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कारोबार की संभावनाएं  बहुत बेहतर नहीं

सिरसत, जो ठाणे लघु उद्योग संघ के उपाध्यक्ष भी हैं, का कहना है कि एमएसएमई को केंद्र सरकार द्वारा समर्थित ऋण की घोषणा के बावजूद, ऋण प्राप्त करना अभी भी बहुत मुश्किल है.

अनिश्चित वक्त मुंबई के पास ठाणे में अपनी फैक्टरी में सिरसत (दाएं)
अनिश्चित वक्त मुंबई के पास ठाणे में अपनी फैक्टरी में सिरसत (दाएं)
अपडेटेड 1 फ़रवरी , 2021

केस स्टडी
आशीष सिरसत,
49 वर्ष 
पार्टनर, नाईक ओवन
मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, मुंबई

एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) क्षेत्र के अधिकांश व्यवसाय मालिकों की तरह, आशीष सिरसत के लिए भी लॉकडाउन के शुरुआती 45 दिन बहुत मुश्किलों भरे थे. उन्हें मुंबई के पास ठाणे के अपने 10-कर्मचारियों वाले कारखाने को बंद करना पड़ा, जहां ओवन और मिक्सर जैसे बेकरी के उपकरण बनते हैं. हालांकि, सरकार सहित अन्य देनदारों से उनके अपने भुगतान नहीं प्राप्त हो रहे थे फिर भी उन्हें अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करना पड़ता था.

इसके अलावा, सरकार का यह फरमान कि कारखानों को बंद किए जाने के बावजूद मालिकों को अपने कर्मचारियों को पूरा भुगतान करना होगा, एक और बड़ी चोट थी. (सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और केंद्र से निजी कंपनियों के खिलाफ इस मामले में कोई बल प्रयोग नहीं करने को कहा, तो बड़ी राहत मिली थी).

मध्य मई तक, जब उद्योगों को फिर से खोलने की अनुमति दी गई तो सिरसत को, जिन्होंने प्रकाश नाईक की साझेदारी में 1999 में अपना उद्यम शुरू किया था, ने मांग में उछाल देखी. सिरसत कहते हैं, ‘‘जहां खाद्य उद्योग की आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई थी, वहीं स्थानीय बेकरियां अच्छा व्यवसाय कर रही थीं. बाजार में मशीनों की तत्काल आवश्यकताएं सामने आईं और कुछ मामलों में तो हमें मांग पूरी कर पाने में भी मुश्किल हुई थी.’’

दीवाली तक बिक्री काफी मजबूत थी और उस समय तक, उनकी कंपनी ने पिछले साल के 1.5 करोड़ रुपए के कारोबार के स्तर को पार कर लिया था. (वे बताते हैं कि वे एक साल में लगभग 2 करोड़ रुपए की बिक्री करते थे, लेकिन पिछले साल बिक्री अच्छी नहीं रही थी). धीरे-धीरे लॉकडाउन को हटाए जाने से, बेकरी उत्पादों जैसे खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई तो व्यापार को थोड़ी और राहत मिली.

सिरसत के लिए चिंता की बात यह है कि दिवाली के बाद से मांग धीमी हो गई है. वे कहते हैं, ‘‘औसतन हर दिन तीन लोग उत्पादों के बारे में पूछताछ करते थे. वह गिरकर, अब हर दो दिन में एक रह गई है.’’ कुछ मामलों में, यहां तक कि जिन ग्राहकों ने ऑर्डर दिया है और उसके लिए आंशिक भुगतान भी कर चुके हैं, वे भी अपने उत्पादों को यह कहते हुए नहीं उठा रहे हैं कि नए साल में लेकर जाएंगे.

उनकी फर्म का चीन से मशीनरी आयात का कारोबार भी था लेकिन उस व्यवसाय को भी नुक्सान उठाना पड़ा है. पहले कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण और बाद में चीन के साथ सीमा पर तनाव के कारण, माल बंदरगाह पर ही अटक गया.

सिरसत, जो ठाणे लघु उद्योग संघ के उपाध्यक्ष भी हैं, का कहना है कि एमएसएमई को केंद्र सरकार द्वारा समर्थित ऋण की घोषणा के बावजूद, ऋण प्राप्त करना अभी भी बहुत मुश्किल है. एक स्थानीय को-ऑपरेटिव बैंक से 20 लाख रुपए के ऋण के लिए उनका आवेदन अभी भी लंबित है.

वे कहते हैं, ‘‘आने वाले वर्ष के लिए संभावना बहुत अच्छी नहीं है, क्योंकि उत्पादों के बारे में पूछताछ कम हो रही है.’’ बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें अपना व्यवसाय चलाने के लिए बैंकों से किस तरह की वित्तीय सहायता मिलती है. ठ्ठ
—एम.जी. अरुण

एमएसएमई दुर्गति
एक अनुमान के मुताबिक देश में 6.33 करोड़ एमएसएमई में करीब 15 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है. महामारी से बुरी तरह प्रभावित ये ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. जानकारों का मानान है कि इस क्षेत्र की बहाली के उपाय सबसे पहले किए जाने थे. लेकिन बड़ी बात तो यह है कि सरकार अभी तक यही नहीं बता सकी है कि कितनी इकाइयां बंद हो गईं.

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