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15 लाख हत्याएं, फांसी 50 को

दिल्ली गैंगरेप के बाद से पूरा हिंदुस्तान एक सुर में एक ही मांग कर रहा है. रेप का कानून बदलो और रेपिस्ट को फांसी दो. पर सवाल यह है कि क्या सिर्फ कानून बदल देने या कानून कड़ा कर देने से रेप रुक जाएगा?

अपडेटेड 21 जनवरी , 2013

दिल्ली गैंगरेप के बाद से पूरा हिंदुस्तान एक सुर में एक ही मांग कर रहा है. रेप का कानून बदलो और रेपिस्ट को फांसी दो. पर सवाल यह है कि क्या सिर्फ कानून बदल देने या कानून कड़ा कर देने से रेप रुक जाएगा? हिंदुस्तान में जुर्म की तस्वीर को देखते हुए यह मांग अगर मान भी ली जाए और रेप के लिए फांसी की सजा तय भी कर दी जाए तो भी इस जुर्म की सूरत नहीं बदलने वाली.

हिंदुस्तान में जुर्म को जुर्म बताने के लिए भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) तैयार की गई. फिलहाल आइपीसी में कुल 511 धाराएं हैं. यानी आइपीसी के लिहाज से हिंदुस्तान में कुल 511 तरह के जुर्म हैं. आइपीसी की सात धाराओं—121, 132, 302, 305, 307, 364 और 396 के तहत मौत की सजा का प्रावधान है.

आइपीसी की सबसे मजबूत धारा 302 यानी मर्डर का आईना दिखाते हैं. साल 2002 से साल 2011 तक हिंदुस्तान में 3,31,907 लोगों का मर्डर हो चुका है. यानी हर दिन 94 कत्ल होते हैं, हर एक घंटे में चार और हर 15 मिनट में एक हत्या. मर्डर के मामले में हिंदुस्तान पिछले दस बरसों से लगातार पहले नंबर पर है. दूसरे नंबर पर अमेरिका और तीसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका है. हिंदुस्तान में औसतन हर साल तीस हजार से ज्यादा मर्डर होने के बावजूद सिर्फ सात फीसदी लोगों को ही सजा मिल पाती है. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो और कुछ दूसरे आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 63 बरसों में हिंदुस्तान में लगभग 15 लाख लोगों का मर्डर हो चुका है. पर हत्या के जुर्म में 50 लोगों को भी फांसी नहीं दी गई.

अब जरा बलात्कार के आंकड़ों पर नजर डालें. आइपीसी की धारा 376 के तहत बलात्कार की अधिकतम सजा उम्र कैद है. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से पिछले दस साल में हिंदुस्तान में 1,98,139 बलात्कार के मामले सामने आए. यानी हर रोज 66 हर घंटे तीन और हर 20 मिनट में देश में एक बलात्कार होता है.

मर्डर के मामले में जहां कनविक्शन रेट यानी सजा दिलाने का औसत सात फीसदी है वहीं रेप के मामले में यह घटकर 6.3 फीसदी है. यानी पिछले दस सालं में बलात्कार के जो दो लाख मामले सामने आए उनमें से फकत 12,000 लोगों को ही सजा मिली.

अब जरा सोचें कि क्या सिर्फ फांसी की सजा रेप रोकने के लिए काफी है? अगर हां, तो फिर दुनिया में हिंदुस्तान उस मर्डर के मामले में पहले नंबर पर क्यों है जिसके लिए पहले से ही फांसी की सजा तय है?  यहां शक नहीं, सीधे सवाल खड़े होते हैं क्योंकि मर्डर की मिसाल हमारे सामने है. जिसमें पहले से ही फांसी की सजा का प्रावधान है. फिर भी लोग मर्डर करते नहीं डरते. बल्कि कत्ल के सबसे ज्यादा मामले हिंदुस्तान में ही हैं.

जाहिर है अगर मौत का डर होता तो मर्डर के मामले कम होते. पर ऐसा नहीं है. इसलिए यह सोचना कि सिर्फ कड़े कानून बना देने से बलात्कार के मामले कम हो जाएंगे, गलत है. तो अब सवाल यह है कि क्या फिर बलात्कार और मर्डर के आंकड़े कभी कम नहीं होंगे?  बिल्कुल कम हो सकते हैं. बस जरूरत इस बात की है कि हमारे पास जो भी कानून है उसका सख्ती से और शीघ्रता से पालन हो. बस अगर इतना हो जाए कि देश में बलात्कार और मर्डर के मामलों की सुनवाई साल भर के अंदर पूरी कर मुजरिमों को उनके किए की सजा मिल जाए. फिर देखिए कैसे हिंदुस्तान में जुर्म की तस्वीर बदलती है.

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