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आवरण कथाः गेमिंग का खेल

इंडिया टुडे ग्रुप में गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स के बिजनेस हेड विश्वलोक नाथ ने दोनों खेलों के बीच तुलना की और बताया कि कैसे फोर्टनाइट विश्व कप में आइसीसी विश्व कप की तुलना में पुरस्कार राशि दोगुनी है.

(बाएं से दाएं) नमन माथुर उर्फ मॉर्टल, विश्वलोक नाथ, अनीश कपूर, प्रसाद मांगिपुडी और अनीश अरविंद
(बाएं से दाएं) नमन माथुर उर्फ मॉर्टल, विश्वलोक नाथ, अनीश कपूर, प्रसाद मांगिपुडी और अनीश अरविंद
अपडेटेड 8 नवंबर , 2021

किंग कांग: गेमिंग की दुनिया अरबों में खेल रही है. और भारत अभी भी घुटनों के बल चल रहा है, आखिर क्यों?

अहम बातें

मोबाइल गेमिंग क्रांति इन्फिनिक्स मोबाइल्स इंडिया के सीईओ अनीश कपूर ने कहा, ''अभी, लगभग 45 प्रतिशत गेमर्स मोबाइल फोन पर खेलते हैं.’’ कपूर एक संपूर्ण गेमिंग अनुभव के लिए तैयार किए गए फोन की एक पूरी नई रेंज की उम्मीद करते हुए कहते हैं, ''यह समय के साथ नया मानदंड बन गया है... मुझे लगता है कि इसमें अभी भी 5जी तकनीक के आने से काफी मौके हैं.’’

एशियाई खेलों में बढ़ावा
क्राफ्टन के कंट्री मैनेजर अनीश अरविंद ने कहा कि हांग्जो में ई-स्पोर्ट्स को प्रतियोगिता में शामिल करने से खेल को ''बहुत अधिक वैधता’’ मिलती है. यह वीडियो गेम उद्योग के साथ-साथ आयोजकों दोनों के लिए नफे की स्थिति है जो युवा दर्शकों को अगले साल इसे देखने के लिए आकर्षित कर सकते हैं.

तेजी से बढ़ता उद्योग बनाता है तेज चैंपियन प्रसाद मांगिपुडी को भरोसा था कि भारत जल्दी ही अपनी जमीन से 'वैश्विक चैंपियन’ देखेगा. स्पोर्ट्सलाइव के प्रबंध निदेशक और हैदराबाद हाइड्राज के सह-मालिक प्रसाद मांगिपुडी कहते हैं, ‘‘इसका ईकोसिस्टम बेहद लोकतांत्रिक है.’’ वे एक ई-स्पोर्ट एथलीट नमन माथुर उर्फ मॉर्टल का उदाहरण देते हैं जो तीन साल के भीतर एक आइकन बन गया.

कोविड -19 महामारी के दौरान अधिकांश बच्चों और युवाओं को घरों में रहना पड़ा था और इसके साथ भारतीय ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में भारी उछाल देखा गया. उद्योग के हितधारकों के बीच उम्मीदें परवान चढ़ रही हैं कि ई-स्पोर्ट्स के रूप में अगले साल के एशियाई खेलों में इसको एक प्रतिस्पर्धी इवेंट के रूप में शामिल किए जाने से इसे और अधिक लोकप्रियता मिलेगी.

उनमें से पांच—भारत के प्रमुख ई- स्पोर्ट्स एथलीटों में से एक से लेकर एक बिजनेस हेड तक—कॉन्क्लेव में मौजूदा रुझानों पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए एक साथ आए. यह खंगालने कि इसका भविष्य क्या है और ई-गेमिंग क्यों बना रहने वाला है?

ई-स्पोर्ट्स टाइमपास नहीं
मॉर्टल के अनुसार, संजीदगी से एक नौकरी है क्योंकि एक ई-स्पोर्ट एथलीट को अपने जुनून में कम से कम छह घंटे का निवेश करना पड़ता है. माथुर कहते हैं, ''किसी भी अन्य दफ्तर की नौकरी की तरह, एक एथलीट को अपनी टीम के साथ बैठना और खेलना होता है.

उनके जीवन में एक अनुशासन होना चाहिए, पूरी टीम को एक ही समय पर जागना है, एक ही समय पर सोना है, टीम चर्चा करनी होती है.’’ पूर्ण उद्योग में कई रिक्तियां होती हैं, चाहे वह एक कोच, एक खिलाड़ी प्रबंधक, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक विश्लेषक या कई अन्य हो सकती हैं.

क्रिकेट से ज्यादा पैसा
इंडिया टुडे ग्रुप में गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स के बिजनेस हेड विश्वलोक नाथ ने दोनों खेलों के बीच तुलना की और बताया कि कैसे फोर्टनाइट विश्व कप में आइसीसी विश्व कप की तुलना में पुरस्कार राशि दोगुनी है. दर्शकों की संख्या में भी ई-स्पोर्ट्स क्रिकेट से आगे है.

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