एक दशक पहले अनुराग कश्यप जब बॉलीवुड में संघर्ष कर रहे थे, फिल्म उद्योग के एक पुराने व्यक्ति ने उन्हें जबरदस्त सफलता मिलने की बात कही थी. उन्होंने भविष्यवाणी की, ‘‘उनके पास आइडिया की कमी नहीं होगी क्योंकि वे अपनी आसपास की दुनिया में काफी गहराई तक जमे हुए हैं.”
कश्यप को तब गैंगस्टरों की गाथा सत्या के स्क्रिप्ट राइटर के रूप में जाना जाता था और वे अपनी पहली फिल्म पांच को रिलीज कराने के लिए जूझ रहे थे. उन्हें 2007 में ब्लैक फ्राइडे के लिए समीक्षकों से तारीफ मिली और 2009 में उनकी फिल्म देव डी को बॉक्स ऑफिस पर सफलता.
2012 में दो पार्ट में बनी फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर के लिए उन्हें ये दोनों चीजें मिल गईं. पांच घंटे की इस फिल्म में धनबाद के कोयला माफिया की खूनी राजनीति पेश की गई है. इस फिल्म ने कश्यप को सिनेमा में उभरती नई धारा का चेहरा बना दिया. उन्होंने सिर्फ पांच साल में 20 से ज्यादा फिल्में बनाईं हैं. अब फाइनेंसर भी उन पर दांव लगाने के इच्छुक हैं. यही वजह है कि स्क्रिप्ट राइटर और डायरेक्टर बनने के इच्छुक लोग सीधे कश्यप के वर्सावा स्थित ऑफिस में पहुंच जाते हैं, फेसबुक पर उनका पीछा नहीं छोड़ते और यही वजह है कि वे अपना फोन कभी-कभी ही उठाते हैं.
40 वर्षीय के कश्यप अपनी फिल्म बॉम्बे वेल्वेट और शहरी थ्रिलर अग्ली के पूरा होने के बाद देसी सुपरहीरो डोगा पर एक फिल्म बनाने की योजना बना रहे हैं. उनके पास आइडिया की कोई कमी नहीं है जिसे निकट भविष्य में लोग देखेंगे.

