scorecardresearch

आवरण कथाः उम्मीद की लंबी छलांग

श्रीशंकर अपने प्रदर्शन में हर साल 25-30 सेमी तक का सुधार कर रहे हैं और नई तकनीक अपना रहे हैं. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो वे 8.38 मीटर से 8.45 मीटर के बीच की छलांग लगाएंगे

एम. श्रीशंकर, 22 वर्ष, विधा: एथलेटिक्स
एम. श्रीशंकर, 22 वर्ष, विधा: एथलेटिक्स
अपडेटेड 16 जुलाई , 2021

एस. श्रीशंकर, 22 वर्ष

श्रेणी: लंबी कूद

कैसे क्वालिफाइ किया: मार्च 2021 में पटियाला में हुए फेडरेशन कप में अपने पांचवें प्रयास में 8.26 मीटर की छलांग के साथ ओलंपिक क्वालीफाइंग मार्क (8.22 मीटर) पार किया

उपलब्धियां: रैंकिंग में दुनिया के 38वें नंबर के खिलाड़ी श्रीशंकर पांच मौकों पर 8 मीटर से अधिक दूरी तक कूदे हैं और राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया है. गिकू में 2018 में आयोजित एशियाई जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और 2018 के एशियाई खेलों में छठे स्थान पर रहे

मुरली श्रीशंकर को पता था कि किसी और के मुकाबले वे बहुत पहले ओलंपिक में पहुंचेंगे. 12 साल की उम्र में जब वे फर्राटा दौड़ को छोड़कर लंबी कूद में उतरे थे, तभी बनाई ईमेल आइडी olympianshankar@gmail.com में उनके इरादे झलक रहे थे. उनके पिता पूर्व एथलीट एस. मुरली को लगा कि उनका बेटा कुछ ज्यादा ही बड़ा ख्वाब देख रहा है. वे कहते हैं, ''मुझे फिक्र थी कि नाकाम होने पर उसकी क्या दशा होगी.'' लेकिन श्रीशंकर दृढ़ निश्चयी थे. एक दशक बाद उनका सपना आखिरकार सच हो गया.

वैसे, खेल उनके खून में है. श्रीशंकर की मां के.एस. बिजिमोल ने 1992 एशियाई ट्रैक ऐंड फील्ड चैंपियनशिप में 800 मीटर में रजत पदक जीता था और उनकी छोटी बहन श्रीपार्वती हेप्टाएथलीट हैं. लेकिन उनके ट्रिपल जम्पर पिता ने एक धावक के रूप में बेटे की क्षमता को पहचाना जब चार वर्षीय श्रीशंकर ने उनके साथ अभ्यास शुरू किया. बेटे के कोच एस. मुरली कहते हैं, ''फर्राटा धावकों का खेल जीवन बहुत छोटा होता है इसलिए मैंने उन्हें लंबी कूद से परिचित कराया.'' श्रीशंकर को भी यह खेल भा गया और उन्होंने इसमें ही भविष्य देखना शुरू कर दिया. वे कहते हैं, ''यह उडऩे जैसा है. जब भी मैं एक अच्छी छलांग लगाता हूं, मैं खुद को हवा में उड़ता महसूस करता हूं.''

ओलंपिक में एथलेटिक्स भारत की ताकत नहीं रहा है. ट्रैक ऐंड फील्ड मुकाबलों में देश का दिल दो बार बुरी तरह टूटा है. 400 मीटर दौड़ में 1960 में मिल्खा सिंह एक सेकंड के दसवें हिस्से के अंतर से और 1984 में पी.टी. उषा एक सेकंड के सौवें हिस्से के अंतर से कांस्य पदक से चूक गए थे.

युवा एथलीट ने पिछला पूरा साल केरल के पलक्कड़ में प्रशिक्षण में बिताया. हालांकि, महामारी के कारण चीजें आसान नहीं रही हैं. श्रीशंकर पिछले एक साल में किसी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में शामिल नहीं हुए हैं, जिससे उनके प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उनके फॉर्म का आकलन करना मुश्किल हो गया है. इस साल उन्होंने सिर्फ पटियाला में नेशनल इवेंट्स में हिस्सा लिया है. हालांकि इससे श्रीशंकर का फोकस नहीं बिगड़ा है.

मुरली परिवार ने भी अपनी सारी ऊर्जा पहली बार ओलंपिक में जा रहे श्रीशंकर को प्रेरित करने में लगा दी है. मुख्य दरवाजे से लेकर लिविंग रूम में कांच की मेज तक, ओलंपिक के प्रतीक चिन्ह पांच गोल छल्ले उनके घर में हर प्रमुख जगह पर नजर आते हैं. एस. मुरली कहते हैं, ''हमारी सबसे बड़ी चिंता हमारे बच्चों का भविष्य है. हमारे पास जो कुछ भी है, वह सब हम उन पर खर्च कर देने के लिए तैयार हैं ताकि वे भारत की महान खेल हस्तियां बन सकें.''

Advertisement
Advertisement