी नहीं कि उनसे भविष्य के रुझानों का संकेत मिले. निवेशकों के लिए अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए अदला-बदली मायने रखती है.

मसलन, अगर आपके पास सेवानिवृत्ति के बाद के सालों में अच्छे गुजर बसर के लिए काफी पैसा नहीं है, तो आपको अंतत: मुश्किल वित्तीय स्थिति का सामना करना पड़ेगा जो आप नहीं करना चाहेंगे. सुरक्षित वित्तीय भविष्य के लिए अदला-बदली यह है कि सुरक्षित सेवानिवृत्ति की खातिर निकट अवधि के कुछ वित्तीय खर्चों को छोड़ दें.

निवेश के इर्द-गिर्द पसरी जटिलताओं को देखकर नौसिखुओं के मन में अक्सर संदेह उठते हैं कि उन्हें निवेश करना चाहिए या नहीं. अगर आप सोचते हैं कि आपके पास निवेश नहीं करने का विकल्प है, तो आप महंगाई के कारण अपना धन कम होने की संभावना का जोखिम उठा रहे हैं. आप चक्रवृद्धि के जादू से खुद को वंचित कर रहे हैं, जिसे अल्बर्ट आइंस्टीन ने ''दुनिया का आठवां आश्चर्य’’ कहा था. मसलन, इतिहास गवाह है कि शेयर बाजारों में धन 6-7 साल में दोगुना हो जाता है.

पिछले आंकड़ों से इस तथ्य की तस्दीक होती है. एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स 2000 में 5,000 अंकों पर था, जो 2006 में दोगुना बढ़कर 10,000 पर और 2013-14 में फिर दोगुना बढ़कर 20,000 पर पहुंच गया और इसी तरह आगे भी. इन 15 साल की अवधि में हमने शेयर बाजार में 2000 में टेक्नोलॉजी के ध्वस्त होने, उसके बाद 2001 में अमेरिका पर आतंकी हमले, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के साथ बुलबुले उठते देखे. हम 2022 के मध्य में हैं और एसऐंडपी सेंसेक्स 55,000 के स्तर के आसपास मंडरा रहा है, जो 2000 के स्तर से 10 गुने से भी ज्यादा की वृद्धि है.

 निवेश में अनिर्णय की समस्या का समाधान

समाधान आसान नहीं है, बावजूद इसके कि कई विशेषज्ञों ने निवेश के कई आसान तरीके अपनाए हैं. जीवन के कई क्षेत्रों में—खाना पकाना, ड्राइव करना, हवाई जहाज का टिकट खरीदना वगैरह—जिस तरह कई छोटे रास्ते मौजूद होते हैं, उस तरह निवेश में आसान छोटे रास्ते नहीं हैं.

ऐसा इसलिए है क्योंकि हर निवेशक अलग होता है और उनकी जरूरतें, वित्तीय परिस्थितियां और निवेश के लिए अतिरिक्त धन की उपलब्धता भी अलग-अलग होती है. तो ऐसे में सामान्य निवेशक कहां है? एक तरीका यह है कि निवेश के बारे सीखें, पर इसमें वक्त लगता है और सीखना तो हमेशा चलता ही रहता है. दूसरा तरीका उस पद्धति का अनुसरण करना है जो ज्यादातर लोगों के लिए कारगर रही है.

म्यूचुअल फंड भारत में करीब छह दशकों से हैं, पर उनमें छोटे निवेशकों और व्यापक आम जन की दिलचस्पी बीते दशक के दौरान ही पैदा हुई. ऐसा बहुत कुछ म्यूचुअल फंड उद्योग की तरफ से जनसाधारण को शिक्षित करने की लगातार कोशिशों की बदौलत हुआ. बाजार नियामक सेबी को भी उतना ही श्रेय देना होगा.

जिसने निवेशकों में इस वित्तीय साधन में अपनी गाढ़े पसीने के कमाई लगाने का आत्मविश्वास बढ़ाने के हक में सही माहौल बनाया. शंकालु निवेशक अक्सर म्यूचुअल फंड को भरोसेमंद नहीं मानते क्योंकि वे रिटर्न की गारंटी नहीं देते. फिर कभी-कभार उद्योग के खराब दिन भी आए, जो किसी भी उद्योग में आते ही हैं.

मगर नियामक को सबसे ज्यादा चिंता निवेशकों की सुरक्षा की है और यही वजह है कि भारत में म्यूचुअल फंड नियम-कायदों से अच्छी तरह बंधे हैं. आज करीब दो करोड़ निवेशकों ने म्यूचुअल फंड में पैसा लगा रखा है और निवेश की रुकावटें दूर होने के साथ कई और इस कारवां से जुड़ रहे हैं. उत्पादों से लाभ के मोर्चे पर ढेरों विकल्प हैं. म्यूचुअल फंड कंपनियों (जिन्हें फंड हाउस या संपत्ति प्रबंधन कंपनी या एएमसी के रूप में जाना जाता है) की संख्या पर आधारित विकल्प सेबी के मानकीकरण के हिसाब से अलग-अलग फंड योजनाओं की पेशकश कर रहे हैं.

संरचना के लिहाज से म्यूचुअल फंड शेयरों, बॉन्ड और/या अन्य परिसंपत्ति वर्गों के पेशेवर ढंग से संभाले जाने वाले पोर्टफोलियो हैं, जो उस फंड के निवेश उद्देश्यों में दर्ज विशिष्ट रणनीति से बंधे होते हैं. जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आप अपना पैसा फंड के ज्यादा बड़े पूल में लगाते हैं जिसे पेशेवर मनी मैनेजर संभालते हैं. पूल में ज्यादा धनराशि होने और आपका धन विशेषज्ञों के हाथों संभाले जाने के कारण म्यूचुअल फंड निवेश में विविधता लाने और निवेश के जोखिम कम करने में आपकी मदद कर सकता है.

योजना में हरेक एएमसी को दोनों की—रेगुलर प्लान की (जिसमें फंड बेचने वाले म्यूचुअल फंड वितरक को कमीशन मिलता है) और डायरेक्ट प्लान (जिसमें निवेशक एएमसी के साथ सीधे निवेश कर सकता है) की—पेशकश करनी होती है. वितरक को मिलने वाला कमीशन बचाने के लिए निवेशक अक्सर सीधे निवेश में कूद पड़ते हैं और सफल भी हो जाते हैं. मगर सीधे रास्ते में हाथ आजमाने वाले कई निवेशकों को अक्सर प्रतिकूल नतीजे भी मिले. म्यूचुअल फंड निवेश के मूल में बहुत ज्यादा अंतर्दृष्टि, बारीकियां, अनुभव, डेटा विश्लेषण और सिमुलेशन मॉडल हैं. 

 म्यूचुअल फंड में निवेश का सही तरीका

म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश में आम निवेशक के लिए परेशानी यह है कि वह कई सारे आसान और साथ ही मुश्किल सवालों के अनुकूल जवाबों की तलाश में होता है. कौन-सा फंड चुनूं? कब निवेश करूं? कैसे निवेश करूं? संकेत और शोर-शराबे के बीच फर्क—यानी जब शेयर बाजार महामारी में लॉकडाउन सरीखी घटनाओं के कारण गिरावट से दो-चार होते हैं, तो इसका यह मतलब नहीं कि शेयर बाजार खत्म होने जा रहे हैं.

फेहरिस्त लंबी है, पर बताती है कि निवेश करने की चुनौती कितनी मुश्किल और बारीकियों से भरी है. आम तौर पर निवेशक फंड की योजना में बताए गए रिटर्न पर विचार से शुरू करता है. फर्ज कीजिए, साल में सबसे अव्वल प्रदर्शन करने वाले फंड पर नजर पड़ी तो फिर उससे आगे नहीं देखता. मगर निवेश के लिए फंड योजना तय करने के लिए ज्यादा गहरी समझ की दरकार होती है.

सबसे पहले निवेशकों को इस सवाल का उत्तर देना चाहिए कि वे क्यों निवेश कर रहे हैं, जैसे वह लक्ष्य जो वे पाना चाहते हैं. फिर उन्हें निवेश के मामले में जोखिम लेने की अपनी क्षमता को समझना चाहिए. इन दो कारकों के आधार पर वे अपनी जरूरतों को पूरा करने वाली फंड योजना तय कर सकते हैं. इस कदम के बाद उन्हें उन फंड पर विचार करना होता है जिनका प्रदर्शन का अच्छा रिकॉर्ड और इतिहास रहा है. वांछनीय तो यही है कि बाजार के उतार-चढ़ाव के चक्रों के दौरान लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली फंड स्कीम में निवेश किया जाए और निवेशकों को इसी पर विचार करना चाहिए.

आप किसी फंड योजना में सीधे निवेश कर सकते हैं या ऐसे वितरकों और सलाहकारों की सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपके वांछित नतीजों के अनुरूप फंड योजना चुनने में मदद कर सकें. सलाहकारों को उस पायलट की तरह मानिए जो आपको एक जगह से दूसरी जगह उड़ाकर ले जाता है और आप यात्रा के दौरान आराम से बैठकर तनावमुक्त हो सकते हैं. जिस तरह उड़ानें वायुमंडलीय विक्षोभों से गुजरती हैं और पायलट की काबिलियत का इम्तिहान लेती हैं, वैसे ही बाजार भी उन सलाहकारों और वितरकों की क्षमताओं का इम्तिहान लेते हैं जो बाजार की अनिश्चितता से पार निकलने में मदद कर सकते हैं.

निवेशक अक्सर अपने आप कार ड्राइव करने की मिसाल देते हैं और उन्हें लगता है कि वे अपने दम पर अपने निवेश संभाल सकते हैं. हां, यह मुमकिन है, मगर तभी जब कार चलाने वाला हर शख्स पूरे भरोसे से कह सके कि उसके हाथ कभी दुर्घटना नहीं हुई. जिस तरह 'स्व-चालित’ कारों के दुर्घटना कर बैठने की आशंका होती है, ठीक उसी तरह निवेश के 'स्व-निर्देशित’ फैसलों के साथ भी होता है.

स्व-निर्देशित निवेशों के साथ दिक्कत यह है कि आपको एहसास तक नहीं होगा कि कब और कहां आपसे गलती हो गई और अब सुधार का क्या उपाय है. कभी-कभी अगर आप विशेषज्ञ हों तब भी  ड्राइवर रखना फायदेमंद होता है; ऐसा ड्राइवर जो खासकर मुश्किल वक्तों के दौरान आपको निवेश के मामलों में सही रास्ता दिखाए.

सुव्यवस्थित ढांचा
आपके निवेश के तौर-तरीकों का व्यवस्थित ढांचा होना लंबे वक्त में बहुत मददगार हो सकता है. इससे न केवल आपके निवेश की एक पद्धति होगी बल्कि अपने अनुभव से सीखकर समय के साथ उसे बेहतर बनाने के तरीके भी आपके पास होंगे. इस संदर्भ में म्यूचुअल फंडों के साथ एसआइपी या सिप (सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान या व्यवस्थित निवेश योजना) अनेक भारतीयों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रही है. एसआइपी की लोकप्रियता का कारण उनकी सीधी-सादी बनावट है.

एसआइपी वित्तीय नियोजन का औजार है जो संपदा निर्माण और दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में निवेशकों की मदद करता है. आप नियमित अंतराल से म्यूचुअल फंड योजना में निश्चित धनराशि का योगदान देते हैं. बदले में एसआइपी आपके निवेशों में अनुशासन लाता है और आपसे नियमित रूप से निवेश करवाता है.

वेतनभोगी निवेशकों के लिए एसआइपी इस सदाबहार परेशानी का अचूक समाधान है कि कब निवेश करें. चूंकि हर महीने नियमित आमदनी प्राप्त होती है, इसलिए हर महीने निवेश करने में अत्यधिक समझदारी है. नियमित निवेश करने की आदत एसआइपी के जरिए बहुत आसानी से अपने भीतर विकसित की जा सकती है (देखें: एसआइपी के फायदे).

बाजार चक्रों के दौरान निवेश बनाए रखने को लेकर एक अच्छी बात है 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ से मिलने वाला लाभ. आप उस म्यूचुअल फंड योजना की, जिसमें आप निवेश करते हैं, तब ज्यादा यूनिट खरीदते हैं जब बाजार गिर रहा होता है और तब कम यूनिट खरीदते हैं जब बाजार ऊंचाई पर होता है. लंबी अवधियों में प्रभावी तौर पर इसका मतलब यह है कि एक अवधि के दौरान आपकी प्रति यूनिट औसत लागत अपेक्षया कम होती है. (देखें: रुपए की कॉस्ट एवरेजिंग).

एसआइपी मार्केट टाइमिंग यानी बाजार में सही समय के चयन के प्रलोभन से पार पाने में भी मदद करता है. यह ऊंची कीमत के समय बाजार में दाखिल होने के जोखिम, जिससे लंबे वक्त के रिटर्न कम हो सकते हैं, या दाखिल होने के लिए निचले स्तर का लंबा इंतजार करने की वजह से नुक्सान उठाने के जोखिम के अलावा कुछ नहीं है.

बाजार में प्रवेश का सही समय चुनने की कोशिश करने वाले कई निवेशक या तो बाजार की बड़ी उछालों से चूक गए या उन्होंने एकमुश्त धनराशि उस वक्त निवेश की जब बाजार शिखर पर पहुंच चुके थे. एसआइपी लागत का औसत निकालकर बाजार के उतार-चढ़ावों की सवारी गांठने में निवेशकों की मदद करता है, क्योंकि वे एक निश्चित धनराशि विभिन्न स्तरों पर नियमित रूप से निवेश करते हैं. यही नहीं, आप म्यूचुअल फंड एसआइपी के जरिए महीने में 500 रुपए जितनी छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं.

बीते सालों के दौरान एसआइपी निवेश में कई नवाचार हुए, जिन्होंने कई भिन्न-भिन्न रूपों को जन्म दिया (देखें: एसआइपी के छह भिन्न रूप). हालांकि इनमें से हरेक भिन्न रूप की अपनी अच्छाइयां हैं, वे अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करने की खातिर लंबी अवधि में नियमित निवेश करने के सीधे-सादे फलसफे पर आधारित हैं. हर व्यक्ति के लिए क्या कारगर होगा, इस आधार पर आप एसआइपी का ऐसा कोई विकल्प चुन सकते हैं जो वित्तीय जरूरतों, मिजाज और सहूलियत के माफिक बैठता हो.

हर अच्छी चीज की तरह इसके भी कुछ मिथ हैं जो एसआइपी की अच्छाइयों को मटियामेट करने का जतन करते हैं. हालांकि हर मिथ की तरह एसआइपी के इर्द-गिर्द फैले मिथों को भी इस समझ से तोड़ा जा सकता है कि यह अपने आप में निवेश नहीं बल्कि निवेश का शायद सबसे सरल रास्ता है (देखें: एसआइपी के 10 मिथ और तथ्य). समझने में आसानी के लिए क्रेडिट कार्ड का उदाहरण आजमाइए—वे कोई चीज आज खरीदने और कल उसका भुगतान करने का साधन हैं; एसआइपी कल की संपदा का निर्माण करने के लिए आज बचाने और निवेश करने का साधन है.

एसआइपी की ताकत कुछ ऐसी है कि यह निवेशकों के लिए अपने वित्तीय लक्ष्य एसआइपी के निवेशों में बांटने में मदद कर सकती है. मसलन, मान लीजिए आपका लक्ष्य यह है कि अब से 11 साल बाद अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए आपके पास पैसा हो और वह जो कोर्स करना चाहती है उसका मौजूदा खर्च 20 लाख रुपए है. शिक्षा में 5 फीसद की महंगाई मान लें तो अब से 11 साल बाद उसके लक्ष्य की कीमत 34.2 लाख रुपए होगी.

ऑनलाइन ऐसे अनगिनत एसआइपी कैल्क्यूलेटर मौजूद हैं जो वित्तीय लक्ष्य गणकों को जोड़ते हैं. इनका इस्तेमाल करके आप यह निकाल सकते हैं कि फर्ज कीजिए अगर आपके निवेश 12 फीसद रिटर्न कमाते हैं तो आपको 34.2 लाख रुपए का लक्ष्य हासिल करने के लिए हर माह 12,456 रुपए के निवेश की जरूरत होगी.

लेकिन अगर आप ज्यादा जोखिम उठाना गवारा कर सकते हैं और ज्यादा जोखिम वाली म्यूचुअल फंड योजना में निवेश करके 15 फीसद रिटर्न कमा सकते हैं, तो आपको हर माह 10,166 रुपए निवेश करने की जरूरत होगी. एसआइपी कर्ज लेने पर चुकाई जाने वाली ईएमआइ (बराबर मासिक किस्त) का बिल्कुल उलटा रूप हैं. अपने हरेक वित्तीय लक्ष्य को एसआइपी में बांटकर आप अलग-अलग समयावधियों में फैले बहुत-से वित्तीय लक्ष्यों के लिए साथ-साथ निवेश कर सकते हैं.

इसका यह मतलब नहीं कि एसआइपी में कोई खामी या कमी नहीं हैं. एक प्रमुख खामी यह है कि एसआइपी के रिटर्न शेयर बाजार के चढ़ने के दौरान एकमुश्त निवेशों से मिलने वाले रिटर्न के आगे फीके पड़ जाते हैं. यह जितनी असलियत है उतना ही मिथ भी है, क्योंकि आंकड़ों से यह तथ्य साबित किया जा सकता है.

मगर साथ ही यह बात पिछले डेटा पर आधारित है, जिसका मतलब है कि यह समझ पाना मुश्किल है कि बाजार कब चढ़ेंगे और कब तक चढ़ते रहेंगे. मगर एसआइपी के खिलाफ जाने वाला सबसे बड़ा कारक इसकी सरलता या सादगी है. विकसित निवेशक गलती से निवेश के सीधे-सादे तरीकों को अक्सर ऊबाऊ समझ लेते हैं.

शेयर बाजार में निवेश रातोरात अमीर बनने का रास्ता नहीं है. यह टेस्ट क्रिकेट की तरह है, जहां सत्र दर सत्र पांच दिन तक खेल होता है और मौसम के साथ अन्य हालात बदलते हैं. निवेश का श्रेष्ठ तरीका अन्न्सर लक्ष्य से पहले तक उबाऊ होता है. जो निवेशक साधारण और निश्चित वित्तीय रुटीन चाहते हैं उनके लिए एसआइपी बहुत मददगार साबित हो सकता है. ठ्ठ


निवेश से आशय यह है कि जटिल सूचनाओं के प्रयोग से यह तय करना कि कितना पैसा किस वित्तीय साधन में लगाया जाए ताकि भविष्य की किसी तारीख में उसका मूल्य बढ़ जाए

निवेश के विचार दरअसल अक्सर तर्क के दोनों पहलुओं में से किसी का भी समर्थन कर सकते हैं, पर अलग-अलग वक्त और परिस्थितियों में तथा वे सही कालखंड में लिए गए सही आंकड़ों के आधार पर हों

एसआइपी एक वित्तीय साधन है जो निवेशकों को परिसंपत्ति अर्जित करने में मदद करता है और इससे वे अपने लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य प्राप्त करते हैं

एसआइपी मार्केट टाइमिंग यानी बाजार में सही समय के चयन के प्रलोभन से पार पाने में भी मदद करता है. यह ऊंची कीमत के समय बाजार में दाखिल होने का जोखिम है, जिससे लंबे वक्त के रिटर्न कम हो सकते हैं

एसआइपी का मकसद आपको नियमित निवेश में मदद करना है. विभिन्न प्रकार के एसआइपी म्यूचुअल फंड में निवेश के इस अनुशासन को और बढ़ा देते हैं

एसआइपी के छह भिन्न रूप
एसआइपी का मकसद आपसे नियमित रूप से निवेश करवाना है और कई भिन्न-भिन्न प्लान का होना म्यूचुअल फंडों में निवेश करने के इस अनुशासित तरीके को जोरदार बना देता है

1 रेगुलर एसआइपी: आप निश्चित अंतराल पर निश्चित समयावधि के दौरान एक निश्चित धनराशि निवेश करते हैं. मसलन, आप अगले पांच साल तक प्रति माह 5,000 रुपए निवेश कर सकते हैं और इस तरह स्थायी निर्देशों के जरिए एसआइपी की 60 किस्तें अदा करते हैं. यह एसआइपी का सबसे आसान और अड़चन मुक्त रूप है. आप दैनिक, साप्ताहिक, मासिक या निवेश के शुरू होने के वक्त पेश किसी अन्य आवृत्ति से निवेश कर सकते हैं.

2 स्टेप-अप एसआइपी: एसआइपी के इस रूप को टॉप-अप एसआइपी भी कहा जाता है, जिसमें निवेशक एसआइपी में अपने योगदान को एक निश्चित धनराशि तक बढ़ा सकता है. मसलन, 5,000 रुपए का मासिक एसआइपी हर गुजरते साल और 1,000 रुपए बढ़ाया जा सकता है. इस विकल्प के जरिए आप हर साल नया एसआइपी शुरू करने के बजाए हर गुजरते साल अपने एसआइपी की रकम स्वचालित ढंग से बढ़ा सकते हैं. यही नहीं, कई निवेशकों के लिए यह अपनी बढ़ती आमदनी के हिसाब से हर साल अपने निवेश की रकम बढ़ाने का तरीका भी है.

3 फ्लेक्सिबल एसआइपी: एसआइपी के इस रूप में आपको निवेश की रकम पूर्व-निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर बदलने का लचीलापन मिलता है. मसलन, बाजार गिरने के वक्त हर बार आप एसआइपी में योगदान बढ़ाने का वायदा कर सकते हैं.

इस तरह आप बाजार के गिरने पर अपने म्यूचुअल फंड में ज्यादा यूनिट हासिल कर सकने और बाजारों के महंगे होने पर एसआइपी की धनराशि कम करने का फायदा उठाते हैं. अगर आप वित्तीय संकट से घिरे हों तो एसआइपी से कुछ वक्त के लिए विराम भी ले सकते हैं; कितना लंबा विराम ले सकते हैं, यह आपके फंड हाउस और चुने विकल्प के लचीलेपन पर निर्भर है.

4 पर्पेचूअल एसआइपी: जब आप एसआइपी के जरिए निवेश का विकल्प चुनते हैं तो आम तौर पर आपको यह घोषणा करनी होती है कि कितने समय—मसलन, 3 या 5 या और ज्यादा साल—निवेश किए रखना चाहते हैं. पर्पेचूअल या अनवरत विकल्प में कोई निश्चित आखिरी तारीख या समय सीमा नहीं बतानी होती. इस एसआइपी के जरिए आप तब तक निवेश करते रह सकते हैं जब तक आप 'स्टॉप एसआइपी’ अनुरोध के माध्यम से खुद एसआइपी रोकने का विकल्प नहीं चुनते.

5 ट्रिगर एसआइपी: यह फ्लेक्जिबल एसआइपी का ही रूप है, जिसमें अचानक बाजार में गिरावट या बाजार की अनुकूल स्थिति, सूचकांक के एक निश्चित स्तर या पूर्व-निर्धारित एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) वगैरह सरीखी बाजार की किन्हीं घटनाओं के वक्त एसआइपी खरीदने, बेचने या निवेश रोकने के लिए ट्रिगर (आरंभिक बिंदु) तय कर दिया जाता है. एसआइपी का यह रूप उन जानकार और अनुभवी निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो निवेश के गतिशील फैसले लेना चाहते हैं.

6 मल्टी-एसआइपी: इस एसआइपी में आपको एक ही एसआइपी के जरिए एक फंड हाउस की बहुत-सी फंड योजनाओं में निवेश करने की छूट होती है. मसलन, आप हर माह 10,000 रुपए तीन टुकड़ों में बांटकर 3,000 रुपए, 2,000 रुपए और 5,000 रुपए तीन अलग-अलग योजनाओं में निवेश करना चाहते हैं तो आप कर सकते हैं; यानी तीन अलग-अलग एसआइपी चुनने के बजाए एक एसआइपी का विकल्प चुन सकते हैं. इससे कागजी काम या बहुत-से एसआइपी संभालने का काम कम हो जाता है—आप एक ही एसआइपी में निवेश कर सकते हैं जो आपकी रकम अपने आप बहुत-सी योजनाओं में निवेश करता है. इससे आपके निवेश पोर्टफोलियों में विविधता बढ़ जाती है.

एसआइपी से जुड़े 10 मिथ और तथ्य
एसआइपी की लोकप्रियता के साथ इसके बारे में कई गलतफहमियां भी पैदा हो गई हैं. एसआइपी के मामले में ये गलतियां नहीं करनी चाहिए

मिथ 1: एसआइपी म्यूचुअल फंड है

एसआइपी म्यूचुअल फंड योजना नहीं है. यह निवेश की अवधारणा और साधन है जिसके जरिए आप म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं. बैंक के जरिए बचत की शब्दावली में कहें, तो मासिक एसआइपी की अवधारणा रेकरिंग डिपॉजिट या आवधिक जमा की तरह है. यूएलआइपी या यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) या एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन योजना) में पैसा लगाने के लिए इस अवधारणा का इस्तेमाल किया जा सकता है. म्यूचुअल फंड के भीतर डेट फंड सहित सभी ओपन-एंडेड योजनाएं एसआइपी के माध्यम से निवेश साबित होती हैं.

मिथ 2: एसआइपी वृद्धि की गारंटी देता है
एसआइपी से निवेश में वृद्धि की गारंटी नहीं होती. एसआइपी आखिर म्यूचुअल फंड निवेश हैं जो बाजार के जोखिम से जुड़े हैं. हालांकि एकमुश्त निवेश के मुकाबले एसआइपी के जरिए निवेश में लंबे समय का जोखिम घट जाता है, खासकर जब बाजार में तेज उतार-चढ़ाव हो.

मिथ 3: एसआइपी चढ़ते बाजार में बेकार
एसआइपी के जरिए निवेश का मकसद बाजार के उतार-चढ़ावों का लाभ लेना है. हां, ऐसे दौर आ सकते हैं जब एसआइपी से निवेश उतना बढ़ता दिखाई न दे जितना बाजार के चढ़ने के चक्र की शुरुआत में निश्चित एकमुश्त निवेश बढ़ता है. मगर आपको बाजार के चढ़ने के दौर का पता तभी चल सकता है जब पीछे मुड़कर देखें, निवेश करते वक्त नहीं. एसआइपी का मकसद बाजार के उतार और चढ़ाव दोनों का फायदा उठाना है.

मिथ 4: एसआइपी छोटे निवेशकों के लिए है
एसआइपी की शुरुआत 500 रुपए जितनी छोटी रकम से की जा सकती है, पर एसआइपी से निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है. वेतनभोगियों के लिए एसआइपी का फायदा यह है कि आप आमदनी के हिसाब से मेल खाती निवेश की बारंबारता का पालन कर सकते हैं. एसआइपी से निवेश वे भी कर सकते हैं जिनकी आमदनी अनियमित है, मसलन कारोबारी, और जितनी बार चाहें कर सकते हैं.

मिथ 5: एसआइपी में जरा लोच नहीं है
एसआइपी में आवृत्ति, अवधि और धनराशि की प्रतिबद्धता के मामले में लचीलापन है. यह निवेश का सबसे लचीला विकल्प है. एसआइपी आपकी सहूलियत के मुताबिक कई रूपों में मौजूद है.

मिथ 6: एसआइपी केवल इक्विटी योजनाओं के लिए है
रुपी कॉस्ट एवरेजिंग में जिस तरह काम होता है, उसके लिहाज से एसआइपी इक्विटी फंड की तरफ झुका मालूम देता है. मगर डेट और हाइब्रिड फंड में भी निवेश की सुविधा मौजूद है. फंड हाउस से विभिन्न विकल्पों के बारे में जानकारी ले लें.

मिथ 7: एसआइपी एकमुश्त निवेश के मुकाबले बेहतर है
एसआइपी की सहूलियत का यह मतलब नहीं कि यह एमएफ निवेशों से फायदा हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका है. मसलन, अगर आप बाजार में गिरावट के वक्त एकमुश्त निवेश करते हैं और बाजार के गिरने तक निवेश बनाए रखते हैं, तो संभावना यह है कि उसी अवधि में एसआइपी निवेश से उतना रिटर्न शायद न मिले.

मिथ 8: महीने की शुरुआत में एसआइपी बेहतरीन है
एसआइपी का मकसद बाजार में प्रवेश का सही समय चुनने की परेशानी से बचना और बाजार चक्रों के दौरान निवेश करना है. लंबे वक्त के दौरान यह बार-बार साबित हुआ है कि सही समय या निवेश की आवृत्ति का इंतजार करने के बजाए नियमित निवेश कारगर रहता है. एसआइपी के में कोई भी समय निवेश का अच्छा समय है.

मिथ 9: आप एसआइपी के जरिए एकमुश्त निवेश नहीं कर सकते
फंड में आपके एसआइपी एक निश्चित आवृत्ति और समयावधि के लिए होते हैं. आपको जब और जैसा लगे, उसके हिसाब से आप उसी फंड योजना और उसी फोलियो में एकमुश्त निवेश कर सकते हैं. जिस फंड में आप निवेश कर रहे हैं, उसमें अतिरिक्त एकमुश्त निवेश करने पर कोई पाबंदी नहीं है.

मिथ 10: कम एनएवी वाले फंड में एसआइपी से बेहतर रिटर्न मिलते हैं
ऐसे फंड में निवेश करें जिसका प्रमाणित ट्रैक रिकॉर्ड हो और जिसमें भावी वृद्धि की गुंजाइश हो. फंड का एनएवी अप्रासंगिक है; योजना का प्रदर्शन और अपनी निवेश जरूरतों के हिसाब से उसकी उपयुक्तता देखिए.

Advertisement
Advertisement