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पवित्र बुनियाद पर बनता ढांचा

सेंट्रल विस्टाः लोकतंत्र के नए चेहरे से उठता परदा.

हरदीप सिंह पुरी
हरदीप सिंह पुरी
अपडेटेड 8 नवंबर , 2021

नरेंद्र मोदी सरकारी की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना अपनी संकल्पना के वक्त से ही चर्चा में है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नवीनीकरण परियोजना के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है, विपक्षी राजनैतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसके सौंदर्य, लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता जाहिर की है.

इस कवायद का मकसद 3.2 किलोमीटर में फैले और लूटियन्स दिल्ली के हृदयस्थल में स्थित इलाके को फिर से विकसित करना है जिसको सेंट्रल विस्टा के नाम से जाना जाता है और जिसे 1930 के दशक में ब्रिटिश सरकार ने बनाया था. इसमें कई सरकारी इमारतों को तोड़कर फिर से बनाने का काम शामिल है और इन इमारतों में कई प्रतिष्ठित इमारतें भी शामिल हैं.

परियोजना में एक नया संसद भवन बनाया जाना है जिसकी कुल लागत 20,000 करोड़ रुपए है. उम्मीद है कि यह 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा, जब देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा होगा. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में, शहरी विकास और आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के वास्तुकार बिमल पटेल ने इस परियोजना से जुड़ी कई आशंकाओं के जवाब दिए.

‘‘हमें ऐसी इमारतें बनानी होंगी जहां एक विस्तारित सदन बैठ सके. मुख्य बात है एक ऐसी इमारत बनाना जो अच्छी तरह से काम करे. संसद का नया भवन त्रिकोणीय आकार का होगा जो विभिन्न धर्मों में एक पवित्र ज्यामितीय आकृति होती है. यह सबसे आधुनिक सुविधाओं वाला एक भवन होगा और जो हमारी संस्कृति और परंपरा को भी प्रदर्शित करेगा’’

बिमल पटेल 
सेंट्रल विस्टा परियोजना के वास्तुकार और अध्यक्ष, सीईपीटी यूनिवर्सिटी

हरदीप सिंह पुरी
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री; केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री

‘‘सेंट्रल विस्टा के इर्द-गिर्द एक नैरेटिव गढ़ा गया है, जिसमें कुछ काल्पनिक उड़ान है तो कुछ खामखयाली. अब सेंट्रल विस्टा कही जाने वाली इमारतों के समूह की अवधारणा 1910 के आसपास किसी समय की गई थी. मौजूदा इमारत [जो अभी संसद है] कभी भी संसद बनने के लिए डिजाइन नहीं की गई थी... [लेकिन] एक औपनिवेशिक शक्ति का एक काउंसिल हाउस भर था...

मौजूदा संसद भवन में सभी सदस्यों को समायोजित करने की क्षमता नहीं है. स्वतंत्रता के बाद से सदस्यों की संख्या में वृद्धि हुई है. आंतरिक रूप से उन्हें समायोजित करना पड़ा है, मसलन दो लोगों की जगह में पांच लोग बैठते हैं. यह एक असुरक्षित इमारत है क्योंकि दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र-चार में स्थित है. नई इमारत को भूकंपीय क्षेत्र के मापदंडों के अनुसार डिजाइन किया गया है’’

‘‘महामारी के दौरान हमारी कई और भी परियोजनाएं चल रही थीं. एक्टिविस्टों ने सेंट्रल विस्टा के ही मामले को उठाकर आखिर अदालत का रुख क्यों किया? दिल्ली हाइकोर्ट ने उन पर दंडात्मक जुर्माना लगाया है’’

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