जगत प्रकाश नड्डा, अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी
जगत प्रकाश नड्डा के लिए भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व संभालना आसान काम नहीं था. उन्हें तीन सफल पूर्ववर्तियों—नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और अमित शाह—की छोड़ी जगह में अपनी पहचान बनानी थी. फिर भी भगवा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नड्डा ने अपना रास्ता खुद बना लिया है और ऐसा लगता नहीं कि उन्हें अपने पूर्ववर्तियों में से किसी की भी विरासत की छाया तले दबने का कोई भय है.
इस सहज परिवर्तन का श्रेय वे भाजपा की सामूहिक नेतृत्व परंपरा को देते हैं. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में नड्डा ने भविष्य में पार्टी के आगे बढ़ने के रास्ते तथा किसानों के विरोध और हाल के दिनों में भाजपा की चुनावी दुर्जेयता के रहस्य जैसे चर्चित मुद्दों पर पार्टी के रुख के बारे में बात की. ठ्ठ
भाजपा नेतृत्व और भविष्य के रोड मैप के बारे में
‘‘भाजपा वैचारिक पृष्ठभूमि वाली पार्टी है. हम काडर-आधारित हैं और हमारे पास बड़ी संख्या में समर्थक हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में हम सामूहिक बुद्धि से काम करते हैं. हम निरंतर काम करते हैं...
और हम एक ऐसी पार्टी हैं जहां पुरानी पीढ़ी हमेशा युवा पीढ़ी को जगह देती है. हमने बहुत-से युवा मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की है...हम नए लोगों को अवसर देते हैं. नए प्रयोग करते हैं. भाजपा में एक तरह की गतिशीलता है’’
‘‘ऐसे कई राज्य हैं जहां हम विपक्ष में हैं और क्षेत्रीय दल सत्ता में हैं. हमें लगता है कि इन राज्यों में भी एक दृढ़ वैचारिकता वाले दल को सत्ता संभालनी चाहिए. इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मैं पूरी जिंदगी भाजपा के लिए काम करूंगा’’
अहम बातें
भाजपा सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करती है. पूर्व अध्यक्ष अमित शाह सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर होते हैं जबकि प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी भी परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं
भाजपा चुनाव के लिए काफी पहले से तैयारी करती है. पार्टी अपनी तैयारियां कभी बंद नहीं करती. पार्टी अध्यक्ष नड्डा हर घटना पर नजर रखते हैं और कार्यकर्ताओं से जवाबदेही की मांग करते हैं
विपक्षी दल राजनैतिक उद्देश्यों के लिए लोकतांत्रिक विरोध का उपयोग करते हुए विकास को बाधित कर रहे हैं
विपक्ष को सलाह: धैर्य बहुत महत्वपूर्ण है. जिनके पास धैर्य नहीं है वे अच्छा विपक्ष नहीं बन सकते
उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी की सक्रिय भूमिका पर
‘‘प्रतीकवाद और तस्वीरें जमीनी चीजों को नहीं बदलतीं. गांधी परिवार 1970-80 के दशक के तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है. दुनिया आगे बढ़ी है. जनता जानती है कि सच क्या है और दिखावा क्या. 21वीं सदी की राजनीति तड़क-भड़क और ग्लैमर से नहीं चलती’’
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारी पर
‘‘उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए भाजपा की तैयारी बहुत पहले शुरू हो गई थी. हम हमेशा योजना बनाते रहते हैं. मेरा ऐसा कहना अहंकारपूर्ण लग सकता है, लेकिन दूसरे लोग अब जो कर रहे हैं, वह हम बहुत पहले कर चुके हैं’’
किसानों के आंदोलन और लखीमपुर खीरी कांड पर जिसमें चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत के आरोपियों में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र का बेटा शामिल है.
‘‘जब कृषि कानून के प्रावधानों को 18 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है, जब सरकार बातचीत के लिए तैयार है, तो बातचीत क्यों नहीं हो रही है? आप घोड़े को पानी के पास ला सकते हैं, उसे पानी पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते.
यदि लोगों को भ्रांतियां हैं, तो हम उनकी शंकाओं को दूर कर सकते हैं. अगर लोग तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, तो हम उन्हें सही तथ्य समझा सकते हैं. लेकिन जो लोग राजनैतिक मकसद से सड़क पर हैं, उन्हें बता दूं कि भाजपा इससे नहीं हिलेगी’’
‘‘हमें इस घटना (लखीमपुर खीरी) को चुनावी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से देखना चाहिए. यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और भाजपा अध्यक्ष के रूप में मैं कहूंगा कि कानून अपना काम करेगा.
कानून से ऊपर कोई नहीं है; जांच में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी. इसी के साथ हमें लोकतांत्रिक विरोध के तरीके पर भी विचार करना चाहिए... लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर इस तरह अंकुश नहीं लगाया जाता है. विपक्षी दलों को यह बात समझनी चाहिए’’

