दक्षिण दिल्ली के फार्महाउस से जब पहली बार पोंटी और हरदीप चड्ढा के मारे जाने की खबर बाहर आई तो किस्सा साफ था कि दोनों भाइयों ने जमीन विवाद में एक-दूसरे को गोली मार दी. लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मौत की यह कहानी उलझती चली गई. शक की सबसे बड़ी वजह तो यह रही कि पोंटी ने महज तीन उंगलियों से ताबड़तोड़ गोलियां कैसे चलाई होंगी.
दूसरा सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए उस तथ्य से खड़ा हो गया जिसमें कहा गया कि पोंटी को गोलियां थोड़ी दूर से मारी गईं, जबकि हरदीप को काफी पास से गोलियां मारी गईं. यानी दो आदमी एक-दूसरे को गोली मार रहे हैं तो गोलियां बराबर दूरी से क्यों नहीं चलीं. हत्याकांड पर सबसे बड़ा सवाल उठा सुखदेव सिंह नामधारी की मौजूदगी पर. नामधारी पोंटी के करीबी माने जाते हैं और उनका लंबा आपराधिक रिकॉर्ड है.
हत्याकांड के समय तक वे उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे. बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया. इस हत्याकांड में पोंटी की तरफ से रिपोर्ट नामधारी ने ही लिखाई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें भी अपनी पूछताछ के दायरे में लिया. बीच में खबर आई की नामधारी पुलिस से बचते फिर रहे हैं, लेकिन तीन दिन की चुप्पी के बाद नामधारी ने कहा कि वे कहीं नहीं भागे हैं और पुलिस की जांच में सहयोग देने को राजी हैं.
दरअसल वारदात वाले दिन जब पोंटी चड्ढा फार्महाउस पर पहुंचे तो उनके साथ नामधारी और नामधारी का सुरक्षा गार्ड था. पोंटी के पास अपना सुरक्षा गार्ड नहीं था, जबकि वे हमेशा अपने निजी सुरक्षा अमले के साथ चला करते थे. नामधारी की ओर से पुलिस में लिखवाई गई रिपोर्ट में कहा गया कि उनके सुरक्षा गार्ड ने पोंटी के बचाव में गोलियां चलाईं. लेकिन जब दोनों तरफ से गार्ड गोली चला रहे थे, तो मौत सिर्फ दोनों भाइयों की ही क्यों हुई?
हत्याकांड में ताबड़तोड़ गोलीबारी और गोली चलाने के आरोप में पांच लोगों की गिरफ्तारी बार-बार सवाल उठा रही है कि हत्याकांड के पीछे कोई तीसरा आदमी तो नहीं है. खासकर जब यह कयास लगाए जाते हों कि पोंटी का इस्तेमाल कई नेताओं के काले धन को सफेद करने में किया जा रहा था. उधर दोनों भाइयों की हत्या के बाद जिस तरह चड्ढा परिवार ने एकजुटता दिखाई है और झगड़े के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है, ऐसे में पूरे मामले का उलझना लाजिमी है.
शायद इसीलिए दिल्ली पुलिस हत्याकांड के सिलसिले में अब तक 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है. पुलिस जांच के मुताबिक, इस हत्याकांड में हरदीप के 0.3 स्मिथ ऐंड वेसन पिस्टल का प्रयोग हुआ. इसके अलावा नामधारी के सुरक्षा गार्ड के पास एसएएफ कारबाइन थी. चड्ढा बंधुओं को पंजाब पुलिस ने जो सुरक्षाकर्मी मुहैया कराए थे उनके पास चार कारबाइन और तीन एके 47 राइफल और एक 9 एमएम की पिस्टल थी.
पुलिस इन सारे हथियारों को फोरेसिंक जांच के लिए भेज रही है ताकि यह पता चल सके कि किस हथियार से गोलियां दागी गईं. हथियारों का इतना बड़ा जखीरा, चड्ढा बंधुओं की अकूत दौलत का झगड़ा और सियासत का बदलता रंगरूप हत्याकांड को जासूसी कथाओं जैसा बना रहा है. हत्याकांड का राज खुलने पर पता चलेगा कि इस खूनी खेल में चड्ढा बंधु मोहरा थे या खिलाड़ी.

