अमूमन सेना के पूर्व प्रमुख या तो गोल्फ कोर्स के ढलते सूरज में गुम हो जाते हैं या राजभवनों के आरामगाह जैसे ऊंचे ओहदे को हासिल कर लेते हैं. लेकिन मई, 2012 में 26वें सेना अध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए 62 वर्षीय के वी.के. सिंह एक अनजानी जमीन पर कदम रख चुके हैं.
वे दिल्ली कैंट में रिटायर्ड सेना प्रमुखों को दिए जाने वाले विशाल बंगले में रहकर एक साल के विस्तार के लिए तकरार करते रहे. समय-समय पर सरकार पर हमले बोलने का कोई भी मौका उन्होंने नहीं छोड़ा. जनरल सिंह अण्णा हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा बन गए हैं, लेकिन वे सिर्फ उनके साथ नहीं हैं. नवंबर में लोगों को यह देखकर झटका लगा कि वे आइएनएलडी नेता ओमप्रकाश चौटाला के साथ एक मंच पर बैठे हैं और इसके एक माह बाद उन्होंने सरकार के खिलाफ एक किसान रैली का नेतृत्व किया.
उन्होंने उस समय कहीं भी टपक जाने वाले विरोध प्रदर्शक की अपनी छवि और पुख्ता की जब वे 23 वर्ष की लड़की के साथ हुए बलात्कार के विरोध में इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. लोगों को उकसाने के आरोप में उन पर मुकदमा दर्ज किया गया.
सरकार ने यदि उन्हें जन्म तिथि में बदलाव की इजाजत दी होती तो शायद उनका करियर कोई और मोड़ ले लेता. उनके जन्म तिथि के विवाद का अंत सुप्रीम कोर्ट में जाकर हुआ. यह शायद ‘क्या होता यदि ऐसा होता' टाइप सवाल है जिसका जवाब हमें कभी नहीं मिल पाएगा.

