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आवरण कथाः दादा की अब दूसरी पारी

जिस सौरव गांगुली के बारे में बहुत से लोगों का मानना है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट में रीढ़ पैदा की. वे अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के मुखिया हैं.

मार लिया मैदान 6 दिसंबर 2019 को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट में सौरव गांगुली
मार लिया मैदान 6 दिसंबर 2019 को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट में सौरव गांगुली
अपडेटेड 1 जनवरी , 2020

अन्य सुर्खियों के सरताज

सौरव गांगुली, 47 वर्ष

बीसीसीआइ अध्यक्ष

सौरव गांगुली को 'इंतजार' के खेल से प्यार है. अगर टॉस के लिए आस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को जान-बूझकर इंतजार कराने के उनके किस्से लोककथाओं का हिस्सा बन चुके हैं तो आखिरी क्षण में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अध्यक्ष पद के सर्वसम्मत उम्मीदवार के रूप में उनका सामने आना भी कम चौंकाने वाला मामला नहीं था. इसमें पेचीदा बात थी मुंबई की उड़ान पकडऩे के पहले नई दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात.

कयास लगे कि वे गृहराज्य पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पेश किए जाएंगे. हालांकि गांगुली और भाजपा, दोनों, ने इन बातों को 'अफवाह' बताया है. (अलबत्ता, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर विवाद उभरने के बाद खुशवंत सिंह को उद्धृत करते हुए केंद्र में सत्तारूढ़ दल को 'फासीवादी' बताने वाली गांगुली की बेटी की इंस्टाग्राम पोस्ट ने इस खुशी भरे माहौल में थोड़ा अलग रंग घोल दिया. लेकिन, 'दादा' ने इस पर यह कहते हुए पर्दा डाल दिया कि 18-साल की बच्ची 'राजनीति समझने के लिहाज से बहुत छोटी है.')

इस बीच, अध्यक्ष के रूप में कामकाज के पहले दिन टीम इंडिया का ब्लेजर पहन कर गांगुली ने खिलडिय़ों को महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि वे हमेशा उनके समर्थन में खड़े नजर आएंगे. इसके बाद की बड़ी बात थी डे-नाइट टेस्ट मैचों का आरंभ; जिसके लिए उनके घरेलू मैदान, कोलकाता के ईडेन गार्डेन्स को चुना गया था. इसमें बांग्लादेश को हराने का मतलब था कि गांगुली का पहला प्रयोग सफल रहा.

कार्यभार ग्रहण करने के कुछ हफ्तों बाद वे राहुल द्रविड़ से मिले जो अब बेंगलूरू स्थित उस राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के मुखिया हैं, जिसे व्यापक रूप से भारतीय क्रिकेट की नर्सरी समझा जाता है. यह एक संकेत है कि जिस आदमी ने मैच-फिक्सिंग के आरोपों से त्रस्त खेल को विश्वविजेता भारतीय टीम बना कर उबारा था. वह घरेलू क्रिकेट का ढांचा सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है. जो बात प्रशंसकों को उत्साहित रखेगी वह है दो दृढ़निश्चयी लोगों—गांगुली और वर्तमान टीम कप्तान विराट कोहली—के बीच शक्ति संतुलन. लग रहा था कि नए निजाम में मुख्य कोच और कोहली के पसंदीदा रवि शास्त्री, जिनकी गांगुली के साथ सार्वजनिक रूप से कहासुनी हुई थी, की विदाई तय है. लेकिन, अब तक सब कुछ सहज और लक्ष्य केंद्रित रहा है. दादा फिलहाल सीधे बल्ले से खेल रहे हैं.

सुर्खियों की वजह

अक्तूबर में पूर्व भारतीय कप्तान ने बीसीसीआइ अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभाला

गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात पर कयास लगे कि वे पश्चिम बंगाल में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं

उनके पदभार संभालने के महीनेभर के भीतर भारत ने पहले डे-नाइट टेस्ट मैच की मेजबानी की.

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