अमिताभ श्रीवास्तव
मार्च की 25 तारीख को जब लॉकडाउन का ऐलान हुआ तो झारखंड के रांची में सामाजिक संगठन सिटीजन फाउंडेशन चलाने वाले गणेश रेड्डी ने पाया कि लोग जब घर से रोजमर्रा का जरूरी सामान खरीदने निकल रहे हैं तो सामाजिक मेलजोल में दूरी के नियमों का पालन नहीं कर रहे. रेड्डी बताते हैं, ''मुझे लगा कि हमारे पास वैक्सीन नहीं है, ऐसे में कोविड-19 को एक-दूसरे से दूरी बनाकर से ही रोका जा सकता है. एक दूसरे से दूर रहना ही एकमात्र उपाय है. मैने तय किया कि संक्रमण से बचने के लिए कितनी न्यूनतम दूरी जरूरी है, इसे समझाने के लिए एक सचित्र प्रदर्शन तैयार किया जाए.''
स्कूली पढ़ाई अधूरी छोड़ देने वाले रेड्डी ने सिटीजन फाउंडेशन की स्थापना 1997 में की थी. उनके पास 500 लोगों की टीम है. इनमें से कई ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर डिग्री वाले भी हैं. उनका संगठन झारखंड के 24 जिलों में सक्रिय है, जहां वह स्वास्थ्य, रोजगार और जल संसाधन प्रबंधन जैसे मुद्दों पर काम करता है. 31 मार्च को रांची में कोविड-19 का पहला मामला पता चलते ही रेड्डी ने सबसे पहले अपनी टीम से बात की और वे काम में जुट गए.
उन्होंने सबसे पहले उन 130 जगहों की पहचान की जहां लोग इकट्ठा होते हैं—सद्ब्रजी बाजार, परचून की दुकानें, सामुदायिक रसोई, मुख्य मार्गों की दुकाने वगैरह. रेड्डी ने तय किया कि वहां गोले बना दिए जाएं जिससे यह पता लगे कि दो लोगों के बीच कम से कम कितनी दूरी रखनी है. जैसे ही रेड्डी को जिला प्रशासन से इस परियोजना की इजाजत मिली, उन्होंने कुछ पेंटरों को बुलाया और पक्के डिस्टेंपर से 5,000 गोले बनाए जिनकी एक दूसरे से दूरी एक मीटर थी. रेड्डी बताते हैं, ''लोगों ने गोलों पर तुरंत ही ध्यान दिया और दुकानों के बाहर इंतजार के दौरान उनका इस्तेमाल शुरू कर दिया. हमने पूरे अप्रैल कोविड-19 के खिलाफ जागरूकता अभियान जारी रखा. अब रांची में वायरस से बचने के लिए हर कोई नियमों का पालन करता दिखाई देता है.''
झारखंड में संक्रमण के 115 मामले सामने आए हैं जिनमें 83 सिर्फ रांची के हैं. रेड्डी को यह भी महसूस हुआ कि कोविड-19 पर बहुत ज्यादा जोर देने से नियमित इलाज के मामले में उन लोगों को खासी परेशानी हो रही है जो दूसरे रोगों पीडि़त हैं. रेड्डी कहते हैं, ''डॉक्टर मदद के लिए तैयार थे लेकिन वे निजता के साथ संक्रमण से सुरक्षा भी चाहते थे.'' रेड्डी ने तय किया कि डॉक्टरी सलाह के लिए एक वर्चुअल ओपीडी शुरू की जाए. उन्होंने टेलीफोन ओपीडी के जरिए डॉक्टरों और मरीजों के बीच संपर्क का एक सूत्र कायम किया, जिसके लिए सात डॉक्टर उनके साथ आए. इसे 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शुरू किया गया. 'हेलो, डॉक्टर' नाम की इस हेल्पलाइन पर अभी तक झारखंड और बिहार के हजारों लोग फोन कर चुके हैं.
रेड्डी ने ऐसे लोगों को 16,000 मास्क भी बांटे जो या तो इन्हें खरीदने की हैसियत नहीं रखते थे या फिर अपने पल्ले की मामूली-सी रकम से इसके लिए पैसे खर्च नहीं करना चाहते थे. मास्क के अलावा उन्होंने सब्जी विक्रेताओं, ठेला चलाने वालों और जरूरी सेवाओं की आपूर्ति करने वालों को सैनिटाइजर भी बांटे.
रेड्डी कहते हैं, ''अधिकारी जब देश को बचाने में व्यस्त थे तो हम उनकी ओर से छोड़ दी गई जगह को भरना चाहते थे. सिटीजन फाउंडेशन राहत के परंपरागत तरीकों के बदले खाली जगहों को भरने में विश्वास रखता है.''
उनका संगठन झारखंड के साहिबगंज जिले में एक अस्पताल भी चलाता है जिसे कोविड अस्पताल में बदल दिया गया है. इसके अलावा गिरीडीह और गोड्डा जिलों में उनकी सचल चिकित्सा इकाइयां भी हैं जो अब कोविड-19 की जांच का काम भी कर रही हैं.
***

