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डार्क मोड

क्रांतिकारी दशकः लग गया चस्का

इस दशक में सोशल मीडिया आम लोगों के लिए अभिव्यक्ति का जरिया बना तो दूसरी तरफ दशक के दूसरे हिस्से में दूसरों के खिलाफ झूठ फैलाने का कूड़ाघर भी बना.

फोटो साभारः इंडिया टुडे
फोटो साभारः इंडिया टुडे
अपडेटेड 17 दिसंबर , 2019

इंडिया टुडे

यह साल सोशल मीडिया को सीमाओं से परे जाकर खबरें पहुंचाने के जरिये की खालिस अच्छाई के रूप में सराहा गया था, जहां आम लोगों को भी बड़े पाठक-दर्शक तक पहुंच मिल सकती थी. पर दशक के दूसरे हिस्से में सोशल मीडिया दूसरों के खिलाफ दादागीरी, खेमाबंदी और झूठ फैलाने का कूड़ाघर बन गया है.

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