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आवरण कथाः तूफान से मुकाबले को तैयार

दुनिया और कठिन चुनौतियां: चिंताओं पर अंतर्दृष्टि, कामयाबी और भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताएं.

एस. जयशंकर
एस. जयशंकर
अपडेटेड 8 नवंबर , 2021

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2021

एस. जयशंकर सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में देश के विदेश मंत्री हैं. अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता से काबुल में पाकिस्तान का पलड़ा भारी हो गया है. अफगानिस्तान से भारतीय दूतावास के लोगों को वापस बुलाना पड़ा, जबकि भारत ने वहां दो दशकों तक निवेश किया था.

लड़ने को तैयार चीन तकरीबन तीन दशकों की कूटनीति को लांघ गया है. पाकिस्तान के साथ उसकी गलबहियां और समूचे क्षेत्र के बेहद बदले हुए भू-राजनैतिक हालात ऐसी चुनौतियां ले आए हैं, जो हाल के दशकों में नहीं देखी गईं.

एस. जयशंकर, भारत के विदेश मंत्री, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर

''हालात (लद्दाख में) काफी बदल चुके हैं...वे फौज आगे ले आए....हमने जवाबी तैनाती की...देश की सुरक्षा के लिए जो कुछ भी करना है, उस संकल्प या दृढ़ता में रत्ती भर कमी नहीं है. मुझे अपनी सेना में ज्यादा ही भरोसा है कि देश की रक्षा के लिए वह सब कुछ करेगी और मैं उम्मीद करता हूं कि हर देशभक्त में ऐसा ही भरोसा होना चाहिए’’

चीन पर
‘‘मैंने आज तक कोई भरोसेमंद स्पष्टीकरण नहीं सुना है कि क्यों चीन ने सीमा पर इतनी बड़ी फौज आगे की. अगर शांति और स्थिरता भंग है और एलएसी की यथास्थिति एकतरफा बदलने की कोशिश है तथा लिखित संधि का उल्लंघन करके बड़े पैमाने पर फौज लाई गई है, तो इससे निस्संदेह रिश्तों पर फर्क पड़ेगा’’

अफगानिस्तान पर
‘‘अफगानिस्तान में हालात अभी भी खुल रहे हैं, अभी कोई स्पष्टता नहीं है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आम समझ यह है कि अफगानिस्तान से कुछ बुनियादी उम्मीदें हैं.

सबसे बुनियादी बात यह है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए नहीं किया जाएगा. उम्मीदें सरकार के तौर-तरीकों को लेकर भी हैं कि वह समावेशी हो’’

पाकिस्तान पर
‘‘(आप मुझसे पूछें कि भारत और पाकिस्तान के बीच फिर बातचीत कब होगी), तो आपको बताना चाहिए कि आप कब पाकिस्तान को सामान्य देश होता देखते हैं, वह जो पड़ोसियों के खिलाफ आतंकवाद और आतंकी कार्रवाइयों को शह न दे, ऐसे पड़ोसी देश को जिसने उसे एमएफएन का दर्ज दिया हो.

जिसके पड़ोसियों से जुड़ाव हों, जो लोगों को वीजा के जरिए आने-जाने की इजाजत दे, जैसा हम दूसरे सभी पड़ोसी देशों के साथ करते हैं! आज ऐसा कोई देश नहीं है, जो असलियत में पड़ोसी के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर आतंकवाद को शह देता है’’.

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