भारत ने तोक्यो ओलंपिक में सात पदक जीते, जिसमें पहली बार आया एथलेटिक्स का स्वर्ण पदक शामिल है. हालांकि इन ऐतिहासिक कारनामों के बावजूद एक तथ्य सर पर सवार है कि एक अरब से अधिक लोगों का देश पदक तालिका में 48वें स्थान पर रहा. केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और उनके पूर्ववर्ती किरेन रिजिजू ने भारत को खेल महाशक्ति बनाने के सरकार के विजन पर चर्चा की.
अनुराग ठाकुर
केंद्रीय सूचना और प्रसारण, युवा मामले और खेल मंत्री
''पहला मुद्दा तो एक खेल संस्कृति का निर्माण करना है, 'रोकने वाली संस्कृति’ से खेल संस्कृति तक, लोगों की भागीदारी से लेकर लोगों के आंदोलन तक. ऐसी भावनाओं को पोषित करना और उन्हें बढ़ावा देना बहुत महत्वपूर्ण है...
केंद्र, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय खेल संघों, शैक्षणिक संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों और कॉर्पोरेट्स सहित निजी क्षेत्र की ओर से बड़ी भूमिका निभाई जानी है. खेल राज्य का विषय है’’
''हमारे शैक्षणिक संस्थानों को खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है. आप अमेरिका में स्टैनफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों को देखें तो... एक विश्वविद्यालय में अमेरिका के जीते पदकों का एक बड़ा हिस्सा होता है. भारत में कितने विश्वविद्यालय इस तरह का योगदान दे रहे हैं?’’
किरेन रिजिजू
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री
‘‘धारणा ऐसी बना दी गई है कि एथलीट बहुत सताए हुए हैं क्योंकि सरकार पर्याप्त सहायता नहीं कर रही है. कोई अन्य सरकार खेलों पर उतना पैसा खर्च नहीं करती है और न ही उसमें दिलचस्पी लेती है, जितनी कि भारत सरकार. सरकार का काम खेल का बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं है... यह काम पेशेवर तरीके से किया जाना चाहिए’’
''जब कोई एथलीट पदक जीतता है, तभी लोग जश्न मनाते हैं... इसलिए ओलंपिक के दौरान नागरिकों को शामिल करने के लिए चीयर4इंडिया अभियान शुरू किया गया था. यहां क्रिकेट इसलिए सफल है क्योंकि लोग खेल देखते हैं.
जब मैं खेल मंत्री था तो लोग पूछते थे कि हम क्रिकेट की तरह अन्य खेलों को बढ़ावा क्यों नहीं देते? सरकार क्रिकेट को पैसा नहीं देती, यह लोगों से आता है. जब तक लोग खेल आंदोलन से नहीं जुड़ते, हम खेल महाशक्ति नहीं बन सकते’’

